पुलवाम के हर शहीद जवान के सम्मान में नागपुर जिला परिषद के कर्मचारियों ने इन गांवों को लिया गोद

 पुलवाम के हर शहीद जवान के सम्मान में नागपुर जिला परिषद के कर्मचारियों ने इन गांवों को लिया गोद

इस वर्ष फरवरी में जम्मू और कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ के जवानों को श्रद्धांजलि देने के लिए नागपुर जिला परिषद के कर्मचारियों ने एक बड़ा कार्य करने की ठानी. देश की सरहद पर डटकर रक्षा करने वाले जवान के सम्मान में जिला परिषद ने देश का पेट पालने वाले अन्नदाता के ज़िंदगी की सबसे बड़ी समस्या का निवारण करने का बीड़ा उठाया. अब चार महीने बाद उसके नतीजे देखकर यह गर्व से बोला जा सकता है कि शहीदों के लिए इससे बेहतर श्रद्धांजलि शायद ही कुछ व होती.

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  • पुलवामा के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए नागपुर जिला परिषद के कर्मचारियों ने एक बड़ा कार्य करने की ठानी
  • देश की सरहद पर डटकर रक्षा करने वाले जवान के सम्मान में जिला परिषद ने अनोखे अंदाज में दी श्रद्धांजलि
  • दरअसल नागपुर जिला परिषद के कर्मचारियों ने पुलवाम के हर शहीद जवान के सम्मान में एक गांव को गोद लिया

दरअसल, नागपुर जिला परिषद के कर्मचारियों ने हर शहीद जवान के सम्मान में एक गांव को गोद लिया. मार्च से अब तक हर हफ्ते आधी रात तक फ्लडलाइट्स की लाइट में खंदक वछोटी-छोटी नहरें बनाई गईं जिनमें बारिश का पानी जमा हो सके. जिला परिषद सीईओ संजय यादव ने बोला कि नारखेड तालुका में इस प्रॉजेक्ट को करने का विचार एक मीटिंग के दौरान आया जब ऑफिसर यह चर्चा कर रहे थे कि 14 फरवरी को हुए हमले के घाव भरने के लिए क्या किया जा सकता है.

  • जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए. आतंकवादियों की इस कायरता से सारे देश में उबाल है. जगह-जगह लोग हमले के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं तो कहीं कैंडल रोशनी के जरिए शहीदों को श्रद्धांजलि दी जा रही है. हमले में देश के भिन्न-भिन्न कोने से जवान शहीद हुए हैं इनमें से 12 यूपी के हैं.आगे स्लाइड में जानिए, देश के लिए कुर्बान होने वाले जवानों के बारे में-

  • विजय कुमार मौर्य भी इस आतंकवादी हमले में शहीद हो गए. वह उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के छपिया जयदेव गांव के रहने वाले थे.

  • पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के पश्चिमी बउरिया निवासी बबूल संतरा भी इस हमले में शहीद हो गए.

  • कॉन्स्टेबल महेश कुमार आतंकवादी हमले में शहीद हो गए. वह उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के तुड़िहरबादल का पुरवा गांव के रहने वाले थे.

  • ओडिशा के जगतसिंह पुर जिले के रहने वाले हेड कॉन्स्टेबल पीके साहू भी इस हमले में शहीद हो गए.

  • पुलवामा हमले में भागीरथ सिंह भी शहीद हो गए. राजस्थान के जिले ढोलपुर में जैतपुर के रहने वाले थे.

  • हेड कॉन्स्टेबल राम एडवोकेट आत्मघाती हमले में शहीद हो गए. वह उत्तर प्रदेश के मैनपुरी के गांव विनायकपुर के रहने वाले थे.

  • हेड कॉन्स्टेबल संजय कुमार सिन्हा पुलवामा हमले में शहीद हो गए. वह बिहार के पटना में रारगढ़ गांव के रहने वाले थे.

  • हेड कॉन्स्टेबल नारायण लाल गुर्जर भी इस हमले में शहीद हो गए. वह राजस्थान के राजसामंद के बिनोल के रहने वाले थे.

  • उत्तर प्रदेश के कौशल कुमार रावत भी हमले में शहीद हो गए. वह आगरा के केहरई गांव के रहने वाले थे.

  • यूपी के कानपुर देहात जिले के रायग्वान गांव के श्याम बाबू भी हमले में शहीद हो गए हैं.

  • हमले में शहीद हुए प्रदीप सिंह उत्तर प्रदेश के कन्नौज के तिर्वा के अजान गांव के रहने वाले थे.

  • यूपी के उन्नाव के लोक नगर गांव के अजीत कुमार आजाद भी हमले में शहीद हो गए.

  • महाराष्ट्र के बुल्ढाना जिले के लखनी प्लॉट गांव के निवासी हेड कॉन्स्टेबल संजय राजपूत भी शहीदों में शामिल हैं.

  • असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर मोहन लाल भी इस हमले में शहीद हो गए. वह उत्तराखंड के उत्तरकाशी के बानकोट गांव के रहने वाले थे.

  • पश्चिम बंगाल के नाडिया जिले के हंसपुकुरिया गांव के रहने वाले सुदीप बिस्वास भी पुलवामा आतंकवादी हमले में शहीद हो गए.

  • हेड कॉन्स्टेबल मनेश्वर बासुमतारी भी आतंकवादी हमले में शहीद हो गए. वह असम के बासका जिले के कलबारी गांव के रहने वाले थे.

  • तमिलनाडु के अरियालपुर जिले के करगुड़ी गांव के निवासी शिवचंद्रन सी भी पुलवामा हमले में शहीद हो गए.

  • कुलविंदर सिंह पुलवामा हमले में शहीद हो गए. वह पंजाब के आनंदपुर साहिब के रौली गांव के रहने वाले थे.

  • यूपी के अमित कुमार भी आतंकवादी हमले में शहीद हो गए. वह शामली जिले के रायपढ़ गांव के रहने वाले थे.

  • पुलवामा हमले में जीत राम भी शहीद हो गए. वह राजस्थान के भरतपुर जिले के सुंदरवाली के रहने वाले थे.

  • गुरु एच पुलवामा हमले में शहीद हो गए. वह कर्नाटक के मांड्या जिले के गुड़िगेरे गांव के रहने वाले थे.

  • सुब्रमण्यम जी आतंकवादी हमले में शहीद हो गए. वह तमिलनाडु के तूतिकोरिन जिले के सबलापेरी गांव के रहने वाले थे.

  • वसंत कुमार वीवी भी इस हमले में शहीद हो गए. वह केरल के वायानाड जिले के रहने वाले थे.


यादव ने बताया कि ज्यादातर जवान ग्रामीण इलाकों से व किसान परिवारों से थे, यह निर्णय किया गया कि किसानों के लिए कुछ किया जाएगा. उन्होंने बोला कि आज सबसे बड़ी समस्या पानी की है. इस तरह बारिश का पानी जमा करने के बारे में निर्णय किया गया. कर्मचारियों व संगठनों ने भी इस कार्य को करने के लिए उत्साह दिखाया.

जिला परिषद कर्मचारियों ने उठाई जिम्मेदारी
नारखेड तालुका जिले में सबसे ज्यादा सूखी है, इसलिए इसका चयन किया गया. डेप्युटी सीईओ राजेंद्र भूयर ने बताया कि संगठन की मजबूती के कारण गांवों में कार्य किया जा सका.उन्होंने बताया कि हर गांव में एक जिला परिषद कार्यकर्ता है. सभी 40 गांवों का चुनाव करने व समन्वय बैठाने में इस बात का बहुत लाभ हुआ. ब्लॉक विकास अधिकारी, ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर व दूसरे अधिकारियों ने अपने प्रशासन तंत्र को कार्य पर लगाया व मार्च में कार्य प्रारम्भ कर दिया गया.

नागपुर के गार्जियन मिनिस्टर चंद्रशेखर बावनखुले की ओर से फंड जारी होने से पहले ही कर्मचारियों ने खुद पैसे इकट्ठे करना प्रारम्भ कर दिया. जिला परिषद की योजनाओं के तहत भी फंड मिलता गया. हर गांव में बड़े-बड़े बैनर लगाकर एक शहीद की तस्वीर के साथ प्रॉजेक्ट के बारे में बताया गया.

आधी रात तक होता था काम
गांववालों ने भी इस कार्य में हाथ बंटाया व उनकी कमाई भी हो गई. बड़ी संख्या में जिला परिषद कर्मचारी भी हर हफ्ते जाकर उनका हाथ बंटाते थे. गर्मी का मौसम आने के साथ आधी रात को कार्य किया जाने लगा. कई बार प्रातः काल 3 बजे तक कार्य होता था. गांववालों को समझ में आ गया था कि उनके लिए यह प्रॉजेक्ट कितना महत्वपूर्ण है. उनसे भी बेहतरीन समर्थन मिला.

अब बारिश का इंतजार
भूयर ने बताया कि 23 मई को खुदाई का पहला चरण पूरा हो गया. अब वे बारिश में इन खंदकों के भरने का इंतजार कर रहे हैं ताकि दूसरे चरण का कार्य प्रारम्भ किया जाए. जिला एजुकेशन ऑफिसर चिंतामणि वंजारी का बोलना है कि भगवान से प्रार्थना है कि भरपूर बारिश हो जाए. उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रार्थना व शहीदों के आशीर्वाद की मदद उन्हें जरूर मिलेगी.