अफगानिस्तान में आइएस और अलकायदा आतंकियों पर दबाव बनाए रखेगा अमेरिका

अफगानिस्तान में आइएस और अलकायदा आतंकियों पर दबाव बनाए रखेगा अमेरिका

अमेरिकी मध्‍य कमांड के कमांडर केनेथ मैकेंजी (Kenneth McKenzie) का कहना है कि अमेरिका अफगानिस्तान में इस्लामिक स्टेट (Islamic State, IS) और अलकायदा आतंकी समूहों पर दबाव बनाए रखने की कोशिश करेगा। उन्होंने कहा कि यह काम मुझे दिया गया है। मैं अभी रक्षा सचिव के साथ कुछ योजनाओं पर चर्चा कर रहा हूं। यह काम बहुत मुश्किल होगा लेकिन हम इसे करेंगे।

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि तालिबान अफगानिस्तान पर नियंत्रण पाने के लिए तैयार है। इस रिपोर्ट पर मैकेंजी ने कहा कि हम अभी भी अफगान सेना का समर्थन करने का इरादा रखते हैं। हम अभी भी उन्हें धन के साथ समर्थन करने जा रहे हैं। कुछ चीजें देश से बाहर आ जाएंगी जिन पर काम किया जाएगा। यह पूछे जाने पर कि क्या काबुल जैसे बड़े शहरों पर आतंकियों के हावी होने पर अमेरिका अफगान बलों की कोई मदद करेगा...


इस सवाल पर मैकेंजी ने कहा कि यह नीतिगत निर्णय है। अभी हम जो करने की योजना बना रहे हैं। उसमें अल कायदा और आईएस पर दबाव बनाए रखना है। यही वह होगा जो हम अफगानिस्तान में वापस जाकर करेंगे। शीर्ष अमेरिकी अधिकारी की टिप्पणी ऐसे वक्‍त में आई है जब तालिबान ने अमेरिकी एवं अन्य नाटो सैनिकों की वापसी के बाद से प्रांतीय राजधानियों, जिलों, ठिकानों और चौकियों पर हमले तेज कर दिए हैं।

उल्‍लेखनीय है कि पहली मई के बाद से अब तक कम से कम 15 जिले तालिबान के हाथ में आ गए हैं। इससे हजारों अफगान लोग विस्थापित हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि तालिबान पिछले एक साल में पांच जिलों पर कब्जा करने में सक्षम था। इनमें से चार जिलों पर कई दिनों के भीतर सरकार ने कब्जा कर लिया था। बता दें कि 11 सितंबर तक अंतरराष्ट्रीय सैनिकों की वापसी पूरी होनी है।


भारत-चीन: 12वें दौर की बातचीत भले ही नौ घंटे चली हो, लेकिन...

भारत-चीन: 12वें दौर की बातचीत भले ही नौ घंटे चली हो, लेकिन...

भारत और चाइना के सैन्य कमांडरों ने पूर्वी लद्दाख में जारी गतिरोध को समाप्त करने के लिए 12 वें दौर की बातचीत की. बातचीत कोई नौ घंटे चली लेकिन इसके नतीजे अनुमान के अनुरूप ही आए. सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक दोनों राष्ट्रों के सैन्य कमांडरों के बीच में सीमा क्षेत्र में तनाव घटाने, एकतरफा सैन्य कार्रवाई या एक दूसरे को उकसाने जैसी कार्रवाई से बचने के तरीकों पर सहमति बनी है, लेकिन गोगरा पोस्ट और हॉटस्प्रिंग समेत भारतीय चिंताओं वाले इलाके से अपनी फौज को पीछे ले जाने पर चाइना की तरफ से कोई आश्वासन नहीं मिला. विदेश मंत्रालय के ऑफिसरों को भी वैसे अभी इस मामले का सीधा निवारण नहीं दिखाई दे रहा है.


हॉटस्प्रिंग, गोगरा पोस्ट समेत अन्य स्थानों से चीनी सुरक्षा बलों की वापसी को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 14 जुलाई को अपने चाइना के समकक्ष वांग यी से चिंताओं का  साझा किया था. विदेश मंत्री ने दोनों राष्ट्रों के विदेश मंत्रियों के बीच में विसैन्यीकरण को लेकर पहली बनी सहमति का भी हवाला दिया था और कम्पलेन दर्ज कराते हुए अभी तरक पूर्ण विसैन्यीकरण न हो पाने का उल्लेख किया था. दोनों विदेश मंत्रियों के बीच में यह बातचीत संघाई योगदान संगठन के विदेश मंत्रियों की मीटिंग से इतर दुशांबे में हुई थी. विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में हिंदुस्तान की विसैन्यीकरण को लेकर चिंताओं को प्रमुखता से रेखांकित किया गया था.

 लेकिन चाइना के विदेश मंत्री वांग यी ने दे दी नसीहत
विदेश मंत्री एस जयशंकर के बयान के अंश को विदेश मंत्रालय द्वारा जारी करने के बाद चीनी दूतावास ने विदेश मंत्री वांग यी के वार्ता के अंश को जारी किया. वांग यी इसमें हिंदुस्तान को नसीहत देते दिखाई दे रहे हैं. उन्होंने अपने बयान में हिंदुस्तान को संबंध को सामान्य बनाने की नसीहत दे दी है. वांग यी ने अपने बयान में साफ बोला कि पिछले वर्ष भारत-चीन सीमा क्षेत्र में जो कुछ हुआ उसके अधिकार और गलतियां बहुत स्पष्ट हैं और जिम्मेदारी चीनी पक्ष की नहीं है. चाइना ने मामले के निवारण के लिए वार्ता के माध्यम से निवारण पर सहमति जताई, लेकिन विसैन्यीकरण के मामले पर विदेश मंत्री टाल मटोल करते नजर आए. इसके बजाय वह दोनों राष्ट्रों के द्विपक्षीय संबंधों में सुधार, विस्तार पर जोर देते रहे. उन्होंने बोला कि दोनों राष्ट्रों के बीच में द्विपक्षीय संबंध निचले स्तर हैं. इस दिशा में सार्थक प्रयासों की जरूरत है.

पेंचीदगियां बढ़ रही हैं, चाइना चल रहा चाल
विदेश मामलों के जानकार रंजीत कुमार कहते हैं कि मुख्य मामला तो हॉट स्प्रिंग और गोगरा पोस्ट से चाइना के  सुरक्षा बलों के पीछे जाने का है. लेकिन यह नहीं बोला जा सकता कि आगे क्या होगा और कब होगा? रंजीत कुमार कहते हैं कि पेंचीदगियां बढ़ रही हैं.पूर्व विदेश सचिव शशांक का भी बोलना है कि चाइना अब विसैन्यीकरण के मामले को टाल रहा है. विदेश मंत्रालय के एक संयुक्त सचिव कहते हैं कि वार्ता सकारात्मक माहौल में हो रही है. दोनों देश सीमा पर शांति, सौहार्द बनाए रखने के तरीका कर रहे हैं. वह कहते हैं कि केस कुछ तकनीकी होता जा रहा है, लेकिन उन्हें भरोसा है कि वार्ता से इसका निवारण निकल आएगा. सूत्र का बोलना है कि हिंदुस्तान और चाइना के तमाम आर्थिक, सियासी हित जुड़े हैं. इसलिए आशा है कि जल्द ही इसका निवारण निकल आएगा.