फर्जी दस्तावेजों के बलबूते युवकों को कनाडा में रोजगार दिलाने के नाम पर लुटे लाखों रुपए

फर्जी दस्तावेजों के बलबूते युवकों को कनाडा में रोजगार दिलाने के नाम पर  लुटे लाखों रुपए

फर्जी दस्तावेजों के बलबूते युवकों को कनाडा में रोजगार दिलाने के नाम पर लाखों रुपए वसूलने वाले एक रैकेट का दिल्ली पुलिस ने भंडाफोड़ किया गया है. दिल्ली पुलिस की क्राइम शाखा इस रैकेट के बिचौलियों सहित 7 लोगों को हिरासत में लिया है. अरैस्ट लोगों के पास से पुलिस ने पासपोर्ट-वीजा से लेकर बाकी तमाम जाली दस्तावेज व इन दस्तावेजों को छापने की मशीनें जब्त की हैं.

दिल्ली पुलिस की क्राइम शाखा के उपायुक्त राजेश देव मीडिया को बताया, 'गिरफ्तार आरोपियों के नाम जितेंद्र कुमार मण्डल (नेपाल), प्रदीप कुमार कट्टामुरी (विशाखापट्टनम, आंध्र प्रदेश), विपिन शर्मा उर्फ विजय शर्मा (पहाड़गंज, दिल्ली), गगन सिंह उर्फ सरदार (प्रताप नगर, दिल्ली), आशा रानी (फरीदाबाद, हरियाणा), विजय कुमार(वैशाली, गाजियाबाद, उप्र), मनजीत सिंह उर्फ बब्बू (वैशाली, गाजियाबाद, उप्र) व जितेंद्र कुमार (जहांगीरपुरी, दिल्ली) है.'

इन सभी अरैस्ट आरोपियों में मनजीत सिंह उर्फ बब्बू रैकेट का मुखिया है. जितेंद्र कुमार की प्रिंटिंग मशीन है. नेपाल निवासी जितेंद्र कुमार मण्डल, प्रदीप कुमार कट्टामुरी, विपिन शर्मा दलाल व गगन सिंह और आशा रानी बिचौलिया हैं. डीसीपी राजेश देव ने बताया, 'गिरफ्तार लोगों के निशाने पर वे शिक्षित युवक होते थे, जो किसी भी मूल्य पर कनाडा सहित अन्य राष्ट्रों में जाकर जॉब करने को उतावले रहते थे. पुलिस के मुताबिक, अरैस्ट नेपाली मूल का जितेंद्र कुमार मण्डल अपने देश से भी ऐसे इच्छुक बेरोजगारों को फंसाकर दिल्ली लाता था.'

डीसीपी के अनुसार, रैकेट का मुखिया मनजीत सिंह बब्बू कम्प्यूटर डिजाइनिंग का कार्य जानता है. वह जहांगीरपुरी (दिल्ली) में स्थित प्रिंटिंग प्रेस में जाली वीजा-पासपोर्ट छापने का कार्य करता था. पुलिस ने रैकेट के पास से खाली वीजा स्टिकर्स भी बरामद किए हैं.


डीसीपी राजेश के मुताबिक,इस अंतरराष्ट्रीय रैकेट के भंडाफोड़ के लिए के लिए सहायक पुलिस आयुक्त संदीप लांबा के नेतृत्व में एक टीम बनाई गई थी. टीम के सदस्यों ने देश भर में छापे मारकर भिन्न-भिन्न स्थानों से भारतीय व नेपाल के नागरिकों के 43 फर्जी वीजा-पासपोर्ट, 32 बायोडेटा, कनाडा के वीजा स्टिकर, मुहरें, होलोग्राम, रंगीन प्रिंटर्स, स्कैनर जब्त किए.

उन्होंने बोला कि छानबीन के दौरान पता चला है कि यह रैकेट बेरोजगारों को इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के बलबूते विदेश भेजने के नाम पर अब तक 14-15 लाख रुपए ठग चुका है. वैसे छानबीन अभी जारी है. पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह रैकेट देश में व कितने बेरोजगारों को झांसा देकर जाल में फंसाए हुए है.