विराट अपनी कप्तानी में टीमइंडिया को नही जीता पाएँगे वर्ल्ड कप, क्रिकेट इतिहास से सामने आई यह कड़वी सच्चाई

विराट अपनी कप्तानी में टीमइंडिया को नही जीता पाएँगे वर्ल्ड कप, क्रिकेट इतिहास से सामने आई यह कड़वी सच्चाई

भारतीय टीम वर्ल्ड कप 2019 में पहुंची थी तो अंक तालिका में उसके 15 अंक थे। यानी टीम ने शीर्ष स्‍थान पर रहकर वर्ल्ड कप में स्थान बनाई थी। वहीं न्यूजीलैंड की टीम अपने पिछले तीन मैच लगातार हारी थी व किसी तरह सेमीफाइनल में स्थान बना पाई थी। ऐसे में इस बात की पूरी उम्मीद थी कि विराट की कप्तानी में टीम इंडिया न केवल फाइनल में पहुंचेगी बल्कि खिताब भी जीतेगी।

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मगर ऐसा नहीं हो सका। हर सफर का एक अंत होता है व भारतीय टीम के सफर का अंत भी वर्ल्ड कप 2019 में सेमीफाइनल की पराजय के साथ हो गया। व इसके साथ ही भारतीय कैप्टन विराट कोहली का वर्ल्ड कप जीतने का सपना भी चकनाचूर हो गया। यूं तो बतौर खिलाड़ी विराट कोहली 2011 का वर्ल्ड कप अपने हाथ में उठा चुके हैं। मगर कैप्टन के तौर पर ये उपलब्धि हासिल करने का सुख निश्चित रूप से कुछ अलग ही होता है।

कैप्टन के तौर पर विराट कोहली पहली बार वर्ल्ड कप खेल रहे थे। अब जबकि वह खिताब जीतने में नाकामयाब रहे तो इस बात की उम्मीद कम ही है कि विराट अपनी कप्तानी में टीमइंडिया को वर्ल्ड कप जिता पाएंगे। भारतीय क्रिकेट का इतिहास देखें तो यही कड़वी सच्चाई सामने आती है।

दरअसल, टीम इंडिया ने जो दो वनडे व एक टी-20 वर्ल्ड कप जीता है, वो तब जीता है जब कोई खिलाड़ी पहली बार अपनी कप्तानी में वर्ल्ड कप में उतरा है। चाहे 1983 में कपिल देव हों, 2007 के टी-20 वर्ल्ड कप में महेंद्र सिंह धोनी हों या फिर 2011 में एक बार फिर महेंद्र सिंह धोनी। ये सभी पहली बार इन वर्ल्ड कप में टीम की कप्तानी कर रहे थे।

1983 वर्ल्ड कप : लॉर्ड्स की बालकनी व कपिल के हाथ में ट्रॉफी

1975 व 1979 में भारतीय टीम की कमान वेंकटराघवन के हाथ में थी। इन दोनों वर्ल्ड कप में भारतीय टीम नॉकआउट में स्थान नहीं बना सकी। टीम को ग्रुप स्टेज से ही बाहर होना पड़ा। इसके बाद 1983 में भारतीय टीम कपिल देव की कप्तानी में वर्ल्ड कप खेलने उतरी। इस ऑलराउंडर ने न केवल गेंद व बल्ले से सहयोग दिया बल्कि वेस्टइंडीज के विरूद्धफाइनल में विवियन रिचर्ड्स का अद्भुत कैच लेकर फील्डिंग से भी अहम सहयोग दिया। 25 जून 1983 को खेले गए इस फाइनल में टीम इंडिया ने 43 रन से जीत दर्ज की व हिंदुस्तानपहली बार चैंपियन बना। कपिल देव ने वर्ल्ड कप में पहली बार कप्तानी करते हुए टीम को खिताब दिलवाया। क्रिकेट के मक्का लॉर्ड्स में चमचमाती ट्रॉफी हाथ में पकड़े कपिल देव की तस्वीर भला कौन क्रिकेटप्रेमी भूल सकता है।

2007 : लंबे बालों वाला युवा धोनी व इंडिया पहला टी-20 वर्ल्ड चैंपियन

2011 : आमची मुंबई, 28 वर्ष बाद फिर हाथ आया वनडे वर्ल्ड कप

वर्ष 2011 का वर्ल्ड कप हिंदुस्तान में खेला गया। महेंद्र सिंह धोनी का बतौर कैप्टन यह पहला वर्ल्ड कप था। घरेलू जमीन पर होने व टीम के शानदार लय में होने के चलते भारतीय टीम को खिताब जीतने का प्रबल दावेदार माना जा रहा था। भारतीय टीम ने सेमीफाइनल में पाक को पीटकर फाइनल में स्थान बनाई, जहां उसका सामना श्रीलंका से हुआ। यह मैच 2 अप्रैल 2011 को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में हुआ। श्रीलंका ने महेला जयवर्धने के शानदार शतक की बदौलत 6 विकेट पर 274 रन बनाए। जवाब में भारतीय टीम ने गौतम गंभीर के 97, धोनी के नाबाद 91 की बदौलत 49वें ओवर की दूसरी गेंद पर चार विकेट खोकर यह लक्ष्य हासिल कर लिया। इसी के साथ ही नुवान कुलासेकरा की गेंद पर लगाया गया धोनी का विजयी छक्का भी क्रिकेट की किताबों में अमर हो गया।

अगला वर्ल्ड कप 2023 में हिंदुस्तान में खेला जाएगा। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि तब टीम इंडिया की कमान विराट कोहली के ही हाथ में रहेगी या रोहित शर्मा या फिर कोई व हिंदुस्तानका कैप्टन होगा। व अगर कमान विराट के ही हाथ रही तो क्या वो इतिहास को बदल पाएंगे। इंतजार कीजिए, अभी चार वर्ष का वक्त बाकी है