केन्द्र सरकार फसल बीमा का दायरा बढ़ाने के लिए जल्द ही डाकघरों में प्रारम्भ करेगी ये सुविधा

केन्द्र सरकार फसल बीमा का दायरा बढ़ाने के लिए जल्द ही डाकघरों में प्रारम्भ करेगी ये सुविधा

केन्द्र सरकार फसल बीमा का दायरा बढ़ाने के लिए जल्द ही डाकघरों में भी सुविधा प्रारम्भ करेगी. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने योजना को 100 दिनों के भीतर प्रारम्भकरने का लक्ष्य रखा है. उसका बोलना है कि डाकघरों में यह सुविधा उपलब्ध होने से फायदा लेने वाले किसानों की संख्या दोगुनी हो जाएगी.

दरअसल, प्राकृतिक आपदा या अनहोनी की स्थिति में बेकार हुई फसल के नुकसान से किसानों को बचाने के लिए सरकार ने पीएम फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) प्रारम्भ की थी. अभी बैंक, सीएससी व औनलाइन जैसे माध्यमों से यह बीमा किसानों को दिया जा रहा है, लेकिन इसकी पहुंच चौथाई किसानों तक ही हो सकी है.

कृषि मंत्रालय से जुड़े एक वरिष्ठ ऑफिसर ने बताया कि डाकघरों के जरिये फसली बीमा पालिसी को बेचने से लाभ पाने वाले किसानों की संख्या आधी से ज्यादा पहुंच सकती है. उन्होंने बोला कि इस योजना का खाका साल 2017 में ही खींचा गया था, लेकिन तकनीकी अड़चनों की वजह से इसे लागू नहीं किया जा सका. नए कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने तय किया है कि जल्द ही फसल बीमा डाकघरों के जरिये मिलेगा.

90 प्रतिशत से ज्यादा डाकघर ग्रामीण इलाकों में

अभी फसल बीमा योजना की पालिसी बैंक शाखाओं, बीमा कंपनी के कार्यालय, सहकारी बैंक, कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) व औनलाइन पोर्टल के जरिये बेची जा रही है. बैंक आमतौर पर फसली बीमा की पॉलिसी उन्हीं किसानों की बेचते हैं, जिन्होंने उनके यहां से फसली ऋण लिया है. ऐसे में अधिकांश किसान वंचित रह जाते हैं.

बीमा कंपनी के ऑफिस बेहद सीमित हैं, जबकि सीएससी के अधिकांश ऑफिस शहरी या अर्द्धशहरी इलाकों में हैं. औनलाइन पोर्टल तक भी किसानों की पहुंच नहीं है. लिहाजा उनके लिए डाकघर बेहतर साधन होगा, क्योंकि देश के करीब 1.5 लाख डाकघर में से 93 प्रतिशत यानी 1.40 लाख ग्रामीण इलाकों में हैं.

लोन नहीं लेने वाले किसानों को फायदा

इस समय नियम है कि कहीं से फसली ऋण लेने वालों को जरूरी रूप से बीमा कराना पड़ता है. आमतौर पर ऋण देने वाले बैंक या सहकारी बैंक ही उसका बीमा कर देते हैं, लेकिन जो किसान बैंक से कर्ज़ लिए बिना खेती करते हैं, उन्हें फसली बीमा पाने के लिए बहुत ज्यादा जहमत उठानी पड़ती है. कृषि मंत्रालय का बोलना है कि अभी कर्ज़ नहीं लेने वाले किसानों में महज 20 प्रतिशत ही बीमा करा पाते हैं. हमारा लक्ष्य इस संख्या को 50 प्रतिशत पहुंचाना है.

रबी व खरीफ का अलग प्रीमियम

सरकार ने 13 जनवरी 2016 को पीएमएफबीवाई लागू करते समय किसानों को छोटी प्रीमियम पर फसल बीमा देने का लक्ष्य रखा था. हालांकि, खरीफ व रबी की फसलों की प्रीमियम दर अलग रखी. खरीफ की फसल के लिए किसानों को कुल प्रीमियम का दो प्रतिशत व रबी की फसल के लिए डेढ़ प्रतिशत देना होता है. शेष रकम का भुगतान सरकार करती है.