मेरठ कैंट विधानसभा इन सीट पर तीन दशक से अजेय है , जानिए इससे जुड़ी हर अपडेट

मेरठ कैंट विधानसभा  इन सीट पर तीन दशक से अजेय है , जानिए इससे जुड़ी हर अपडेट
मेरठ कैंट विधानसभा क्षेत्र। जैसा नाम है, वैसा क्षेत्र। देश की पुरानी छावनियों में से एक है मेरठ कैंट। उसी तरह पुरानी विधानसभा क्षेत्रों में से भी एक। ऐसा विधानसभा क्षेत्र, जहां के लोगों ने जिस दल का साथ दिया तो फिर वर्षों तक उसका साथ देते ही रहे। आजादी के बाद करीब चार दशक तक कांग्रेस का साथ दिया। तीन दशक से अधिक समय से भाजपा के साथ। जिले की बड़ी विधानसभा क्षेत्रों में से यह एक है।
मेरठ जिले का दूसरा बड़ा विधानसभा क्षेत्र मेरठ कैंट विधानसभा क्षेत्र वोटरों की संख्या के हिसाब से जिले का दूसरा बड़ा विधानसभा क्षेत्र है। इस क्षेत्र में कुल चार लाख 27 हजार 225 वोटर हैं। पुरुषों और महिलाओं में करीब 30 हजार का अंतर है।
 
मेरठ कैंट विधानसभा क्षेत्र 1957 में पहली बार अस्तित्व में आया। 1957 से 1985 तक सात बार कांग्रेस का इस सीट पर कब्जा रहा। 1989 में पहली बार इस सीट पर भाजपा ने जीत दर्ज की। उसके बाद से अब तक भाजपा का कब्जा बरकरार है। बीच में 1967 में एक बार सोशलिस्ट पार्टी (एसएसपी) की जीत हुई। अब तक कांग्रेस के अजित सिंह चार बार, भाजपा के सत्यप्रकाश अग्रवाल चार बार और दो बार कांग्रेस की प्रकाशवती सूद, दो बार भाजपा के अमित अग्रवाल विधायक रहे हैं। 1967 में वी.त्यागी और 1969 में उमादत्त शर्मा विधायक रहे।
मेरठ कैंट विधानसभा क्षेत्र में देश की आजादी की पहली लड़ाई 1857 की शुरुआत हुई। ऐतिहासिक काली पलटन मंदिर भी इसी क्षेत्र में है, जिसकी अलग पहचान है। मेरठ कैंट विधानसभा सीट में अधिकतर हिस्सा छावनी क्षेत्र का आता है। हालांकि अधिकांश वोटर सिविल क्षेत्र में है। इसी क्षेत्र में सदर,बिल्वेश्वर मंदिर और देश का प्रसिद्ध आरवीसी सेंटर के साथ साथ सोती गंज बाजार भी है। मेरठ का प्रसिद्ध बाजार आबूलेन भी इसी क्षेत्र में है।
आजादी के बाद मेरठ कैंट के विधायक --  वर्ष --     विधायक -                     --पार्टी
 
                                                      1951--       सीट नहीं                          —-
 
                                                      1957--     प्रकाशवती सूद                   कांग्रेस
 
                                                       1962--    प्रकाशवती सूद                   कांग्रेस
 
                                                       1967--   वी.त्यागी                          एसएसपी
 
                                                       1969--   उमादत्त शर्मा                    कांग्रेस
 
                                                       1974--   अजित सिंह सेठी                कांग्रेस
 
                                                       1977--  अजित सिंह सेठी                कांग्रेस
 
                                                       1980--  अजित सिंह सेठी                कांग्रेस
 
                                                       1985--  अजित सिंह सेठी               कांग्रेस
 
                                                       1989--  परमात्मा शरण                 भाजपा
 
                                                       1993-- अमित अग्रवाल                 भाजपा
 
                                                      1996--  अमित अग्रवाल                 भाजपा
 
                                                       2002-- सत्यप्रकाश अग्रवाल           भाजपा
 
                                                       2007-- सत्यप्रकाश अग्रवाल          भाजपा
 
                                                       2012-- सत्यप्रकाश अग्रवाल         भाजपा
 
                                                       2017-- सत्यप्रकाश अग्रवाल          भाजपा

Makar Sankranti 2022: बाजारों में पंजाबी चिक्की, रामदाना समेत इन चीजों की बढ़ी डिमांड

Makar Sankranti 2022: बाजारों में पंजाबी चिक्की, रामदाना समेत इन चीजों की बढ़ी डिमांड

मकर संक्रांति पर्व को लेकर थोक और फुटकर बाजारों में ग्राहकों की रौनक रही। गजक, तिल के लड्डू, पंजाबी चिक्की, रामदाना समेत गुड़ और शक्कर के बने उत्पादों की अच्छी बिक्री हुई।

नया चावल और उड़द-मूंग की दाल भी खूब बिकी। हालांकि, बाजार में महंगाई की मार भी दिखी। सोशल डिस्टेंसिंग धड़ाम रही, तमाम ग्राहक मास्क तक नहीं लगाए थे। 

कानपुर नमकीन, बेकरी, गजक, पेठा एसोसिएशन के अध्यक्ष निर्मल त्रिपाठी ने बताया कि पिछले साल की तुलना में गुड़ और शक्कर के दाम बढ़े हैं। पिछले साल की तुलना में करीब 10-15 फीसदी दाम तेज हैं। गुड़ की गजक 240 रुपये किलो बिकी। गुड़ रोल और पंजाबी चिक्की का भाव 260 रुपये किलो रहा।

काले तिल का लड्डू 280 और सफेद तिल का लड्डू 260 रुपये किलो में बिका। बाजार में ग्राहकों की पसंद को देखते हुए चॉकलेट, खोवा, मेवा गजक भी हैं। इसके दाम अलग-अलग क्वालिटी के अनुसार 400 से 600 रुपये किलो तक है। महामंत्री शंकर लाल मतानी ने बताया कि बाजार में अच्छी संख्या में ग्राहक थे।

दोनों प्रकार के तिल के लड्डू, रामदाना, लइया की भी अच्छी डिमांड देखने को मिली। चावल और दाल कारोबारी सचिन त्रिवेदी ने बताया कि खिचड़ी में नया चावल ही इस्तेमाल में आता है। इसके चलते चावल और दालों की अच्छी बिक्री हुई।