अपने पार्टनर से बेहद प्यार करती हैं ऐसे होंठ वाली स्त्रिया

अपने पार्टनर से बेहद प्यार करती हैं ऐसे होंठ वाली स्त्रिया

हर व्‍यक्‍ति का स्‍वभाव अलग होता है और इसकी पहचान आप उसके बाहरी व्‍यक्‍तित्‍व से कर सकते हैं। कोई हाथों के हाव-भाव से तो कोई चेहरे की आकृति से सामने वाले व्‍यक्‍ति का नेचर जान लेता है। लड़कियों के स्‍वभाव के बारे में भी जानने के लिए सामुद्रिक शास्‍त्र में कई तरीके बताए गए हैं। आज हम आपको बताएंगें कि लड़कियों के होंठों की शेप और रंग से आप उनके स्‍वभाव के बारे में कैसे जान सकते हैं.....

अगर किसी लड़की के होंठ ज्‍यादा आकर्षक लगते हैं तो ऐसी लड़कियां मेहनती, बुद्धिमान, ईानदार, दयालु और दूसरों का सम्‍मान करने वाली होती हैं।

पतले होंठ वाली लड़कियां अपने परिवार और जीवनसाथी से बहुत प्‍यार करती हैं। इनका स्‍वभाव अत्‍यंत महत्‍वाकांक्षी होता है। ये पारिवारिक तो नहीं होती लेकिन फिर भी अपने पार्टनर को मुश्किल में कभी अकेला नहीं छोड़ती हैं।

मोटे होंठों की शेप वाली लड़कियां थोड़ी झगड़ालू और तुनकमिजाज वाली होती हैं। इनके ऐसे ही व्‍यवहार के कारण इनकी कभी अपने पार्टनर से नहीं बनती है। इन्‍हें दूसरों के साथ घुलने-मिलने में भी समय लगता है।

जिन लड़कियों के होंठ काले होते हैं वो पढ़ाई में तेज और होशियार होती हैं। ये बातूनी होती हैं और अपने पति की खूब सेवा करती हैं।

गुलाबी होंठ वाली लड़कियां अपने स्‍वभाव से हर किसी का दिल जीत लेती हैं। ये उदार, बुद्धिमान और ईमानदार होती हैं। इनमें थोड़ा अहंकार भी होता है।


हर स्त्री को करनी चाहिए इतनी बार शादी, तभी पूरा होता है उनका जीवन

हर स्त्री को करनी चाहिए इतनी बार शादी, तभी पूरा होता है उनका जीवन

आप की शादी से पहले से दुल्हन का स्वामित्व 3 लोगों को सौंपा जाता है। विवाह के समय जब पंडित आपको विवाह का मंत्र पढ़ा रहा होता है तब आप मंत्र का मतलब नहीं समझते हैं। असल में वैदिक परंपरा में नियम है कि स्त्री अपनी इच्छा से चार लोगों को पति बना सकती है। इस नियम को बनाए रखते हुए स्त्री को पतिव्रत की मर्यादा में रखने के लिए विवाह के समय ही स्त्री का संकेतिक विवाह तीन देवताओं से करा दिया जाता है।

4 पतियों से होती है स्त्री की शादी:

इसमें सबसे पहले किसी भी दूल्हन (कन्या) का पहला अधिकार चन्द्रमा को सौंपा जाता है, इसके बाद विश्वावसु नाम के गंधर्व को और तीसरे नंबर पर अग्नि को और अंत में उसके पति को सौंपा जाता है। 

इसी ही वैदिक परंपरा के कारण ही द्रौपदी एक से अधिक पतियों के साथ रही थी। और फिर अंत में आपको दुल्हन का हाथ सोप जाता है।