फेयरनेस व वाइटनिंग क्रीम का लंबे समय तक प्रयोग करने से कुछ ऐसे हो जाता है स्किन का हाल

 फेयरनेस व वाइटनिंग क्रीम का लंबे समय तक प्रयोग करने से कुछ ऐसे हो जाता है स्किन का हाल

लंबे समय तक स्कीन को गोरा करने वाली क्रीम का प्रयोग करने से स्कीन पतली हो जाती है व चहरे पर अनचाहे बाल पहले से ज्यादा उगने लगते हैं. नेचुरल चीजों का प्रयोग करकेस्कीन को साफ व सुंदर बनाया जा सकता है.

Image result for गोरे होने की चाह में स्कीन

स्किन को ऐसे करती प्रभावित -
1. स्टेरॉयड और हाइट्रोक्विनॉन स्कीन को पहुंचाते नुकसान
हर आदमी की स्कीन अलग होती है जैसे तैलीय, रूखी व शुष्क. ऐसे में बिना चिकित्सक की सलाह से क्रीम का इस्तेमाल स्कीन को नुकसान पहुंचाता है. फेयरनेस, ब्यूटी और वाइटनिंग क्रीम के निर्माण में अक्सर स्टेरॉयड, ब्लीचिंग एजेंट्स, हाइड्रोक्विनॉन और मर्करी जैसे केमिकल प्रयोग होते हैं जिसे लगाने के बाद स्कीन का रंग साफ होने से आदमी गोरा दिखता है.हालांकि स्टेरॉयड चमड़ी को पतला करने और अनचाहे बालों के उगने व हाड्रोक्विनॉन स्कीन में जमकर दाग-धब्बे को बढ़ाते हैं.

2. स्कीन पर धब्बे और निशान छोड़ती क्रीम -
विभिन्न तरह की फेयरनेस व वाइटनिंग क्रीम का लंबे समय तक प्रयोग स्कीन को पतला करने के साथ बदरंग कर देता है. इस कारण स्कीन पर धब्बे, निशान हो जाते हैं व स्कीन लाल हो जाती है जिससे खुजली व फोड़े-फुंसी की परेशानी होती है. इसके अतिरिक्त स्कीन पर अनचाहे बालों के उगने की समस्या आम हो जाती है.

त्वचा के अनुसार हो ठीक क्रीम का चयन -
त्वचा के ऑयली या रूखी होने के आधार पर विशेषज्ञ ठीक क्रीम लगाने की सलाह देते हैं. प्रोफेशन या स्कीन की आवश्यकता फेयरनेस क्रीम लगाने की है तो लगा सकते हैं. लेकिन दुष्प्रभाव होने पर इसे एकदम से बंद न करके धीरे-धीरे करें. बाजार में बिना स्टेरॉयड और हाइड्रोक्विनॉन केमिकल वाली क्रीम उपलब्ध हैं. इनमें उपस्थित अन्य केमिकल जैसे कोजिक एसिड, आरबीटिन, बीटा वाइट आदि से नुकसान कम होता है.

प्राकृतिक ढंग हैं बेहतर-
एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन-सी और ई से भरपूर चीजें जैसे हरी पत्तेदार सब्जियां, खीरा, बादाम, पपीता, संतरा आदि खा सकते हैं. ये स्कीन के छिद्रों को खोलने के अतिरिक्त विषैले तत्त्वों को बाहर निकालते हैं.

सावधानी: ये 4 बातें रखें ध्यान-
यदि क्रीम का इस्तेमाल करना चाह रही हैं तो डर्मेटोलॉजिस्ट की सलाह लें. वे कठिनाई की वजह जैसे हार्मोनल बदलाव, दवा का दुष्प्रभाव, एलर्जी आदि को जानकर क्रीम, मॉइश्चराइजर या सनस्क्रीन लोशन लगाने की सलाह देते हैं.

किसी भी क्रीम को आरंभ में कम मात्रा में हथेली के पीछे स्कीन पर 5-10 मिनट के लिए लगाएं. इससे यदि स्कीन के लाल होने, खुजली की समस्या हो तो समझें कि क्रीम ठीक नहीं है.अगर कठिनाई न हो तो धीरे-धीरे इस्तेमाल बढ़ाएं.

सोने से पहले चेहरे को अच्छे से धोकर सोएं ताकि रोमछिद्र बंद न हों.

सूरज की पराबैंगनी किरणों से बचाव के लिए सनस्क्रीन लोशन का इस्तेमाल करें. हो सके तो इसके बजाय चेहरे को ढककर ही धूप में बाहर निकलें.