धवन अंतरिक्ष केन्द्र से इसरो के महत्वकांक्षी मून मिशन चंद्रयान- 2 ने भरी उड़ान, जानिये किस दिन चांद की भूमि पर उतरेगा

 धवन अंतरिक्ष केन्द्र से इसरो के महत्वकांक्षी मून मिशन चंद्रयान- 2 ने भरी उड़ान, जानिये किस दिन चांद की भूमि पर उतरेगा

इसरो के महत्वकांक्षी मून मिशन चंद्रयान- 2 ने दोपहर 2.43 बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र से उड़ान भरी. ‘बाहुबली’ नाम से चर्चित जीएसएलवी मार्क-3 रॉकेट सामान्य ढंग से कार्य कर रहा है. लॉन्चिंग के लिए रविवार शाम 6:53 बजे से करीब 20 घंटे की उलटी गिनती प्रारम्भ की गई थी. चंद्रयान-2 अपने लॉन्चिंग के 48वें दिन चांद की भूमिपर उतरेगा.

Image result for लॉन्चिंग के बाद प्रेस कॉन्‍फ्रेंस कर इसरो के चीफ ने कही यह बात, चांद के इस ध्रुव पर उतरेगा चंद्रयान-2

पहले इसे 15 जुलाई को लॉन्च किया जाना था, लेकिन ऐन वक्त पर लॉन्च व्हीकल में लीक जैसी तकनीकी खामी का पता चलने पर इसे टाल दिया गया था. इस मिशन को लेकर इसरो ने कई परिवर्तन भी किए हैं जिससे लॉन्चिंग में होने वाली देरी का असर नही होगा.

मिशन का मुख्य मकसद

भूकंपीय गतिविधियों का अध्ययन चंद्रमा पर पानी की मात्रा का अनुमान लगाना चंद्रमा के बाहरी वातावरण की ताप-भौतिकी गुणों का विश्लेषण है चांद की जमीन में उपस्थितखनिजों एवं रसायनों तथा उनके वितरण का अध्ययन करना

वक्त बचाने के लिए भूमि का एक चक्कर कम

लॉन्चिंग की तारीख आगे बढ़ाने के बावजूद चंद्रयान-2 चंद्रमा पर तय तारीख 6-7 सितंबर को ही पहुंचेगा. इसे समय पर पहुंचाने का मकसद यही है कि लैंडर व रोवर तय प्रोग्राम के हिसाब से कार्य कर सकें. समय बचाने के लिए चंद्रयान पृथ्वी का एक चक्कर कम लगाएगा. पहले 5 चक्कर लगाने थे, पर अब 4 चक्कर लगाएगा. इसकी लैंडिंग ऐसी स्थान तय है, जहां सूरज की लाइट ज्यादा है. लाइट 21 सितंबर के बाद कम होनी प्रारम्भ होगी. लैंडर-रोवर को 15 दिन कार्य करना है, इसलिए वक्त पर पहुंचना महत्वपूर्ण है.

दस हजार से ज्यादा ने कराया था रजिस्ट्रेशन

भारत के बड़े मिशन चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग को देखने के लिए लोगों में खासा उत्साह देखा गया. इसे लाइव देखने के लिए 10 हजार से ज्यादा लोगों ने औनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया.इसरो ने हाल ही में आम लोगों के लिए रॉकेट लॉन्चिंग प्रक्रिया को लाइव देखने की आरंभ की है. लोगों ने विशेष तौर पर बनाई गई एक गैलरी में बैठकर चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग देखा.

चांद पर मोर्चा संभालेंगे ऑर्बिटर, विक्रम व प्रज्ञान

इस रॉकेट में तीन मॉड्यूल ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) व रोवर (प्रज्ञान) हैं. इस मिशन के तहत इसरो चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर को उतारेगा. इस बार चंद्रयान-2 का वजन 3,877 किलो होगा. यह चंद्रयान-1 मिशन (1380 किलो) से करीब तीन गुना ज्यादा है. लैंडर के अंदर उपस्थित रोवर की गति 1 सेमी प्रति सेकंड रहेगी. चांद की कक्षा में पहुंचने के बाद ऑर्बिटर एक वर्ष तक कार्य करेगा.

चंद्रयान 2 में कुल 13 पेलोड

स्वदेशी तकनीक से निर्मित चंद्रयान-2 में कुल 13 पेलोड हैं. आठ ऑर्बिटर में, तीन पेलोड लैंडर विक्रेम व दो पेलोड रोवर प्रज्ञान में हैं. पांच पेलोड हिंदुस्तान के, तीन यूरोप, दो अमेरिका वएक बुल्गारिया के हैं.

चार टन श्रेणी के उपग्रहों को ले जाने के लिए किया गया डिजाइन

जीएसएलवी मार्क-3 को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (जीटीओ) में 4 टन श्रेणी के उपग्रहों को ले जाने के लिए डिजाइन किया गया है. इसके वाहन में दो ठोस स्ट्रेप ऑन मोटर हैं.इसमें एक कोर तरल बूस्टर है व ऊपर वाले चरण में क्रायोजेनिक है. अब तक इसरो ने 3 जीएसएलवी-एमके 3 रॉकेट भेजे हैं.

क्या है चंद्रयान-2 मिशन?

ये हिंदुस्तान का चंद्रमा मिशन है, जिसमें यान को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर भेजा गया है.

जीएसएलवी क्या है?

इसरो ने जीएसएलवी को मुख्य तौर पर कम्यूनिकेशन सैटेलाइट्स लॉन्च करने के लिए डिजाइन किया है. इनमें वो सैटेलाइट शामिल हैं, जो जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट यानी 250x36000 किलोमीटर पर स्थापित की जाती है. यहां से सैटेलाइट्स को उसके फाइनल मुकाम तक पहुंचाया जाता है. इसमें उपस्थित इंजन सैटेलाइट को जियोसिंक्रोनस अर्थ ऑर्बिट यानी GEO जो 36 हजार किलोमीटर ऊंचाई पर पहुंचाती है. अपनी जियो-सिंक्रोनस नेचर के चलते, सैटेलाइट अपनी ऑर्बिट में एक फिक्स पोजीशन में घूमती है. ये भूमि से एक नियत जगह पर दिखाई देती है.