हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार जाने स्त्रियों के खुले बालों का मतलब...

हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार जाने स्त्रियों के खुले बालों का मतलब...

हमारे धर्म शास्त्रों में स्त्रियों के बालों के विषय में कहा गया है। शास्त्र में स्त्रियों को अपने बालों को हमेशा बांधकर रखने की सलाह दी गई है। आइये जानते है कि स्त्रियों को अपने बालों को हमेशा बांधकर ही क्यों रखना चाहिए.....

हिन्दू धर्म शास्त्र में कहा गया है कि स्त्रियों को हमेशा अपने बाल बांधकर रखना चाहिये। क्योंकि पुरातन काल में बालों को खुला रखने का मतलब होता है, कि वह स्त्री किसी का शोक मना रही है।

रामायण काल में भी, जब सीता माता का विवाह भगवान राम से हुआ था, तब उनकी माता ने माता सीता के बाल बांधते हुए कहा कि अपने बालों को कभी खुला नहीं छोड़ना क्योंकि बंधे हुए बाल रिश्तों को बांधकर रखते है।

स्त्रियाँ अपने बाल खुले तभी रखती है जब वह एकांत में अपने पति के साथ होती है। शास्त्र में कहा गया है कि स्त्रियों के खुले बाल नकारात्मक ऊर्जा का स्त्रोत होते है, जो उनके घर में क्लेश उत्पन्न करते है।

 इस विषय में ऐसा भी माना जाता है कि यदि स्त्री अपने बालों को रात्री के समय खोलकर सोती है, तो उसके ऊपर नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव अधिक होता है।


हर स्त्री को करनी चाहिए इतनी बार शादी, तभी पूरा होता है उनका जीवन

हर स्त्री को करनी चाहिए इतनी बार शादी, तभी पूरा होता है उनका जीवन

आप की शादी से पहले से दुल्हन का स्वामित्व 3 लोगों को सौंपा जाता है। विवाह के समय जब पंडित आपको विवाह का मंत्र पढ़ा रहा होता है तब आप मंत्र का मतलब नहीं समझते हैं। असल में वैदिक परंपरा में नियम है कि स्त्री अपनी इच्छा से चार लोगों को पति बना सकती है। इस नियम को बनाए रखते हुए स्त्री को पतिव्रत की मर्यादा में रखने के लिए विवाह के समय ही स्त्री का संकेतिक विवाह तीन देवताओं से करा दिया जाता है।

4 पतियों से होती है स्त्री की शादी:

इसमें सबसे पहले किसी भी दूल्हन (कन्या) का पहला अधिकार चन्द्रमा को सौंपा जाता है, इसके बाद विश्वावसु नाम के गंधर्व को और तीसरे नंबर पर अग्नि को और अंत में उसके पति को सौंपा जाता है। 

इसी ही वैदिक परंपरा के कारण ही द्रौपदी एक से अधिक पतियों के साथ रही थी। और फिर अंत में आपको दुल्हन का हाथ सोप जाता है।