'लाल सलाम' दे रहा दस्तक, मुहिम को आगे ले जाने के लिए गरीब लोगो का लेते है सहारा

'लाल सलाम' दे रहा दस्तक,  मुहिम को आगे ले जाने के लिए गरीब लोगो का लेते है सहारा

अब यूपी के कई जिलों में लहराने की प्रयास में जुट गए हैं। भोपाल में हुई जौनपुर के रहने वाले दंपती की गिरफ्तारी, यही इशारा दे रही है कि यूपी में नक्सलियों की मुहिम अब चंदौली, सोनभद्र व मिर्जापुर के जंगलों से होती हुई कई अन्‍य शहरों तक पहुंच गई हैं। नक्सली यो वे लोग हैं, जो आए दिन अपनी मांगों को लेकर सरकार के लिए कोई न कोई नया बवाल खड़ा किए रहते हैं। नक्सली अपनी मुहिम को आगे ले जाने के लिए गरीबों का सहारा लेते हैं।

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नक्सली अपने मकसद के लिए आदिवासियों, गरीबों व समाज से प्रताडि़त लोगों को अपनी मुहिम में शामिल कर उनका हक दिलाने का वादा करते हैं। आज की तारीख में नक्सली एक ऐसा शब्द है, जिसका नाम सुनते ही लोग डरने लगते हैं। हालांकि अभी पुलिस के आला ऑफिसर इसपर खुलकर नहीं बोल रहे हैं लेकिन इस पर आगे भी कार्यवाही करने की बात जरूर कर रहे हैं

नक्सली अपनी मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए पहले तो पिछड़े राज्यों के पिछडे जिलों के आदिवासियों व गरीब लोगों को अपनी विचारधारा में जोड़कर सरकार के विरूद्ध अपनी मुहिम को आगे बढाते थे। लेकिन अब ये इशारा मिलने लगे है कि नक्सली अब शहरों की तरफ अपना रूख करने लगे हैं। सूत्रों के अनुसार महाराष्ट्र के गढ़चिरौली, रांची, बिहार, उत्तर प्रदेश के बार्डर व आंध्र के करनुल के जंगलो में छुपे रहने वाले नक्सली अब शहर की ओर रूख कर रहे हैं। इन नक्सलियों का नया टार्गेट है यूपी के कई शहर। यहां नक्सली अपनी विचारधारा फैलाने के फिराक में हैं।

सूत्रों के अनुसार नक्सलवादी अब फायनल असॉल्ट करने की फिराक में हैं। इसके जरिए अब वह देश की आर्थिक राजधानी में अपनी कार्रवाई करेंगे। ताकि केन्द्र व प्रदेश सरकार पर दबाव बनाया जाए। इजी हाईड आउट के लिए शहरों के झुग्गी झोपडि़यों का सहारा लिया जाएगा व यहां बसे बेबस लोगों को सरकार के विरूद्ध भड़काकर स्ट्राइक किए जाएंगे। अभी से अपने नक्सली कार्यकर्ताओं को ग्राउड स्टडी के लिए भेजा गया है। यह इलाके हैं- वाराणसी, कानपुर, चंदौली, देवरिया, लखनऊ, मिर्जापुर व जौनपुर।

सूत्रों के अनुसार इन शहरों में नक्सलियों के कार्य करने का उपाय अलग होगा। जैसे झुग्गी-झोपडि़यों वाले इलाके में नक्सलियों के कुछ कार्यकर्ता वहां के छोटे नेता के तौर पर या मेम्बरबनकर यहां रहने वाले गरीब निर्बल जरूरतमंद लोगों को भड़काकर अपनी व आकर्षित करेंगे। झुग्गी-झोपड़ियों की स्थान अब बड़ी-बड़ी इमारतें या फिर गैरकानूनी अतिक्रमण हो रहा है। इसमें कुछ विस्थापित लोग बहुत नाराज हैं व यहां रहने वाले कुछ ऐसे भी लोग हैं जो बहुत जरूरतमंद हैं।

नक्सली उनकी मदद कर ऐसे लोगों का लाभ उठाना चाहते हैं। हालांकि उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी एके जैन का भी मानना है कि ये लोग शहरों में रहने आ चुके हैं। सूत्रों के अनुसार नक्सलियों की टीम टूट जाने की वजह से फिर से एक नयी टीम बनाने को लेकर नक्सली शहरों की तरफ रूख कर रहे हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश में एक बार फिर से लाल सलाम की दस्तक सुनाई पड़ रही है।