गोयल के इस कोच कारखाने की क्षमता से युवओं को मिलने वाले है रोजगार के अवसर, जाने पुरीं जानकारी

गोयल के इस कोच कारखाने की क्षमता से युवओं को मिलने वाले है रोजगार के अवसर, जाने पुरीं जानकारी

रेल मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को बोला कि हम चाहते हैं कि रायबरेली कोच कारखाने की क्षमता प्रतिवर्ष 5,000 डिब्बे बनाने की हो जिससे लोगों को नौकरियां मिले, उद्योग को बल मिले व वहां से हिंदुस्तान के बने ट्रेन सेट व कोच सारे दुनिया में जायें. पिछले हफ्ते लोकसभा में संप्रग अध्यक्ष सोनियां गांधी ने सरकार पर रेलवे की ''बहुमूल्य संपत्तियों को व्यक्तिगत क्षेत्र के चंद हाथों को कौड़ियों के दाम पर बेचने का आरोप लगाया था व इस बात पर अफसोस जताया था कि सरकार ने निगमीकरण के इस्तेमाल के लिए रायबरेली के मॉडर्न कोच कारखाने जैसी एक बेहद कामायाब परियोजना को चुना है. उन्होंने निगमीकरण को निजीकरण की आरंभ करार दिया था.

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लोकसभा में साल 2019..20 के लिए रेल मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदानों की मांगों पर चर्चा का जवाब देते हुए रेल मंत्री ने बोला कि रायबरेली मॉर्डन कोच फैक्ट्री को 2007..08 को मंजूरी दी गई थी व 2014 में हमारी सरकार बनने तक वहां एक भी कोच नहीं बना. कपूरथला व चेन्नई से लाकर वहां पेंट किया जाता था व कहते थे कि प्रोडक्शन हो गया.

पीयूष गोयल ने बोला कि मॉर्डन कोच फैक्ट्री में अगस्त 2014 में पहला कोच बनकर निकला था. उन्होंने जोर दिया कि नरेन्द्र मोदी सरकार आने से पहले वहां एक आदमी की नियुक्ति नहीं की गई थी केवल 'तदर्थ आधार पर लोगों की भर्ती की गई थी. नरेन्द्र मोदी सरकार आने के बाद वहां नियुक्तियां हुई, कार्यों को आगे बढ़ाया गया. पीएम नरेंद्र मोदी खुद वहां गए ववहां निर्माण काम तेजी से आगे बढ़ाने का आदेश दिया.

रेल मंत्री ने बोला कि इस कोच फैक्ट्री की क्षमता प्रति साल 1000 कोच बनाने की थी व 2018..19 में 1425 कोच बने. गोयल ने कहा, ''हम चाहते हैं कि रायबरेली फैक्ट्री की क्षमता 5,000 कोच प्रति साल बनाने की हो, इससे हमारे उद्योग को बल मिलेगा, वहां से हिंदुस्तान के बने ट्रेन सेट व कोच सारे दुनिया में जायें.