सीएम योगी का हमला! सत्ता में रहते किसानों का हड़पा मुनाफा

सीएम योगी का हमला! सत्ता में रहते किसानों का हड़पा मुनाफा

गोरखपुर: गोरखपुर के चरगांवा में किसान मेला का शुभारंभ करने के साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर जोरदार हमला किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश और केन्द्र इमानदारी से किसान हित में काम रही है, वहीं स्वार्थी लोग किसान के कंधों पर बंदूक रखकर अराजकता फैला रहे हैं। लोग जानते हैं कि ये किसके इशारे पर काम कर रहे हैं। सत्ता में रहते हुए इन्होंने किसानों के हित में कोई काम नहीं किया। इन्होंने न कर्जमाफी की न ही खेतों में पानी पहुंचाया।

योगी ने कहा कि निहित स्वार्थी लोग केन्द्र और प्रदेश द्वारा संचालित की जा रही किसानों की योजना में बाधा पहुंचा रहे हैं। दुष्प्रचार कर रहे हैं।

समझ में नहीं आता है कि किसान की जमीन कोई कैसे हड़प लेगा
उन्होंने कहा कि समझ में नहीं आता है कि किसान की जमीन कोई कैसे हड़प लेगा। किसान कानून विकल्प है बाध्यता नहीं। एमसपी का लाभ तो किसानों का मिल ही रहा है, यदि उसे इससे अधिक लाभ मिलता है तो उसे मुनाफा कमाने का अधिकार मिलना ही चाहिए। ये लोग किसान के नहीं खुद के मुनाफे में कांटा लगने परेशान है। योगी ने कहा कि मंडिया बंद होने की बात झूठी है। मंडियां प्रतिस्पर्धा करेगी तो किसान को लाभ होगा। केन्द्र के बजट में 1000 मंडियों को विस्तारित किया जा रहा है। प्रदेश सरकार ने पिछले वर्ष 56 लाख मिट्रिक टन धान का खरीद किया था, इस बार 68 लाख मिट्रिक टन धान खरीद हुई है। किसान अपनी जमीन का मालिक है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के बाद किसान पहली बार राजनीति के एजेंडे बने हैं। योजनाओं के क्रियान्वयन का परिणाम है कि हर क्षेत्र में कुछ नया दिख रहा है। स्वायल कार्ड, एमएसपी डेढ़ गुना, प्रधानमंत्री किसान सम्मा निधि, कर्ज माफी से किसानों को लाभ हुआ है। किसान फसल योजना को सरलीकृत किया गया है। इसमें किसान के साथ बटाईदार को भी शामिल किया गया। पांच लाख की बीमा का कवर दिया गया है। उन्होंने कहा कि कृषि महाविद्यालय के प्रांगण में 20 करोड़ की लागत से छात्रावास का शिलान्यास किया गया है।

स्टाबेरी की खेती करने वाले किसान की तारीफ
किसान को मंडी के साथ जोड़ने का काम हुआ है। मंडी शुल्क से किसान कल्याण का काम हो रहा है। 576 कृषि उत्पादक संगठन काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने ग्राम उनौला के किसान का उदाहण देते हुए कहा कि दो बिघा में स्टाबेरी की खेती से 6 महीने में 6 लाख का मुनाफा कमाया है किसान ने। छह महीने में आठ लागत और 6 लाख की प्राफिट हुई है। कृषि उत्पादक संगठन बनाकर काम करना प्रारंभ करेंगे तो मुनाफा कई गुना बढ़ जाएगा। केन्द्र और प्रदेश सरकार का यही प्रयास है। कृषि उपकरणों में छूट दी जा रही है। सरल ब्याज दर पर ऋण दिया जा रहा है। समाज और राष्ट्र की खुशहाली किसान के बिना नहीं हो सकती है।

विपक्ष ने चीनी मिलों को बंद किया, हमनें चालू
योगी ने कहा कि पूर्वांचल में 42 चीनी मिलें थीं, अब 10 भी नहीं चल रही है। पिपराइच और मुंडेरवा की बंद चीनी मिल को चालू किया गया है। 1.27 लाख करोड़ गन्ना मूल्य का भुगतान किसानों को किया गया है। 66 हजार करोड़ का भुगतान किसानों के खाते में हुआ है। प्रधानमंत्री सम्माननिधि का 27 हजार करोड़ किसानों का मिला है।


कोविड-19 का कहर : मैं बचूंगा या नहीं घर गिरवी न रखना पापा, और उसने दुनिया को अलविदा कह दिया

कोविड-19 का कहर : मैं बचूंगा या नहीं घर गिरवी न रखना पापा, और उसने दुनिया को अलविदा कह दिया

लखनऊ: कोविड-19 का कहर तो है ही पर तमाम कोविड-19 संक्रमित मरीज आर्थिक परेशानी की वजह से भी कोविड-19 वायरस का मुकाबला नहीं कर पा रहे हैं. इस कोविड-19 काल में प्रदेश में ऐसे कई केस, कई कहानियों में परिवर्तित हो गए हैं. यदि पढ़ेंगे तो आंखें भर आएंगी. और तब समझ पाएंगे कोविड-19 के हमले का सबसे अधिक प्रभाव किस पर हो रहा है. यह शब्द वो युवा बोलकर चला गया, शब्द हैं पापा! मुझे भगवान भरोसे छोड़ दो, घर गिरवी न रखना. शुक्रवार को कोविड-19 से इस 23 वर्ष के बेटे का मृत्यु हो गया.

बिना पैसों नहीं होगा उपचार :- उन्नाव निवासी रामशंकर के लिए 17 अप्रैल का दिन अच्छा नहीं था. उस दिन के बाद तो घर में सब कुछ समाप्त हो गया. पत्नी जलज और बेटे सुशील (23 वर्ष) कोविड-19 संक्रमित हो गए. पत्नी तो ठीक होने लगी पर जवान बेटा तो बुरे दशा में आा गया. उन्नाव से कानपुर गए कहीं बेड नहीं मिला. तीन दिन बाद बेटे को लेकर लखनऊ आए. यहां एक निजी हॉस्पिटल में बेड मिल गया. डाक्टरों ने पहले अस्सी हजार रुपए जमा कराए. और रोजाना 25 हजार का खर्च बताया. रामशंकर क्या करते जो जमा पूंजी थी वह पहले ही खर्च कर चुके थे. पैसों की और आवश्यकता पड़ी तो बेटी की विवाह के जेवर बेच दिए. रामशंकर को 3.30 लाख रुपए मिले.

आपकी आखें भर आएंगी :- छोटी सी परचून की दुकान से रामशंकर के घर का खर्चा चलता था. उपचार के लिए और पैसे चाहिए थे. अंत में रामशंकर ने अपना पुश्तैनी घर गिरवी रखने का निर्णय किया. हॉस्पिटल में भर्ती बेटे सुशील को जब यह पता चला तो हॉस्पिटल के एक वार्ड ब्वाय के मोबाइल से पिता से बात की. उसने पिता से जो बोला उसे पढ़कर आपकी आखें भर आएंगी.

मुझे भगवान भरोसे छोड़ दो :- चार मई की शाम को सुशील ने पिता से कहाकि, पापा! मुझे भगवान भरोसे छोड़ दो, घर गिरवी न रखना,और कोविड-19 ने बेटे की छीनीं सांसें मेरे उपचार के लिए मम्मी के जेवर बिक गए. आपके खाते में जो पैसे थे वे भी समाप्त हो गए. मुझे पता चला है कि आप उन्नाव बाई पास वाला घर आप गिरवी रखने जा रहे हैं. मेरा उपचार कराने में सब बरबाद हो जाएगा. पम्मी (बहन) की विवाह कैसे होगी. मैं बचूंगा या नहीं, यह पक्का नहीं है. मुझे भगवान भरोसे छोड़ दो.’ तीन दिन बाद सुशील ने इस रहती दुनिया को अलविदा कह दिया.

दाह संस्कार कर दिया :- शुक्रवार प्रातः काल सुशील के मृत्यु की समाचार सुन पिता बेहोश होकर गिर पड़े. हॉस्पिटल प्रशासन की तरफ से उपलब्ध कराई गई एम्बुलेंस से बेटे का मृत शरीर आलमबाग शमशान घाट पहुंचा. जहां उसका दाह संस्कार हुआ.


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