भविष्य में बनने वाली कारों एवं अन्य वाहनों का इस तरह से किया जाएगा माइलेज टेस्ट

 भविष्य में बनने वाली कारों एवं अन्य वाहनों का इस तरह से किया जाएगा  माइलेज टेस्ट

कारों में ईधन की खपत की सटीक जाँच एयरकंडीशनर को चालू रखकर की जाएगी. कंपनियों को भविष्य में बनने वाली कारों एवं अन्य वाहनों को एसी चालू करके ही माइलेज टेस्ट करना होगा व उसी हिसाब से वे माइलेज का दावा कर पाएंगे. इससे वाहन निर्माता कंपनियों पर माइलेज में सुधार लाने के लिए नयीतकनीक अपनाने का भी दबाव बढ़ेगा व अच्छे माइलेज से वाहन मालिकों को बचत होगी.

वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने हाल में अपनी एक रिपोर्ट में इसकी सिफारिश की है, जिस पर सरकार गंभीर है. आने वाले दिनों में यह नियम अधिसूचित किया जा सकता है. अभी कारों या वाहनों में प्रति किलोमीटर ईधन की खपत का जो आंकड़ा दिया जाता है, वह एसी को बंद करके तैयार किया जाता है. जबकि बढ़ती गर्मी के कारण कुछ महीनों को छोड़कर कारों में एसी हमेशा चलते हैं. मंत्रालय का बोलना है कि इससे वाहनों में ईंधन की खपत को लेकर ठीक जानकारी नहीं मिल पाती है. कंपनियां वाहनों से होने वाले उत्सर्जन का ठीक आंकड़ा देने से बच जाती है. लिहाजा यह तय किया गया है कि वाहनों की माइलेज टेस्टिंग कंपनियां एसी को ऑन करके करें. सरकार इस व्यवस्था को जरूरी बनाएगी. इससे वाहन निर्माता कंपनियों पर माइलेज में सुधार लाने के लिए नयी तकनीक अपनाने का भी दबाव बढ़ेगा.

पर्यावरण मंत्रालय ने कूलिंग एक्शन प्लान तैयार किया है, ताकि ऊर्जा की खपत में कमी लाई जा सके. ताकि ईधन व कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आए. ऊर्जा में खपत की कमी के तहत घरों में एसी के तापमान को भी फिक्स करने कवायद प्रारम्भ की गई थी, लेकिन उद्योग जगत के विरोध के बाद इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया.

2.4 लाख टन होगी रेफ्रिजरेंट की खपत

कार क्षेत्र में रेफ्रिजरेंट की मांग 2017-18 में 4000-6000 टन थी जो 2037-38 में 19000-24000 टन तक पहुंच जाएगी. बसों एवं रेलवे में भी रेफ्रिजरेंट की मांग बढ़ेगी.

नई तकनीक आए तो कम ईंधन खपत
रिपोर्ट में बोला गया है कि वाहनों में एयर कंडीशनर को लेकर नयी तकनीकों पर भी कार्य किए जाने की आवश्यकता है ताकि ईधन की खपत न्यूनतम हो.विशेषज्ञों का मानना है कि वाहनों के एसी को फ्यूल एफिसिएंट (कम ऊर्जा की खपत) बनाने की दिशा में अपेक्षित कार्य नहीं हुआ है जबकि इसकी बहुत ज्यादागुंजाइश है व एसी में होने वाली ईधन की खपत को 30-40 प्रतिशत तक घटाया जा सकता है.