दुनिया कप में दो सबसे करीबी मुकाबलों का रिकॉर्ड इन्हीं दोनों टीमों के नाम, हर बॉल पर बढ़ेगी क्रिकेट फैंस की धड़कनें

दुनिया कप में दो सबसे करीबी मुकाबलों का रिकॉर्ड इन्हीं दोनों टीमों के नाम,  हर बॉल पर बढ़ेगी क्रिकेट फैंस की धड़कनें

क्रिकेट में जब भी कड़ी प्रतिद्वंद्विता की बात आती है तो भारत-पाकिस्तान या ऑस्ट्रेलिया-इंग्लैंड मैचों का जिक्र होता है। लेकिन अगर आम मुकाबले नहीं, दुनिया कप (Cricket World Cup) के मैच हैं तो इन पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी टीमों को भूल जाइए। में सबसे रोमांचक मैच हिंदुस्तान व ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले गए हैं। दुनिया कप में दो सबसे करीबी मुकाबलों का रिकॉर्ड इन्हीं दोनों टीमों के नाम है। हम यहां इन्हीं दोनों मैचों को याद कर रहे हैं। इसलिए तय मानिए कि जब आज (रविवार/9 जून) ये दोनों टीमें आमने-सामने होंगी, तो मैच रोमांचक होने की गारंटी भी है।

1987: जब एक रन नहीं बना सकी टीम इंडिया
वर्ष 1987 का दुनिया कप हिंदुस्तान में खेला गया। हिंदुस्तान का पहला ही मैच चेन्नई में ऑस्ट्रेलिया से हुआ। ऑस्ट्रेलिया ने इस मैच में छह विकेट पर 270 रन बनाए। ऑस्ट्रेलियाई ओपनर ज्योफ मार्श ने 110 रन की पारी खेली। हिंदुस्तान को 50 ओवर में 271 रन का लक्ष्य मिला। हिंदुस्तान ने जवाब में अच्छी बल्लेबाजी की। नवजोत सिंह सिद्धू ने 73 व क्रिस श्रीकांत ने 70 रन बनाए। हिंदुस्तान को जीत के लिए अंतिम दो गेंदों पर दो रन बनाने थे। स्ट्राइक पर मनिंदर सिंह थे। गेंद स्टीव वॉ के हाथों में थी। वॉ ने 50वें ओवर की पांचवीं ही गेंद पर मनिंदर को बोल्ड कर दिया व हिंदुस्तान एक रन से पराजय गया। ऑस्ट्रेलिया के क्रेग मैक्डरमॉट ने चार व स्टीव ने दो विकेट लिए।


1992: फिर एक रन से दूर रह गई टीम इंडिया

वर्ष 1992 में भी भारत-ऑस्ट्रेलिया का सामना हुआ। इस बार ऑस्ट्रेलिया ने 50 ओवर में नौ विकेट पर 237 रन बनाए। डीन जोंस ने 90 रन की पारी खेली। ब्रेक के दौरान बारिश आ गई। इसके बाद हिंदुस्तान को 47 ओवर में 234 रन का संशोधित लक्ष्य मिला। यानी, हिंदुस्तान की पारी के तीन ओवर कम कर लिए गए व टारगेट में से भी सिर्फ तीन रन कम हुए।बहरहाल, हिंदुस्तान ने मोहम्मद अजहरुद्दीन के 93 व संजय मांजरेकर के 47 रन की मदद से अच्छा जवाब दिया। आखिरी ओवर में जीत के लिए 13 रन चाहिए थे व क्रीज पर श्रीनाथ व किरन मोरे थे। मोरे ने पहली दो गेंदों पर चौके लगाए। लेकिन इसके बावजूद हिंदुस्तान लक्ष्य से एक रन दूर रह गया।

मनोज प्रभाकर दोनों बार रनआउट
1987 व 1992 दोनों वर्ल्ड कप में हिंदुस्तान के आधी टीम तो एक जैसी ही थी। जैसे कि मनोज प्रभाकर दोनों मैचों में थे। प्रभाकर के साथ अजब संयोग हुआ। यह खिलाड़ी दोनों ही मैचों में आखिरी ओवर में रन आउट हुआ। 1987 में प्रभाकर ने पांच रन बनाए थे व 1992 में खाता भी नहीं खोल सके थे।

1 रन के फासले पर सिर्फ दो मैच समाप्त हुए
आंकड़ों में दिलचस्पी रखने वाले क्रिकेटप्रेमियों को बता दें कि वर्ल्ड कप के 44 वर्ष के इतिहास में सिर्फ दो मैच ऐसे खेले गए हैं, जिनमें दोनों टीमों के बीच सिर्फ एक रन का फासला रहा।यानी, कोई टीम सिर्फ एक रन से जीती। ये दोनों वही मैच हैं, जो ऊपर बताए गए हैं। इसके अतिरिक्त कोई भी भी टीम वर्ल्ड कप में एक रन से मैच नहीं जीती या हारी हैं।

लेकिन ऑस्ट्रेलिया का पलड़ा भारी
वर्ल्ड कप में हिंदुस्तान व ऑस्ट्रेलिया के बीच सबसे करीबी दोनों मैच भले ही खेले गए हों, लेकिन ओवरऑल कंगारुओं का पलड़ा भारी है। इन दोनों टीमों के बीच कुल 11 मैच हुए हैं।इनमें से आठ में ऑस्ट्रेलिया ने जीत पंजीकृत की है। तीन मुकाबले हिंदुस्तान के नाम रहे हैं। उसने ऑस्ट्रेलिया को 1983, 1987 व 2011 में एक-एक बार मात दी है।