भारत के इस गांव की सच्चाई लोगों को कर रही है हैरान जहां से रातों-रात गायब हो गए 5000 लोग

भारत के इस गांव की सच्चाई लोगों को कर रही है हैरान जहां से रातों-रात गायब हो गए 5000 लोग

दुनिया के हर कोने में कुछ न कुछ रहस्य और रोमांच से जुड़ी कहानियां होती हैं, जो लोगों को हैरान कर देती हैं। इनमें से कुछ बेहद ही डरावनी भी होती हैं। आज हम आपको भारत के एक ऐसे रहस्यमयी गांव के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां से रातों-रात हजारों लोग गायब हो गए थे।

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यह गांव राजस्थान के जैसलमेर से 18 किलोमीटर दूर है, जिसे कुलधरा गांव के नाम से जाना जाता है। करीब 200 साल पहले कुलधरा और इसके आसपास के गांव पालीवाल ब्राह्मणों से आबाद हुआ करते थे, लेकिन अब यहां मकानों के नाम पर सिर्फ खंडहर हैं और इंसान तो हैं ही नहीं।

इस गांव के वीरान होने के पीछे एक रहस्यमयी कहानी है। कहा जाता है कि यहां के रियासत के दीवान सालेम सिंह की नजर गांव के ही एक पुजारी की बेटी पर पड़ गई थी। वह उसे पाने के लिए बेचैन था। उसने गांव वालों से कहा कि वो उस लड़की से उसकी शादी करा दें और अगर उन्होंने ऐसा नहीं किया तो वो गांव पर आक्रमण करके उसे तहस-नहस कर देगा।

सालेम सिंह की धमकी के बाद पालीवाल ब्राह्मणों के 5000 से ज्यादा परिवारों ने रियासत छोड़ने का फैसला किया और रातों-रात गांव खाली करके चले गए। अब वो कहां गए-कैसे गए, यह आज तक किसी को पता नहीं चला।

कहा जाता है कि पालीवाल ब्राह्मणों ने गांव को छोड़ते समय यह श्राप भी दे दिया कि यह जगह कभी आबाद नहीं होगी। तब से यह गांव वीरान ही पड़ा है। हालांकि यहां कई बार लोगों ने बसने की कोशिश भी की, लेकिन वो नाकाम रहे।

गांव खाली होने के पीछे एक कहानी और प्रचलित है। माना जाता है कि सालेम सिंह ने ब्राह्मणों के करों और लगान में इतनी बढ़ोतरी कर दी कि उनका खेती करना या व्यापार करना मुश्किल हो गया और इसीलिए वो गांव खाली करके चले गए।

लोगों का मानना है कि अब यह गांव रूहानी ताकतों के कब्जे में है, जो यहां घूमने-फिरने के लिहाज से आने वाले लोगों को अपनी मौजूदगी का अहसास कराती हैं। यहीं वजह है कि यहां रात तो क्या, दिन में भी लोग आने से डरते हैं।

कुलधरा के बारे में यह भी कहा जाता है कि यहां पालीवाल ब्राह्मणों द्वारा छिपा कर रखा गया बेशकीमती खजाना भी है, जिसे वो जाते समय छोड़ कर चले गए थे। खजाने की खोज कई लोग यहां आए थे और जगह-जगह खुदाई की थी, लेकिन उनके हाथ कुछ नहीं लगा था। हालांकि अब यह गांव पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है। दिन में यहां पर्यटक घूमने के लिए आते रहते हैं।