म्यांमार के काया क्षेत्र में युद्ध विराम, संयुक्त राष्ट्र ने किया हस्तक्षेप, करीब एक लाख लोगों को पहुंचा था नुकसान

म्यांमार के काया क्षेत्र में युद्ध विराम, संयुक्त राष्ट्र ने किया हस्तक्षेप, करीब एक लाख लोगों को पहुंचा था नुकसान

इसी साल फरवरी में सैन्य तख़्तापलट के बाद से म्यांमार के हालात अस्थिर हो गए है। सत्ता पर सेना के काबिज होने के बाद हर दिन हिंसा और झड़प की घटनाएं होती रहती हैं। जिससे वहां के नागरिकों का जीना मुश्किल हो गया है। इसी बीच म्यांमार के संघर्षग्रस्त राज्य काया में स्थानीय समुदाय के अपील के बाद मिलिशिया समूह ने मंगलवार को युद्ध विराम की घोषणा कर दी। इससे पहले संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार के उच्चायुक्त मिशेल बाचेलेट ने मिलिशिया समूह पर सैन्य द्वारा इस्तेमाल भारी हथियार का विरोध किया। स्थानीय नागरिकों के अनुसार इस संघर्ष से 100,000 लोगो के घरों को नुकसान और विस्थापन के दर्द का सामना करना पड़ा।

बीतें कुछ हफ्तों में कई नागरिक मिलिशिया का गठन हुआ जो फरवरी में हुए सैन्य तख्तापलट का विरोध करते नजर आ रहे हैं। उन्हीं में से एक समूह करेनी नेशनल डिफेंस फोर्स (केएनडीएफ) है। इस समूह ने कहा कि उसने अस्थायी रूप इसपर रोक लगा दिया है लेकिन सैन्य अधिग्रहण का विरोध जारी रहेगा। इसके अलावा केएनडीएफ ने लोगों से एकजुट होने का आग्रह भी किया।


जहां एक ओर लोकतंत्र समर्थक ने जुंटा सैन्य कार्रवाई के विरोध में बलपूर्वक सामना करने के लिए एक हो रहे हैं। लेकिन कुछ कार्यकर्ताओं का कहना है कि उनके हमलों के जवाब में जिस तरह सेना ने भारी हथियारों का इस्तेमाल किया, उससे निर्दोष नागरिकों का जीवन को खतरे में पड़ गया है।

म्यांमार में तब से हलचल मची हुई है जब से सेना ने आंग सान सू की सरकार को उखाड़ फेंका था। सेना ने नवंबर के चुनाव में धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए सत्ता पर काबिज हो गए। हालांकि अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने कहा है कि मतदान निष्पक्ष हुआ था।


सेना ने एक गैरकानूनी राष्ट्रीय एकता सरकार (एनयूजी) के साथ गठबंधन करने के लिए सभी समूहों को आतंकवादी करार दिया है। देश भर में तख्तापलट के विरोध प्रदर्शनों में शामिल गिरफ्तार लोगों को रिहा करने की मांग भी शामिल है। लेकिन एनयूजी को इस अनुरोध पर अभी तक कोई जवाब नहीं आया है।


भारत-चीन: 12वें दौर की बातचीत भले ही नौ घंटे चली हो, लेकिन...

भारत-चीन: 12वें दौर की बातचीत भले ही नौ घंटे चली हो, लेकिन...

भारत और चाइना के सैन्य कमांडरों ने पूर्वी लद्दाख में जारी गतिरोध को समाप्त करने के लिए 12 वें दौर की बातचीत की. बातचीत कोई नौ घंटे चली लेकिन इसके नतीजे अनुमान के अनुरूप ही आए. सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक दोनों राष्ट्रों के सैन्य कमांडरों के बीच में सीमा क्षेत्र में तनाव घटाने, एकतरफा सैन्य कार्रवाई या एक दूसरे को उकसाने जैसी कार्रवाई से बचने के तरीकों पर सहमति बनी है, लेकिन गोगरा पोस्ट और हॉटस्प्रिंग समेत भारतीय चिंताओं वाले इलाके से अपनी फौज को पीछे ले जाने पर चाइना की तरफ से कोई आश्वासन नहीं मिला. विदेश मंत्रालय के ऑफिसरों को भी वैसे अभी इस मामले का सीधा निवारण नहीं दिखाई दे रहा है.


हॉटस्प्रिंग, गोगरा पोस्ट समेत अन्य स्थानों से चीनी सुरक्षा बलों की वापसी को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 14 जुलाई को अपने चाइना के समकक्ष वांग यी से चिंताओं का  साझा किया था. विदेश मंत्री ने दोनों राष्ट्रों के विदेश मंत्रियों के बीच में विसैन्यीकरण को लेकर पहली बनी सहमति का भी हवाला दिया था और कम्पलेन दर्ज कराते हुए अभी तरक पूर्ण विसैन्यीकरण न हो पाने का उल्लेख किया था. दोनों विदेश मंत्रियों के बीच में यह बातचीत संघाई योगदान संगठन के विदेश मंत्रियों की मीटिंग से इतर दुशांबे में हुई थी. विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में हिंदुस्तान की विसैन्यीकरण को लेकर चिंताओं को प्रमुखता से रेखांकित किया गया था.

 लेकिन चाइना के विदेश मंत्री वांग यी ने दे दी नसीहत
विदेश मंत्री एस जयशंकर के बयान के अंश को विदेश मंत्रालय द्वारा जारी करने के बाद चीनी दूतावास ने विदेश मंत्री वांग यी के वार्ता के अंश को जारी किया. वांग यी इसमें हिंदुस्तान को नसीहत देते दिखाई दे रहे हैं. उन्होंने अपने बयान में हिंदुस्तान को संबंध को सामान्य बनाने की नसीहत दे दी है. वांग यी ने अपने बयान में साफ बोला कि पिछले वर्ष भारत-चीन सीमा क्षेत्र में जो कुछ हुआ उसके अधिकार और गलतियां बहुत स्पष्ट हैं और जिम्मेदारी चीनी पक्ष की नहीं है. चाइना ने मामले के निवारण के लिए वार्ता के माध्यम से निवारण पर सहमति जताई, लेकिन विसैन्यीकरण के मामले पर विदेश मंत्री टाल मटोल करते नजर आए. इसके बजाय वह दोनों राष्ट्रों के द्विपक्षीय संबंधों में सुधार, विस्तार पर जोर देते रहे. उन्होंने बोला कि दोनों राष्ट्रों के बीच में द्विपक्षीय संबंध निचले स्तर हैं. इस दिशा में सार्थक प्रयासों की जरूरत है.

पेंचीदगियां बढ़ रही हैं, चाइना चल रहा चाल
विदेश मामलों के जानकार रंजीत कुमार कहते हैं कि मुख्य मामला तो हॉट स्प्रिंग और गोगरा पोस्ट से चाइना के  सुरक्षा बलों के पीछे जाने का है. लेकिन यह नहीं बोला जा सकता कि आगे क्या होगा और कब होगा? रंजीत कुमार कहते हैं कि पेंचीदगियां बढ़ रही हैं.पूर्व विदेश सचिव शशांक का भी बोलना है कि चाइना अब विसैन्यीकरण के मामले को टाल रहा है. विदेश मंत्रालय के एक संयुक्त सचिव कहते हैं कि वार्ता सकारात्मक माहौल में हो रही है. दोनों देश सीमा पर शांति, सौहार्द बनाए रखने के तरीका कर रहे हैं. वह कहते हैं कि केस कुछ तकनीकी होता जा रहा है, लेकिन उन्हें भरोसा है कि वार्ता से इसका निवारण निकल आएगा. सूत्र का बोलना है कि हिंदुस्तान और चाइना के तमाम आर्थिक, सियासी हित जुड़े हैं. इसलिए आशा है कि जल्द ही इसका निवारण निकल आएगा.