फेसबुक, वॉट्सऐप, जूम पर जो करना है कर लो, सरकार नहीं करेगी तांक-झांक; ट्राई की सिफारिश- फिलहाल रेगुलेशन से अलग ही रखें ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को

फेसबुक, वॉट्सऐप, जूम पर जो करना है कर लो, सरकार नहीं करेगी तांक-झांक; ट्राई की सिफारिश- फिलहाल रेगुलेशन से अलग ही रखें ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को

दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कई मौकों पर कहा है कि फेसबुक, वॉट्सऐप, टेलीग्राम समेत सभी ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को जवाबदेही के दायरे में लाना आवश्यक है। इसके लिए केंद्र सरकार ने कोशिश भी शुरू की थीं। लेकिन, दूरसंचार नियामक ट्राई को लगता है कि इसकी कोई आवश्यकता नहीं है। यानी इन प्लेटफॉर्म्स पर यूजर को जो करना है, करने दो। सरकार को तांक-झांक नहीं करनी चाहिए। ट्राई की इन सिफारिशों पर सरकार को फैसला लेना है। ट्राई की सिफारिश से टेलीकॉम ऑपरेटर जरूर नाराज हो गए हैं। उनका कहना है कि जब हम पर इतने रेगुलेशन है तो इन ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को क्यों छोड़ा जा रहा है। 5 सवालों में समझते हैं रेगुलेशन का मसला..

ओटीटी रेगुलेशन का मामला क्या है?

  • लंबे समय से मांग हो रही थी कि ओवर-द-टॉप (ओटीटी) प्लेटफॉर्म्स को भी जवाबदेह बनाना चाहिए। 2018 में तो इसके लिए सरकार पर दबाव भी बढ़ने लगा था, क्योंकि फेक न्यूज की वजह से मॉब लिंचिंग की घटनाएं लगातार सामने आ रही थीं।
  • ओटीटी कम्युनिकेशन सर्विसेस बुनियादी रूप से वह इंटरनेट ऐप्लिकेशंस हैं, जो मोबाइल ऑपरेटर्स के नेटवर्क से संचालित होती हैं। यह किसी न किसी तरह से टेलीकॉम कंपनियों की ही नहीं, बल्कि न्यूज चैनल्स और अखबारों की प्रतिस्पर्धी भी हैं।
  • दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने 2018 में मॉब लिंचिंग की घटनाएं बढ़ने पर वॉट्सऐप से कहा था कि वह इन गैरकानूनी मैसेज का जरिया बताएं। साथ ही भड़काऊ संदेश भेजने वाले की पहचान करने में मदद करें। ट्राई की सिफारिशें इन निर्देशों के उलट हैं।

ट्राई की सिफारिशें क्या हैं?

  • ट्राई ने 'रेगुलेटरी फ्रेमवर्क फॉर ओवर-द-टॉप (ओटीटी) कम्युनिकेशन सर्विसेस' नाम से अपनी सिफारिशों में किसी भी फर्म का नाम नहीं लिया है। ट्राई ने साफ तौर पर कहा है कि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के लिए किसी तरह के रेगुलेशन की आवश्यकता नहीं है। इन सेवाओं में फेसबुक मैसेंजर, वॉट्सऐप, ऐपल फेसटाइम, गूगल चैट, स्काइप, टेलीग्राम और माइक्रोसॉफ्ट टीम्स, सिस्को वेबेक्स, जूम, गूगल मीट्स जैसी नई सर्विसेस भी शामिल हैं।
  • ट्राई ने यह भी कहा कि भविष्य में इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन (आईटीयू) की स्टडी के आधार पर इस मुद्दे पर नए सिरे से देखने की आवश्यकता पड़ सकती है। पूरी दुनिया में इन ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को रेगुलेट करने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
  • ट्राई ने सिक्योरिटी और प्राइवेसी के मुद्दे पर कहा कि ओटीटी कम्युनिकेशन सर्विसेस का ढांचा अभी विकसित हो रहा है। एंड-यूजर्स की प्राइवेसी को बनाए रखने के लिए एनक्रिप्शन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल हो रहा है। यह किसी भी अथॉरिटी को क्लियर टेक्स्ट फॉर्मेट में कम्युनिकेशन हासिल करने से रोकती है।

ट्राई की सिफारिशें सही हैं या गलत?

  • किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले यह सोचना होगा कि इसके परिणाम क्या हो सकते हैं। पूरी तरह से रेगुलेशन न होना खतरनाक हो सकता है। फेसबुक, वॉट्सऐप जैसे प्लेटफॉर्म न्यूज और सूचना हासिल करने के साधन बन चुके हैं। जब टीवी चैनल और न्यूजपेपर को हिंसा भड़काने या समुदाय में नफरत फैलाने का दोषी ठहरा सकते हैं तो सोशल मीडिया को क्यों नहीं?
  • अगर ट्राई की मानें तो सोशल मीडिया की इस पर कोई जवाबदेही नहीं होगी। सिर्फ इतना कहा जाएगा कि सामग्री हटा लीजिए। इतने पर जवाबदेही भी खत्म हो जाएगी। जब कानूनों ने भी सोशल मीडिया को एक मीडिया मान लिया है तो इसका रेगुलेशन भी होना ही चाहिए।
  • ट्राई की सिफारिशों ने मोबाइल ऑपरेटरों के ग्रुप सीओएआई यानी सेलुलर ऑपरेटर एसोसिएशन ऑफ इंडिया को नाराज कर दिया है। उसका कहना है कि यह तो बराबरी नहीं हुई। ओटीटी सेवाएं इस तरह के रेगुलेशन न होने पर राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बनी रहेंगी।
  • सीओएआई के डीजी एसपी कोचर का कहना है कि दूरसंचार कंपनियों को सख्त रेगुलेटरी और लाइसेंसिंग फ्रेमवर्क में बांधा गया है। यह ओटीटी सेवाएं दूरसंचार सेवाओं का स्थान ले सकती हैं तो इन्हें रेगुलेशन में क्यों नहीं बांधा गया है। यह दूरसंचार कंपनियों के साथ अच्छा नहीं है।

रेगुलेशन पर इन कंपनियों का क्या कहना है?

  • नैस्कॉम, यूएस-इंडिया बिजनेस काउंसिल जैसे डिजिटल ऐप्लिकेशन प्रोवाइडर ओटीटी के लिए किसी भी तरह के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के खिलाफ हैं। ओटीटी कंपनियों का दावा है कि उनकी सेवाएं मोबाइल ऑपरेटर्स से अलग हैं। कम्युनिकेशन के लिए कोई डेडिकेटेड एंड-टू-एंड चैनल नहीं है।
  • वॉट्सऐप का कहना था कि यदि ट्रेसेबिलिटी का फीचर विकसित किया तो यह एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन को कमजोर करेगा। वॉट्सऐप के प्राइवेट नेचर को भी प्रभावित करेगा। गंभीर दुरुपयोग की संभावना बढ़ जाएगी। हम प्राइवेसी प्रोटेक्शन को कमजोर नहीं करना चाहते।

क्या मोबाइल कंपनियों को ओटीटी सर्विसेस की वजह से नुकसान हो रहा है?

  • लगता तो नहीं है। 5-6 साल पहले टेलीकॉम ऑपरेटर्स ने मांग उठाई थी कि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को 'वन सर्विस, वन रूल' के तहत रेगुलेटरी फ्रेमवर्क में लाना चाहिए। उस समय वॉट्सऐप, फेसबुक, स्काइप से कॉल करना फ्री था और इसका नुकसान टेलीकॉम ऑपरेटर्स को होता था।
  • हालांकि, अब समय बदल गया है। उस समय डेटा 50 रुपए प्रति जीबी था और वॉयस व मैसेज सर्विस के पैसे वसूले जाते थे। जियो के आने के बाद डेटा 3-5 रुपए प्रति जीबी हो गया है। टेलीकॉम कंपनियां भी कॉलिंग सेवाएं लगभग मुफ्त ही कर चुकी हैं। मैसेज भी फ्री ही हैं।

हैकर्स ऐसे हैक कर रहे हैं WhatsApp अकाउंट, ऐसे करें बचाव

हैकर्स ऐसे हैक कर रहे हैं WhatsApp अकाउंट, ऐसे करें बचाव

Whatsapp दुनिया भर में सबसे ज्यादा इस्तेमार किया जाने वाला मैसेजिंग ऐप है। लेकिन इसे सावधानी से इस्तेमाल ना किया जाए तो ये आपकी सभी निजी जानकारी लीक कर सकता है। अगर आप इसको सावधानी से इस्तेमाल नहीं कर पा रहे तो आपको इसकी ज़रूरत है।

हैकर्स और स्कैमर्स इस ऐप में नज़रें गड़ाए बैठे रहते हैं। जिसके लिए ओटीपी (OTP) का सहारा लेते हैं। इसके बाद आपके स्मार्टफ़ोन में मौजूद सभी जानकारी मिनटों में निकाल लेते हैं।आइए जानते हैं क्या है ओटीपी (OTP) और कैसे इससे बचा जाए..

व्हाट्सएप ओटीपी स्कैम क्या होता है ?
अगर आपने नया स्‍मार्टफोन में अपने रजिस्टर्ड नंबर से व्हाट्सऐप पर अकाउंट बनाने के लिए कंपनी आपको एक ओटीपी भेजती हैं । ओटीपी को एंटर करने के दौरान आपको दो बैटन का ध्यान रखना है। पहले की ओटीपी मंगाने के लिए अपना रजिस्टर्ड फोन नंबर दर्ज करना होता है और दूसरा कंपनी आपको बिना मांगे कभी कोई ओटीपी नहीं भेजेगी।

ये बेहद ही बुरी खबर है कि हैकर्स और स्कैमर्स ओटीपी के जरिये के ज़रिए आपके फ़ोन से डाटा उड़ा सकती हैं। ये चलांक हैकर्स किसी को भी मिनटों में अपना शिकार बना लेने हैं और सामने वाले को खबर तक नहीं होती। ये आपके दोस्त या रिश्तेदार बनकर संपर्क करते हैं। फिर कहते हैं कि उनका अकाउंट बंद हो गया है। उन्हें आपकी मदद की जरूरत है।

हैकर्स ऐसे मांगते है OTP
हैकर्स किसी तरह आपको यकीन दिलाता है कि वह आपका शुभ चिन्तक है। किसी तरह वो आपके फ़ोन पर एक OTP शेयर करता है , जिसे आपको उन्हें शेयर करना होगा। फिर आपके रजिस्टर्ड फोन पर एक और ओटीपी आएगा। फिर हैकर आपको इस OTP कोशारे करने को बोलेगा ओटीपी शेयर करते ही whatsapp अकाउंट लॉगआउट हो जाएगा। अब आपका व्‍हाट्सऐप अकाउंट किसी दूसरे डिवाइस पर इस्तेमाल किया जा रहा होगा।

फंसने पर ऐसा करें
अगर ऐसी मुश्किल में फंस जाए तो क्या करना चाहिए ? सबसे पहले तो व्हाट्सऐप अकाउंट को रीसेट करें। जिसके बाद फिर लॉगइन करें. इसके लिए अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर एंटर करना होगा। जिसके बाद आपके पास OTP आएगा। इस ओटीपी से आप अपने व्हाट्सऐप अकाउंट को दोबारा लॉगइन कर सकेंगे। इससे हैकर्स या स्‍कैमर्स के फोन में आपके मोबाइल नंबर से इस्तेमाल हो रहा व्हाट्सऐप अकाउंट बंद हो जाएगा।

ओटीपी स्कैम से ऐसे बचें
Whatsapp स्कैम से बचने के लिए ध्यान रखें कि जब तक आप Whatsapp से OTP नहीं मंगाएंगे, तब तक कंपनी आपको OTP नहीं भेजती हैं। अगर ऐसे में आपको कोई OTP नंबर भेजा गया है तो उसे नज़रंदाज़ करें।


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