जाने क्या है रक्षाबंधन का इतिहास कब जाएगी मनाई व क्या है रक्षासूत्र बांधने का शुभ मूहर्त

रक्षाबंधन एक ऐसा त्योहार है, जिसका इंतजार हर भाई-बहन को बहुत ही बेसब्री से होता है. रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन का पर्व होता है. इस खास दिन पर बहु भाई के कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर उसके लंबी आयु की कामना करती है. व भाई बहन को वचन देता है कि वह उसकी ताउम्र रक्षा करेगा. इस पर्व को अधिकतर धर्म के लोग सारे हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं. हम आपको बताने जा रहे हैं कि इस बार राखी कब मनाई जाएगी व रक्षासूत्र बांधने का शुभ मूहर्त क्या है.

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राखी का त्योहार इस बार 15 अगस्त, दिन गुरुवार को मनाया जाएगा. सावन के महीने में बहुत ही लंबे समय के बाद 15 अगस्त के दिन चंद्र प्रधान श्रवण नक्षत्र में स्वतंत्रता दिवस वरक्षा बंधन का संयोग बना है. रक्षा बंधन पर इस बार राखी बांधने का बहुत ज्यादा लंबा मूहर्त है. प्रातः काल 5 बजकर 49 मिनट से लेकर शाम के 6 बजकर एक मिनट तक का शुभ मूहर्त है.

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रक्षा बंधन पांचांग रक्षा बंधन 2019: 15 अगस्त रक्षा बंधन अनुष्ठान का समय- 05:53 से 17:58 अपराह्न मुहूर्त- 13:43 से 16:20 पूर्णिमा तिथि शुरुआत – 15:45 (14 अगस्त) पूर्णिमा तिथि समाप्त- 17:58 (15 अगस्त) भद्रा समाप्त: सूर्योदय से पहले

रक्षा बंधन का इतिहास एक बार भगवान कृष्ण ने राजा शिशुपाल को मारा था. इस दौरान कृष्ण के बाएं हाथ की ऊंगली से खून बहने लगे. इसे देखकर द्रौपदी बहुत ही दुखी हो गईं वउन्होंने अपनी साड़ी का टुकड़ा फाड़कर कृष्ण की ऊंगली में बांध दिया , जिससे खूब बहना बंद हो गया. तभी से कृष्ण ने द्रौपदी को अपनी बहन स्वीकार कर लिया था.

सालों बाद जब पांडव द्रौपदी को जुए में पराजय गए थे व भरी सभा में उनका चीरहरण हो रहा था तब भगवान कृष्ण ने द्रौपदी की लाज बचाई थी.. तभी से रक्षाबंधन की आरंभ हो गई.