रुद्राक्ष पहनने से पहले ऐसे करें असली और नकली रुद्राक्ष की पहचान

रुद्राक्ष पहनने से पहले ऐसे करें असली और नकली रुद्राक्ष की पहचान

रुद्राक्ष की माला पहनने से इंसान बहुत सारी बीमारियों से दूर रहता हैं लेकिन इस माला को पहनने का तरीका अन्य मालाओं के पहनने से अलग होता हैं क्योंकि यह बात ज्योतिष शास्त्र मे बताया गया हैं। हमेशा असली रुद्राक्ष की माला ही पहननी चाहिए तभी लाभ मिलता है।  ऐसे जाने रुद्राक्ष असली है या नकली...

# असली रुद्राक्ष के केंद्र में नेचुरली छेद होते हैं और नकली रुद्राक्ष के केंद्र में हाथों से छेद किया जाता हैं और उसे गोल आकार दिया जाता हैं।

# आप जब भी रुद्राक्ष अपने घर ले आए तो उसे सबसे पहले सरसों के तेल में डुबो कर जरूर देख क्योंकि असली रुद्राक्ष कलर नहीं छोडता हैं जबकि नकली रुद्राक्ष कलर छोड़ देता है।

# रुद्राक्ष को पानी में भी डालकर देख सकते है क्योंकि असली रुद्राक्ष पानी में डूब में जाता हैं लेकिन नकली रुद्राक्ष पानी में तैरता हैं।

# यदि आप असली रुद्राक्ष को किसी नुकीली चीज से कुरेदेंगे तो उसमें से रेशे निकलते हैं लेकिन वहीं दूसरी ओर नकली रुद्राक्ष को यदि आप कुरदते हैं तो उसमें से रेशे नहीं निकलते हैं।


हर स्त्री को करनी चाहिए इतनी बार शादी, तभी पूरा होता है उनका जीवन

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आप की शादी से पहले से दुल्हन का स्वामित्व 3 लोगों को सौंपा जाता है। विवाह के समय जब पंडित आपको विवाह का मंत्र पढ़ा रहा होता है तब आप मंत्र का मतलब नहीं समझते हैं। असल में वैदिक परंपरा में नियम है कि स्त्री अपनी इच्छा से चार लोगों को पति बना सकती है। इस नियम को बनाए रखते हुए स्त्री को पतिव्रत की मर्यादा में रखने के लिए विवाह के समय ही स्त्री का संकेतिक विवाह तीन देवताओं से करा दिया जाता है।

4 पतियों से होती है स्त्री की शादी:

इसमें सबसे पहले किसी भी दूल्हन (कन्या) का पहला अधिकार चन्द्रमा को सौंपा जाता है, इसके बाद विश्वावसु नाम के गंधर्व को और तीसरे नंबर पर अग्नि को और अंत में उसके पति को सौंपा जाता है। 

इसी ही वैदिक परंपरा के कारण ही द्रौपदी एक से अधिक पतियों के साथ रही थी। और फिर अंत में आपको दुल्हन का हाथ सोप जाता है।