सुरक्षा व विकास परियोजनाओं को लेकर अमित शाह ने कि कई बैठक, लेकिन बंद नही हुई घाटी

सुरक्षा व विकास परियोजनाओं को लेकर अमित शाह ने कि कई बैठक, लेकिन बंद नही हुई घाटी

कश्मीर में फैले आतंकवाद के बीच तीन दशक में पहली बार ऐसा हुआ है कि अलगाववादियों ने घाटी में गृहमंत्री के भ्रमण के दौरान बंद नहीं बुलाया गया. बुधवार को गृहमंत्री का पदभार संभालने के बाद पहली बार अमित शाह अपने दो दिवसीय भ्रमण पर जम्मू और कश्मीर की श्रीनगर पहुंचे. यहां उन्होंने सुरक्षा व विकास परियोजनाओं को लेकर कई बैठकें की. वह जम्मू और कश्मीर के गवर्नर सत्यपाल मलिक के साथ एकीकृत मुख्यालय मीटिंग की सह-अध्यक्षता करने वाले हैं.

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शाह प्रदेश के पार्टी नेताओं, नागरिक समाज के प्रतिनिधियों व पंचायत सदस्यों से मुलाकात करेंगे. इसके अतिरिक्त अमरनाथ तीर्थ पर भी जाएंगे. उच्च स्तरीय सुरक्षा मीटिंग में शाह ने सभी एजेंसियों से बोला कि वह उपद्रवियों व आतंकवादियों के विरूद्ध अपने सख्त दृष्टिकोण को बनाए रखें. उन्होंने सभी सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहने का आदेश देते हुए बोला है कि वह एक जुलाई से प्रारम्भ हो रही अमरनाथ यात्रा को हिंसा मुक्त सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएं.

गृह मंत्रालय में विशेष सचिव (आतंरिक सुरक्षा) एपी माहेश्वरी ने बताया कि गृह मंत्री अमित शाह ने सुरक्षा एजेंसियों से बोला कि अमरनाथ यात्रियों की सुरक्षा के मुद्दे में कोई ढिलाई नहीं होनी चाहिए. हर हालत में एसओपी का पालन किया जाना चाहिए. वरिष्ठ ऑफिसर खुद व्यवस्थाओं का पर्यवेक्षण करें.

दिलचस्प बात यह है कि सैयद अली शाह गिलानी व मिरवाइज अमर फारूक के नेतृत्व वाली हुर्रियत कांफ्रेस ने बुधवार को घाटी में बंद नहीं बुलाया. वहीं किसी भी अलगाववादी नेता ने कोई बयान जारी नहीं किया. पिछले तीन दशकों के दौरान अलगाववादी संगठन ने घाटी में तब-तब बंद बुलाया है जब केन्द्र सरकार का कोई प्रतिनिधि भ्रमण पर कश्मीर आया है.

ज्वाइंट रेसिसटेंस लीडरशिप गिलानी, मिरवाइज व जम्मू और कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के मुखिया यासिन मलिक का एक संयुक्त संगठन है. इस संगठन ने तीन फरवरी को पीएम नरेंद्र मोदी के घाटी भ्रमण के दौरान पूरी तरह से बंद बुलाया था. इस संयुक्त संगठन ने 10 सितंबर, 2017 को उस समय हड़ताल का आह्वान किया था. जब तत्कालीन गृहमंत्री राजनाथ सिंह कश्मीर भ्रमण पर आए थे. हालांकि बुधवार को सभी अलगाववादी संगठन चुप्पी साधे रहे.