कोरोना से जंग हार गए BJP प्रवक्ता डॉ. मनोज मिश्रा

कोरोना से जंग हार गए BJP प्रवक्ता डॉ. मनोज मिश्रा

लखनऊ: यूपी में कोरोना की रफ्तार पर ब्रेक नहीं लग रहा है । एक बार फिर प्रदेश में कोरोना संक्रमण के मामले 31 हजार के पार आए हैं। उत्तर प्रदेश में कोरोना का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। सूबे में बीते 24 घंटे में कोरोना के 30983 नए मामले सामने आए हैं। लखनऊ में रविवार को 3342 मामले आए, 3342 मामले आए, 5417 डिस्चार्ज हुए। बीते 24 घंटे में यूपी में कुल 36650 डिस्चार्ज हुए हैं। यूपी के नोएडा, गाजियाबाद, सहारनपुर में मामले तेजी से बढ़ रहे है।

राहत की बात रही कि इस दौरान 36,650 इस बीमारी से ठीक हो गए। प्रदेश में कोरोना संक्रमित लोगों की कुल संख्या 13,13,361 हो गई है। इबीते 24 घंटे में यूपी में कोरोना के चलते 290 मरीजों की जान गई है। सूबे में अबतक 41362046 सैंपल की जांच की गई है। अबतक 1313361 सैंपल पॉजिटिव पाए गए है।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए आवागमन न्यूनतम किए जाने की आवश्यकता है। इसके लिए अंतरराज्यीय बस सेवा को तत्काल स्थगित कर दिया जाए। अगले 15 दिनों तक उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों का संचालन केवल प्रदेश के अंदर ही किया जाए। वायु सेवा से आवागमन करने वाले सभी यात्रियों के लिए कोविड निगेटिव रिपोर्ट अनिवार्य की जाए। गांव में आने वाले हर एक प्रवासी व्यक्ति की टेस्टिंग करने के भी निर्देश दिए। कहा कि उन्हें नियमानुसार क्वारंटीन किया जाए।


यूपी में 2 दिन और बढ़ा कोरोना कर्फ़्यू

उत्तर प्रदेश में लागू आंशिक करोना कर्फ्यू को दो दिन और बढ़ाकर 6 तारीख़ सुबह 7 बजे तक कर दिया गया


भाजपा प्रवक्ता डॉ. मनोज मिश्र का कोरोना से निधन 

उत्तर प्रदेश भाजपा प्रवक्ता डॉ. मनोज मिश्र का कोरोना से निधन हो गया है। उनका कोरोना संक्रमण के चलते कानपुर में इलाज चल रहा था। कानपुर में इलाज चल रहा था। निधन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरा दुख जताया और परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।


कानपुर के गांवों में कोरोना

जिले के गांवों में कोरोना तेजी से फैल रहा है। कानपुर की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत में बीते 15 दिनों में लगभग 30 लोगों की जान चली गई। हालत यह है कि अब हर रोज 5 से 6 लोगों की मौत हो रही है। कानपुर के इस सबसे बड़े गांव में हर परिवार में लोग बीमार हैं। टेस्टिंग नहीं हो पा रही, लेकिन सभी में लक्षण कोरोना के हैं ।


कोविड-19 का कहर : मैं बचूंगा या नहीं घर गिरवी न रखना पापा, और उसने दुनिया को अलविदा कह दिया

कोविड-19 का कहर : मैं बचूंगा या नहीं घर गिरवी न रखना पापा, और उसने दुनिया को अलविदा कह दिया

लखनऊ: कोविड-19 का कहर तो है ही पर तमाम कोविड-19 संक्रमित मरीज आर्थिक परेशानी की वजह से भी कोविड-19 वायरस का मुकाबला नहीं कर पा रहे हैं. इस कोविड-19 काल में प्रदेश में ऐसे कई केस, कई कहानियों में परिवर्तित हो गए हैं. यदि पढ़ेंगे तो आंखें भर आएंगी. और तब समझ पाएंगे कोविड-19 के हमले का सबसे अधिक प्रभाव किस पर हो रहा है. यह शब्द वो युवा बोलकर चला गया, शब्द हैं पापा! मुझे भगवान भरोसे छोड़ दो, घर गिरवी न रखना. शुक्रवार को कोविड-19 से इस 23 वर्ष के बेटे का मृत्यु हो गया.

बिना पैसों नहीं होगा उपचार :- उन्नाव निवासी रामशंकर के लिए 17 अप्रैल का दिन अच्छा नहीं था. उस दिन के बाद तो घर में सब कुछ समाप्त हो गया. पत्नी जलज और बेटे सुशील (23 वर्ष) कोविड-19 संक्रमित हो गए. पत्नी तो ठीक होने लगी पर जवान बेटा तो बुरे दशा में आा गया. उन्नाव से कानपुर गए कहीं बेड नहीं मिला. तीन दिन बाद बेटे को लेकर लखनऊ आए. यहां एक निजी हॉस्पिटल में बेड मिल गया. डाक्टरों ने पहले अस्सी हजार रुपए जमा कराए. और रोजाना 25 हजार का खर्च बताया. रामशंकर क्या करते जो जमा पूंजी थी वह पहले ही खर्च कर चुके थे. पैसों की और आवश्यकता पड़ी तो बेटी की विवाह के जेवर बेच दिए. रामशंकर को 3.30 लाख रुपए मिले.

आपकी आखें भर आएंगी :- छोटी सी परचून की दुकान से रामशंकर के घर का खर्चा चलता था. उपचार के लिए और पैसे चाहिए थे. अंत में रामशंकर ने अपना पुश्तैनी घर गिरवी रखने का निर्णय किया. हॉस्पिटल में भर्ती बेटे सुशील को जब यह पता चला तो हॉस्पिटल के एक वार्ड ब्वाय के मोबाइल से पिता से बात की. उसने पिता से जो बोला उसे पढ़कर आपकी आखें भर आएंगी.

मुझे भगवान भरोसे छोड़ दो :- चार मई की शाम को सुशील ने पिता से कहाकि, पापा! मुझे भगवान भरोसे छोड़ दो, घर गिरवी न रखना,और कोविड-19 ने बेटे की छीनीं सांसें मेरे उपचार के लिए मम्मी के जेवर बिक गए. आपके खाते में जो पैसे थे वे भी समाप्त हो गए. मुझे पता चला है कि आप उन्नाव बाई पास वाला घर आप गिरवी रखने जा रहे हैं. मेरा उपचार कराने में सब बरबाद हो जाएगा. पम्मी (बहन) की विवाह कैसे होगी. मैं बचूंगा या नहीं, यह पक्का नहीं है. मुझे भगवान भरोसे छोड़ दो.’ तीन दिन बाद सुशील ने इस रहती दुनिया को अलविदा कह दिया.

दाह संस्कार कर दिया :- शुक्रवार प्रातः काल सुशील के मृत्यु की समाचार सुन पिता बेहोश होकर गिर पड़े. हॉस्पिटल प्रशासन की तरफ से उपलब्ध कराई गई एम्बुलेंस से बेटे का मृत शरीर आलमबाग शमशान घाट पहुंचा. जहां उसका दाह संस्कार हुआ.


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