विपक्षी दलों के सदस्यों के हंगामे के कारण राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित, ये मांग रहे थे कर

विपक्षी दलों के सदस्यों के हंगामे के कारण राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित, ये मांग रहे थे कर

कर्नाटक के राजनीतिक घटनाक्रम सहित विभिन्न मुद्दों पर कांग्रेस पार्टी एवं अन्य विपक्षी दलों के सदस्यों के हंगामे के कारण राज्यसभा की कार्यवाही सोमवार को दो बार के स्थगन के बाद दोपहर तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दी गयी. कांग्रेस पार्टी के मेम्बर कर्नाटक के राजनीतिक घटनाक्रम पर, जबकि सपा के मेम्बर सोनभद्र में आदिवासियों की सामूहिक मर्डर व तृणमूल कांग्रेस पार्टी के मेम्बर दलित उत्पीड़न के मुद्दे में चर्चा कराने की मांग कर रहे थे.

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भोजनावकाश के बाद दोपहर दो बजे सदन की मीटिंग शुरु होने पर उपसभापति हरिवंश ने सदन पटल पर मानव अधिकार संरक्षण (संशोधन) विधेयक 2019 पेश करवाया. गृह प्रदेशमंत्री नित्यानंद राय द्वारा विधेयक पेश करने के साथ ही कांग्रेस पार्टी सहित अन्य दलों के सदस्यों ने नारेबाजी शुरु कर दी. कुछ समय बाद कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस पार्टी व सपा के मेम्बर आसन के नजदीक आकर नारेबाजी करने लगे.

इस बीच उपसभापति ने माकपा के इलामारम करीम व तृणमूल कांग्रेस पार्टी के नदीमुल हक से विधेयक पर संशोधन प्रस्ताव पेश करने को कहा. करीम ने सदन में व्यवस्था नहीं होने का हवाला देते हुये प्रस्ताव पेश करने में असमर्थता जतायी. जबकि हक अपनी पार्टी एवं कांग्रेस पार्टी के सदस्यों के साथ आसन के नजदीक नारेबाजी करते रहे. संशोधन पेश नहीं होने पर उपसभापति ने हंगामे के बीच विधेयक पर चर्चा शुरु कराते हुये कांग्रेस पार्टी के विवेक तन्खा से विचार जाहीर करने को कहा. तन्खा ने भी शोरगुल के कारण बोलने से इंकार कर दिया. इसके बाद उपसभापति ने बीजेपी के प्रभात झा को बोलने के लिये कहा. इससे पहले तृणमूल कांग्रेस पार्टी के डेरेक ओ ब्रायन, कांग्रेस पार्टी के आनंद शर्मा व टीआरएस के के केशव राव ने विभिन्न नियमों का हवाला देते हुये व्यवस्था का प्रश्न उठाया. तीनों सदस्यों ने संशोधन प्रस्ताव पेश कराये बिना विधेयक पर चर्चा शुरु कराने पर असहमति दर्ज करायी.

इस पर उपसभापति ने बोला कि बार बार आग्रह करने पर भी करीम व हक द्वारा संशोधन प्रस्ताव पेश नहीं करने पर उन्होंने चर्चा शुरु करायी है. उन्होंने एक बार फिर करीम से संशोधन प्रस्ताव पेश करने को कहा. करीम ने उपसभापति ने सदन की मीटिंग कुछ समय के लिये स्थगित कर सभी दलों के नेताओं से वार्ता कर सदन में व्यवस्था कायम करने का अनुरोध किया. इस पर उपसभापति ने सदन की कार्यवाही तीन बजे तक के लिये स्थगित कर दी.

इससे पहले सुबह, उच्च सदन की मीटिंग प्रारम्भ होने पर सभापति एम वेंकैया नायडू ने दिल्ली की पूर्व सीएम शीला दीक्षित के निधन का जिक्र किया व सदस्यों ने कुछ क्षण खड़े होकर दिवंगत आत्मा के प्रति सम्मान व्यकत किया. इसके बाद सभापति नायडू ने आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए व बोला कि विभिन्न मुद्दों पर चर्चा के लिए उन्हें कई नोटिस मिले हैं व उन्होंने उन नोटिसों को स्वीकार नहीं किया है..कांग्रेस के मेम्बर कर्नाटक के मामले पर चर्चा की मांग कर रहे थे वहीं तृणमूल कांग्रेस पार्टी व वाम दल के मेम्बर भीड़ द्वारा मर्डर और दलितों के उत्पीड़न जैसे मामले उठाने की मांग कर रहे थे.

सभापति ने बोला कि कर्नाटक मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है व इस पर सदन में चर्चा नहीं हो सकती. उन्होंने बोला कि यह मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में है. दोनों पक्ष न्यायालय गए हैं. उस पर यहां कैसे चर्चा हो सकती है. नायडू ने हंगामा कर रहे सदस्यों से शांत होने व सदन में शून्यकाल चलने देने की अपील की. उन्होंने बोला कि हंगामा कर रहे सदस्यों को अन्य सदस्यों के अधिकारों का हनन नहीं करना चाहिए.

सभापति ने बोला कि शून्यकाल के तहत 20 मामले उठाए जाने हैं. उन्होंने सदस्यों से सदन में नारेबाजी नहीं करने की अपील की. इस अपील का प्रभाव नहीं होते देख उन्होंने 11 बजकर करीब 10 मिनट पर मीटिंग दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी. एक बार के स्थगन के बाद मीटिंग शुरु होने पर उपसभापति ने प्रश्नकाल शुरु कराया लेकिन विपक्षी दलों के सदस्यों ने नारेबाजी शुरु कर दी. हंगामे के बीच ही प्रश्नकाल शुरु हुआ लेकिन लगभग दस मिनट के बाद कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, सपा, बीएसपी व आप के सदस्यों ने आसन के नजदीक आकर नारेबाजी शुरु कर दी.

उपसभापति ने सदस्यों से शांति बनाये रखते हुये प्रश्नकाल होने देने की अपील की. नारेबाजी कर रहे सदस्यों के नहीं मानने पर उपसभापति ने लगभग सवा 12 बजे सदन की मीटिंगदो बजे तक के लिये स्थगित कर दी. हंगामा कर रहे दलों के कुछ सदस्यों ने कार्यस्थगन प्रस्ताव का नोटिस देकर इन मुद्दों पर चर्चा कराने की मांग की थी. इस बीच तृणमूल कांग्रेस पार्टीके डेरेक ओ ब्रायन व कांग्रेस पार्टी के भुवनेश्वर कालिता ने भारी शोरगुल के बीच हो रहे प्रश्नकाल को लेकर व्यवस्था का प्रश्न उठाने की मांग की, लेकिन उपसभापति ने इसे स्वीकार नहीं किया.