जरायल ने गाजा पर किए हवाई हमले, सेना ने पुष्टि कर कहा...

जरायल ने गाजा पर किए हवाई हमले, सेना ने पुष्टि कर कहा...

इजरायल ने गाजा पर हवाई हमले की बात को स्वीकार लिया है। फलीस्तीनी सुरक्षा सूत्रों के हवाले से कहा गया था कि इस्राइल द्वारा गाजा में हवाई हमला किया गया है। इसको स्वीकारते हुए इजरायली सेना ने कहा कि उसके विमान ने बुधवार तड़के गाजा पट्टी में हमास के सशस्त्र परिसरों पर हमला किया। बताया गया कि ये हमला फिलिस्तीनी क्षेत्र से आए आग लगाने वाले गुब्बारों के जवाब में था, जिसे वहां पनाह लिए आतंकवादियों ने भेजा था। सेना के मुताबिक, इन गुब्बारे बमों के कारण दक्षिणी इजरायल में कई जगहों पर आग लग गई।

एक बयान में, सेना ने कहा, 'वह सभी परिदृश्यों के लिए तैयार है, जिसमें गाजा से जारी आतंकवादी कृत्यों का सामना करने के लिए नए सिरे से लड़ाई शामिल है।' बता दें कि 21 मई के बाद अब एक बार दोबारा हवाई हमले और गुब्बारों बम इजरायल और गाजा के बीच अब दोबारा चिंगारी भड़क उठी है। 21 मई को युद्धविराम हो गया था, जो 11 दिनों के भीषण युद्ध के बाद समाप्त हुआ, जिसमें 260 फिलिस्तीनी मारे गए थे और 13 इजरायल के लोग मारे गए थे।

जिस यरूशलम की आग कई दिनों तक इजरायल और गाजा के बीच लगी रही, वहीं से अब दोबारा हिंसा भड़कने का खतरा पैदा हो गया। बता दें कि सैकड़ों की संख्या में इजरायल के धुर राष्ट्रवादियों ने ताकत का प्रदर्शन करने के लिए मंगलवार को पूर्वी यरूशलम में परेड की। इस घटनाक्रम से गाजा पट्टी में हमास आतंकवादियों के साथ युद्ध के महज कुछ ही सप्ताह बाद नहीं परेशानी खड़ी हो गई है। इसके बाद गाजा में फलस्तीनियों ने गुब्बारे छोड़ कर इसका जवाब दिया था और कहा था कि यह मार्च उकसावे वाली हरकत है। सनद रहे दो दिन पहले ही इस्रायल में नेफ्टाली बेनेट के नेतृत्व में गठबंधन सरकार का गठन हुआ है। 


भारत-चीन: 12वें दौर की बातचीत भले ही नौ घंटे चली हो, लेकिन...

भारत-चीन: 12वें दौर की बातचीत भले ही नौ घंटे चली हो, लेकिन...

भारत और चाइना के सैन्य कमांडरों ने पूर्वी लद्दाख में जारी गतिरोध को समाप्त करने के लिए 12 वें दौर की बातचीत की. बातचीत कोई नौ घंटे चली लेकिन इसके नतीजे अनुमान के अनुरूप ही आए. सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक दोनों राष्ट्रों के सैन्य कमांडरों के बीच में सीमा क्षेत्र में तनाव घटाने, एकतरफा सैन्य कार्रवाई या एक दूसरे को उकसाने जैसी कार्रवाई से बचने के तरीकों पर सहमति बनी है, लेकिन गोगरा पोस्ट और हॉटस्प्रिंग समेत भारतीय चिंताओं वाले इलाके से अपनी फौज को पीछे ले जाने पर चाइना की तरफ से कोई आश्वासन नहीं मिला. विदेश मंत्रालय के ऑफिसरों को भी वैसे अभी इस मामले का सीधा निवारण नहीं दिखाई दे रहा है.


हॉटस्प्रिंग, गोगरा पोस्ट समेत अन्य स्थानों से चीनी सुरक्षा बलों की वापसी को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 14 जुलाई को अपने चाइना के समकक्ष वांग यी से चिंताओं का  साझा किया था. विदेश मंत्री ने दोनों राष्ट्रों के विदेश मंत्रियों के बीच में विसैन्यीकरण को लेकर पहली बनी सहमति का भी हवाला दिया था और कम्पलेन दर्ज कराते हुए अभी तरक पूर्ण विसैन्यीकरण न हो पाने का उल्लेख किया था. दोनों विदेश मंत्रियों के बीच में यह बातचीत संघाई योगदान संगठन के विदेश मंत्रियों की मीटिंग से इतर दुशांबे में हुई थी. विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में हिंदुस्तान की विसैन्यीकरण को लेकर चिंताओं को प्रमुखता से रेखांकित किया गया था.

 लेकिन चाइना के विदेश मंत्री वांग यी ने दे दी नसीहत
विदेश मंत्री एस जयशंकर के बयान के अंश को विदेश मंत्रालय द्वारा जारी करने के बाद चीनी दूतावास ने विदेश मंत्री वांग यी के वार्ता के अंश को जारी किया. वांग यी इसमें हिंदुस्तान को नसीहत देते दिखाई दे रहे हैं. उन्होंने अपने बयान में हिंदुस्तान को संबंध को सामान्य बनाने की नसीहत दे दी है. वांग यी ने अपने बयान में साफ बोला कि पिछले वर्ष भारत-चीन सीमा क्षेत्र में जो कुछ हुआ उसके अधिकार और गलतियां बहुत स्पष्ट हैं और जिम्मेदारी चीनी पक्ष की नहीं है. चाइना ने मामले के निवारण के लिए वार्ता के माध्यम से निवारण पर सहमति जताई, लेकिन विसैन्यीकरण के मामले पर विदेश मंत्री टाल मटोल करते नजर आए. इसके बजाय वह दोनों राष्ट्रों के द्विपक्षीय संबंधों में सुधार, विस्तार पर जोर देते रहे. उन्होंने बोला कि दोनों राष्ट्रों के बीच में द्विपक्षीय संबंध निचले स्तर हैं. इस दिशा में सार्थक प्रयासों की जरूरत है.

पेंचीदगियां बढ़ रही हैं, चाइना चल रहा चाल
विदेश मामलों के जानकार रंजीत कुमार कहते हैं कि मुख्य मामला तो हॉट स्प्रिंग और गोगरा पोस्ट से चाइना के  सुरक्षा बलों के पीछे जाने का है. लेकिन यह नहीं बोला जा सकता कि आगे क्या होगा और कब होगा? रंजीत कुमार कहते हैं कि पेंचीदगियां बढ़ रही हैं.पूर्व विदेश सचिव शशांक का भी बोलना है कि चाइना अब विसैन्यीकरण के मामले को टाल रहा है. विदेश मंत्रालय के एक संयुक्त सचिव कहते हैं कि वार्ता सकारात्मक माहौल में हो रही है. दोनों देश सीमा पर शांति, सौहार्द बनाए रखने के तरीका कर रहे हैं. वह कहते हैं कि केस कुछ तकनीकी होता जा रहा है, लेकिन उन्हें भरोसा है कि वार्ता से इसका निवारण निकल आएगा. सूत्र का बोलना है कि हिंदुस्तान और चाइना के तमाम आर्थिक, सियासी हित जुड़े हैं. इसलिए आशा है कि जल्द ही इसका निवारण निकल आएगा.