जानिये वह बड़ा मौका जिसने एक ही झटके में बदल दी पीएम मोदी व ममता बनर्जी की पहचान

जानिये वह बड़ा मौका जिसने एक ही झटके में बदल दी पीएम मोदी व ममता बनर्जी की पहचान

नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) व ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) हिंदुस्तान की मौजूदा पॉलिटिक्स में दो बड़े नाम हैं. हालांकि, लोकप्रियता व कामयाबी में पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) से कहीं ज्यादा आगे निकल गए हैं. दरअसल 2019 लोकसभा चुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी TMC को सबसे ज्यादा नुकसान बीजेपी से हुआ है. इसका सबसे बड़ा कारण बीजेपी का पीएम Modi के नाम पर चुनाव लड़ना था. हालांकि, ममता बनर्जी के इस नुकसान के पीछे वर्षों पहले हुए एक घटना शामिल है, जिसने नरेंद्र मोदी के विकास मॉडल को सारे देशभर में एक नयी पहचान दे दी. दरअसल एक समय था जब इन दोनों ही नेताओं का कद लगभग बराबर था, लेकिन इसके बाद कुछ मौके ऐसे आए जिनकी मदद से ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल में लोकप्रिय होने लगी व नरेंद्र मोदी सारे देशभर में. आज हम आपको उसी एक बड़े मौके के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसने ममता बनर्जी व नरेंद्र मोदी की पहचान को हमेशा के लिए बदल दिया.

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रतन टाटा (Ratan Tata) का ‘M’ फेक्टर

रतन टाटा (Ratan Tata) ने एक बार नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) को “good M” बोला था. जबकि, ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) को “bad M” बोला था. दरअसल रतन टाटा (Ratan Tata) के इस बयान के पीछे Tata Motors का ड्रीम प्रोजक्ट Tata Nano शामिल था, जिसकी सिंगूर में फैक्ट्री को लेकर ममता बनर्जी ने 26 दिनों तक आंदोलन किया था.

क्या था सिंगूर का पूरा मामला?

टाटा मोटर्स (Tata Motors) को टाटा नैनो (Tata Nano) का प्लांट लगाने के लिए उस समय की पश्चिम बंगाल सरकार ने सिंगूर में अनुमति दी थी. Tata Motors की तरफ से करीब 1000 एकड़ जमीन पर Nano की कारों के लिए प्लांट बनना था. इसी दौरान इस प्लांट को लेकर वहां छोटे-मोटे आंदोलन होने लगे, जिसका बड़ा चेहरा बनी ममता बनर्जी. सिंगूर में Tata के प्लांट लगाने को लेकर ममता बनर्जी धरने पर बैठ गईं. पश्चिम बंगाल में धरती अधिग्रहण के विरूद्ध लगातार हिंसक विरोध-प्रदर्शन होने लगे. इसको देखते हुए वर्ष 2008 में Tata ने अपना प्लांट सिंगूर से बाहर ले जाने का निर्णय किया.

26 दिन के धरने से कैसे चमक गईं ममता बनर्जी?

सिंगूर में Tata की फैक्ट्री लगाए जाने का सबसे बड़ा विरोध ममता बनर्जी ने किया था, जिसके बाद Tata ने बंगाल के बाहर अपना प्लांट ले जाने का निर्णय किया. यह एक ऐसा मौका था, जिसने पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की लोकप्रियता को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया. इसका नतीजा यह रहा कि 2011 विधानसभा चुनाव में वामपंथी सरकार की बुरी पराजय हुई व ममता बनर्जी की सरकार को भारी बहुमत मिला.

ममता बनर्जी का वादा व उच्चतम न्यायालय का फैसला

ममता बनर्जी ने किसानों से वादा किया था कि 2011 विधानसभा चुनाव में जीत के बाद वो किसानों की जमीन को वापस दिलाने में मदद करेंगे. चुनाव जीतने के बाद ममता बनर्जी ने कानून बनाकर सिंगूर की जमीन को किसानों को लौटाने का निर्णय किया था. ममता सरकार ने 22 जून 2012 को लैंड रिहैबिलिटेशन एंड डेवलपमेंट एक्ट, 2011 बनाया, जहां प्रदेशसरकार को अधिकार था कि वह 997 एकड़ ज़मीन को अपने क़ब्ज़े में ले सकती थी. इसके विरूद्ध टाटा ग्रुप कलकत्ता उच्च न्यायालय में गई व फिर बाद में ये मुद्दा उच्चतम न्यायालयमें पहुंचा.

गुजरात में पूरा हुआ रतन टाटा का सपना

इसके बाद रतन टाटा का सपना कही जाने वाली Tata Nano का प्लांट गुजरात में लगा. दरअसल उस समय गुजरात के सीएम नरेंद्र मोदी थे, जिन्होंने Tata Motors को गुजरात में अपना प्लांट लगाने का निमंत्रण दिया था. नरेंद्र मोदी के इस निर्णय को न सिर्फ कंपनी की तरफ से सराहा गया बल्कि, कई व मौको पर इसे सराहना मिली. दरअसल इसके बाद से नरेंद्र मोदी की पहचान एक ऐसे नेता के रूप में हुई, जो विकास पसंद था. इसके बाद से बड़ी कंपनियों का रूझान गुजरात की तरफ व बढ़ा. पीएम बनने से पहले नरेंद्र मोदी जिस गुजरात मॉडल की बात करते आए थे, उसमें बिना किसी रुकावट के व्यवसाय करना एक बड़ा मामला था.

फ्लॉप प्रोडक्ट बन गई टाटा नैनो

Tata Nano को शुरुआती दौर में बहुत ज्यादा लोकप्रियता मिली. हालांकि, बाद में इसमें आने वाली कुछ खराबियों ने इसकी लोकप्रियता को सबसे बड़ा नुकसान पहुंचाया. ऐसे में BS-6 इंजन व नए सेफ्टी नॉर्म्स को देखते हुए अब इसके भविष्य पर बड़ा सवाल उठ गया है. Tata Nano की जनवरी, फरवरी व मार्च महीने में एक भी यूनिट का प्रोडक्शन नहीं हुआ है