ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में कोरोना वायरस के प्रकोप के बावजूद लोगों को शहर छोड़ने की मिली अनुमति

ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में कोरोना वायरस के प्रकोप के बावजूद लोगों को शहर छोड़ने की मिली अनुमति

ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न शहर ने कोरोना वायरस के भयंकर प्रकोप के बावजूद लोगों को शहर छोड़ने की अनुमति दे दी है। कोरोना प्रकोप के खिलाफ लड़ाई के बावजूद ऑस्ट्रेलिया का दूसरा सबसे बड़ा शहर अपने 50 लाख निवासियों को घर से 25 किलोमीटर (15 मील) से अधिक की यात्रा करने की अनुमति देगा और बाहर पहनने वाले अनिवार्य मास्क को समाप्त कर देगा। मेलबर्न पिछले सप्ताह के अंत में दो सप्ताह के कठिन लॉकडाउन से बाहर आया है। कोरोना महामारी शुरू होने के बाद से ये इसका चौथा प्रकोप था। जहां 24 मई से लगभग 100 मामले देखे गए हैं।

विक्टोरिया राज्य के कार्यवाहक प्रीमियर जेम्स मर्लिनो ने बुधवार को संवाददाताओं से कहा कि विक्टोरिया अपने सबसे अच्छे समय में होता है जब हम सब एक साथ होते हैं। राज्य कल रात से एक साथ वापस आ जाएगा। हालांकि एक आवासीय टाउनहाउस परिसर में एक ताजा क्लस्टर से जुड़े मामले बुधवार को थोड़े बढ़े, मेलबर्न धीरे-धीरे प्रतिबंधों में ढील देगा।

सार्वजनिक समारोहों में लोगों की संख्या को बढ़ाकर 20 लोगों तक किया जाएगा, जबकि घरेलू समारोहों पर प्रतिबंध हटा दिया जाएगा। मेलबर्न में जिम खुल सकते हैं, लेकिन उन्हें सख्त नियमों का पालन करना चाहिए और सैलून सेवाएं सेवा के दौरान बिना मास्क के चल सकती हैं।

विक्टोरिया ने बुधवार को पांच नए स्थानीय मामले दर्ज किए, जो सभी टाउनहाउस क्लस्टर से जुड़े थे, जिससे वहां कुल संक्रमण आठ हो गए। बुधवार के आंकड़ों में मंगलवार को घोषित दो मामले शामिल हैं जो मध्यरात्रि कट-ऑफ की समय सीमा के बाद दर्ज किए गए थे। अधिकारियों ने माना कि नए मामले सामुदायिक प्रसार के कम जोखिम वाले हैं क्योंकि सभी मौजूदा प्रकोप से जुड़े हुए हैं, लेकिन लोगों को सामाजिक दूरी के नियमों का सख्ती से पालन करने की चेतावनी दी।

स्विफ्ट कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग, स्नैप लॉकडाउन और सख्त सामाजिक दूर करने के उपायों ने ऑस्ट्रेलिया को पहले के प्रकोपों ​​​​का सफलतापूर्वक मुकाबला करने में मदद की है और केवल 30,300 मामलों और 110 मौतों के साथ अपने कोरोना संख्या को अपेक्षाकृत कम रखा है।


भारत-चीन: 12वें दौर की बातचीत भले ही नौ घंटे चली हो, लेकिन...

भारत-चीन: 12वें दौर की बातचीत भले ही नौ घंटे चली हो, लेकिन...

भारत और चाइना के सैन्य कमांडरों ने पूर्वी लद्दाख में जारी गतिरोध को समाप्त करने के लिए 12 वें दौर की बातचीत की. बातचीत कोई नौ घंटे चली लेकिन इसके नतीजे अनुमान के अनुरूप ही आए. सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक दोनों राष्ट्रों के सैन्य कमांडरों के बीच में सीमा क्षेत्र में तनाव घटाने, एकतरफा सैन्य कार्रवाई या एक दूसरे को उकसाने जैसी कार्रवाई से बचने के तरीकों पर सहमति बनी है, लेकिन गोगरा पोस्ट और हॉटस्प्रिंग समेत भारतीय चिंताओं वाले इलाके से अपनी फौज को पीछे ले जाने पर चाइना की तरफ से कोई आश्वासन नहीं मिला. विदेश मंत्रालय के ऑफिसरों को भी वैसे अभी इस मामले का सीधा निवारण नहीं दिखाई दे रहा है.


हॉटस्प्रिंग, गोगरा पोस्ट समेत अन्य स्थानों से चीनी सुरक्षा बलों की वापसी को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 14 जुलाई को अपने चाइना के समकक्ष वांग यी से चिंताओं का  साझा किया था. विदेश मंत्री ने दोनों राष्ट्रों के विदेश मंत्रियों के बीच में विसैन्यीकरण को लेकर पहली बनी सहमति का भी हवाला दिया था और कम्पलेन दर्ज कराते हुए अभी तरक पूर्ण विसैन्यीकरण न हो पाने का उल्लेख किया था. दोनों विदेश मंत्रियों के बीच में यह बातचीत संघाई योगदान संगठन के विदेश मंत्रियों की मीटिंग से इतर दुशांबे में हुई थी. विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में हिंदुस्तान की विसैन्यीकरण को लेकर चिंताओं को प्रमुखता से रेखांकित किया गया था.

 लेकिन चाइना के विदेश मंत्री वांग यी ने दे दी नसीहत
विदेश मंत्री एस जयशंकर के बयान के अंश को विदेश मंत्रालय द्वारा जारी करने के बाद चीनी दूतावास ने विदेश मंत्री वांग यी के वार्ता के अंश को जारी किया. वांग यी इसमें हिंदुस्तान को नसीहत देते दिखाई दे रहे हैं. उन्होंने अपने बयान में हिंदुस्तान को संबंध को सामान्य बनाने की नसीहत दे दी है. वांग यी ने अपने बयान में साफ बोला कि पिछले वर्ष भारत-चीन सीमा क्षेत्र में जो कुछ हुआ उसके अधिकार और गलतियां बहुत स्पष्ट हैं और जिम्मेदारी चीनी पक्ष की नहीं है. चाइना ने मामले के निवारण के लिए वार्ता के माध्यम से निवारण पर सहमति जताई, लेकिन विसैन्यीकरण के मामले पर विदेश मंत्री टाल मटोल करते नजर आए. इसके बजाय वह दोनों राष्ट्रों के द्विपक्षीय संबंधों में सुधार, विस्तार पर जोर देते रहे. उन्होंने बोला कि दोनों राष्ट्रों के बीच में द्विपक्षीय संबंध निचले स्तर हैं. इस दिशा में सार्थक प्रयासों की जरूरत है.

पेंचीदगियां बढ़ रही हैं, चाइना चल रहा चाल
विदेश मामलों के जानकार रंजीत कुमार कहते हैं कि मुख्य मामला तो हॉट स्प्रिंग और गोगरा पोस्ट से चाइना के  सुरक्षा बलों के पीछे जाने का है. लेकिन यह नहीं बोला जा सकता कि आगे क्या होगा और कब होगा? रंजीत कुमार कहते हैं कि पेंचीदगियां बढ़ रही हैं.पूर्व विदेश सचिव शशांक का भी बोलना है कि चाइना अब विसैन्यीकरण के मामले को टाल रहा है. विदेश मंत्रालय के एक संयुक्त सचिव कहते हैं कि वार्ता सकारात्मक माहौल में हो रही है. दोनों देश सीमा पर शांति, सौहार्द बनाए रखने के तरीका कर रहे हैं. वह कहते हैं कि केस कुछ तकनीकी होता जा रहा है, लेकिन उन्हें भरोसा है कि वार्ता से इसका निवारण निकल आएगा. सूत्र का बोलना है कि हिंदुस्तान और चाइना के तमाम आर्थिक, सियासी हित जुड़े हैं. इसलिए आशा है कि जल्द ही इसका निवारण निकल आएगा.