आर्मी कैंप में आत्मघाती हमला, 15 की मौत, बढ़ सकता है मौतों का आंकड़ा

आर्मी कैंप में आत्मघाती हमला, 15 की मौत, बढ़ सकता है मौतों का आंकड़ा

सोमालिया आर्मी कैंप में आज आत्मघाती हमला हआ जिसमें 15 लोगों की मौत हो गई। घटना के बारे में जानकारी देते हुए एक अधिकारी मोहम्मद आदन (Mohamed Adan) ने बताया कि मंगलवार को मोगादिशु ( Mogadishu) के मिलिट्री ट्रेनिंग कैंप में आत्मघाती विस्फोट में करीब 15 जानें चली गई।

शिन्हुआ न्यूज एजेंसी के अनुसार, इस आत्मघाती हमले में 15 सैनिकों की मौत हुई और दर्जनों घायल हैं। नाम न बताने की शर्त पर एक पुलिस अधिकारी ने न्यूज एजेंसी को बताया कि जनरल धागोबदन मिलिट्री ट्रेनिंग कैंप में घुसकर शख्स ने खुद को उड़ा दिया। अधिकारी ने बताया,'मौतों का आंकड़ा बढ़ सकता है। अब तक हमले में 15 जवानों के मरने की जानकारी है।' इस हमले की जिम्मेवारी अब तक किसी ने नहीं ली है।

प्रत्यक्षदशियों ने बताया कि घायलों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया। इब्राहिम अहमद नामक एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया, मैंने मदिना अस्पताल में कई एंबुलेंस को जाते देखा जिसमें घटनास्थलों से घायलों को इलाज के लिए लाया गया।' लेकिन आतंकी गुट अल शबाब (al-Shabab) आमतौर पर ऐसे हमलों के पीछे होता है।


 उल्लेखनीय है कि आज ही दक्षिणी सोमालिया में जारी सुरक्षा ऑपरेशन के तहत अल शबाब के 6 आतंकियों को ढेर कर दिया गया। सोमाली नेशनल आर्मी (SNA) के कमांडरों ने बताया कि सोमवार को अल शबाब के 6 लड़ाकों को मौत के घाट उतारने में कामयाबी मिली। आर्मी को पता चला था कि ये आतंकी अवधीगले (Awdhigle) और एफगोए (Afgoye) के बीच खेतों में छिपे हैं।

सोमालिया के होटलों व सिक्योरिटी चेकप्वाइंट्स पर आमतौर पर हमले होते रहते हैं। 2019 के दिसंबर में यहां सिटीसेंटर में एक चेकप्वाइंट पर कार के जरिए विस्फोट किया गया था।


भारत-चीन: 12वें दौर की बातचीत भले ही नौ घंटे चली हो, लेकिन...

भारत-चीन: 12वें दौर की बातचीत भले ही नौ घंटे चली हो, लेकिन...

भारत और चाइना के सैन्य कमांडरों ने पूर्वी लद्दाख में जारी गतिरोध को समाप्त करने के लिए 12 वें दौर की बातचीत की. बातचीत कोई नौ घंटे चली लेकिन इसके नतीजे अनुमान के अनुरूप ही आए. सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक दोनों राष्ट्रों के सैन्य कमांडरों के बीच में सीमा क्षेत्र में तनाव घटाने, एकतरफा सैन्य कार्रवाई या एक दूसरे को उकसाने जैसी कार्रवाई से बचने के तरीकों पर सहमति बनी है, लेकिन गोगरा पोस्ट और हॉटस्प्रिंग समेत भारतीय चिंताओं वाले इलाके से अपनी फौज को पीछे ले जाने पर चाइना की तरफ से कोई आश्वासन नहीं मिला. विदेश मंत्रालय के ऑफिसरों को भी वैसे अभी इस मामले का सीधा निवारण नहीं दिखाई दे रहा है.


हॉटस्प्रिंग, गोगरा पोस्ट समेत अन्य स्थानों से चीनी सुरक्षा बलों की वापसी को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 14 जुलाई को अपने चाइना के समकक्ष वांग यी से चिंताओं का  साझा किया था. विदेश मंत्री ने दोनों राष्ट्रों के विदेश मंत्रियों के बीच में विसैन्यीकरण को लेकर पहली बनी सहमति का भी हवाला दिया था और कम्पलेन दर्ज कराते हुए अभी तरक पूर्ण विसैन्यीकरण न हो पाने का उल्लेख किया था. दोनों विदेश मंत्रियों के बीच में यह बातचीत संघाई योगदान संगठन के विदेश मंत्रियों की मीटिंग से इतर दुशांबे में हुई थी. विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में हिंदुस्तान की विसैन्यीकरण को लेकर चिंताओं को प्रमुखता से रेखांकित किया गया था.

 लेकिन चाइना के विदेश मंत्री वांग यी ने दे दी नसीहत
विदेश मंत्री एस जयशंकर के बयान के अंश को विदेश मंत्रालय द्वारा जारी करने के बाद चीनी दूतावास ने विदेश मंत्री वांग यी के वार्ता के अंश को जारी किया. वांग यी इसमें हिंदुस्तान को नसीहत देते दिखाई दे रहे हैं. उन्होंने अपने बयान में हिंदुस्तान को संबंध को सामान्य बनाने की नसीहत दे दी है. वांग यी ने अपने बयान में साफ बोला कि पिछले वर्ष भारत-चीन सीमा क्षेत्र में जो कुछ हुआ उसके अधिकार और गलतियां बहुत स्पष्ट हैं और जिम्मेदारी चीनी पक्ष की नहीं है. चाइना ने मामले के निवारण के लिए वार्ता के माध्यम से निवारण पर सहमति जताई, लेकिन विसैन्यीकरण के मामले पर विदेश मंत्री टाल मटोल करते नजर आए. इसके बजाय वह दोनों राष्ट्रों के द्विपक्षीय संबंधों में सुधार, विस्तार पर जोर देते रहे. उन्होंने बोला कि दोनों राष्ट्रों के बीच में द्विपक्षीय संबंध निचले स्तर हैं. इस दिशा में सार्थक प्रयासों की जरूरत है.

पेंचीदगियां बढ़ रही हैं, चाइना चल रहा चाल
विदेश मामलों के जानकार रंजीत कुमार कहते हैं कि मुख्य मामला तो हॉट स्प्रिंग और गोगरा पोस्ट से चाइना के  सुरक्षा बलों के पीछे जाने का है. लेकिन यह नहीं बोला जा सकता कि आगे क्या होगा और कब होगा? रंजीत कुमार कहते हैं कि पेंचीदगियां बढ़ रही हैं.पूर्व विदेश सचिव शशांक का भी बोलना है कि चाइना अब विसैन्यीकरण के मामले को टाल रहा है. विदेश मंत्रालय के एक संयुक्त सचिव कहते हैं कि वार्ता सकारात्मक माहौल में हो रही है. दोनों देश सीमा पर शांति, सौहार्द बनाए रखने के तरीका कर रहे हैं. वह कहते हैं कि केस कुछ तकनीकी होता जा रहा है, लेकिन उन्हें भरोसा है कि वार्ता से इसका निवारण निकल आएगा. सूत्र का बोलना है कि हिंदुस्तान और चाइना के तमाम आर्थिक, सियासी हित जुड़े हैं. इसलिए आशा है कि जल्द ही इसका निवारण निकल आएगा.