पाकिस्तान उपलब्ध कराएगा जीवन रक्षक दवाएं, गंभीर मानवीय संकट का सामना कर अफगानिस्तान

पाकिस्तान उपलब्ध कराएगा जीवन रक्षक दवाएं, गंभीर मानवीय संकट का सामना कर अफगानिस्तान

अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद से ही गंभीर मानवीय संकट का सामना कर रहे देश को पाकिस्तान ने जीवन रक्षक दवाएं उपलब्ध कराने पर सहमति जताई है। हाल ही में अफगान स्वास्थ्य मंत्रालय के एक प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तान का दौरा किया था, जिसमें इमरान सरकार से अफगान नागरिकों को जीवन रक्षक दवाएं आपातकालीन स्तर पर उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था।

जियो न्यूज को सूत्रों ने बताया कि अफगानिस्तान के जन स्वास्थ्य मंत्री डा कलंदर जिहाद ने एक प्रतिनिधिमंडल के साथ पाकिस्तान की हालिया यात्रा के दौरान सरकारी और गैर-सरकारी लोगों से मुलाकात की थी। तालिबान प्रतिनिधिमंडल ने जीवन रक्षक दवाओं के तत्काल प्रावधान के लिए पाकिस्तान सरकार से अनुरोध किया। इसके साथ ही अफगानिस्तान में अस्पतालों की स्थिति पर भी बात हुई, जो देश में हालिया राजनीतिक उथल-पुथल के बीच खस्ताहाल हो गए हैं।

पाकिस्तान फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (पीपीएमए) ने अफगान सरकार को जीवन रक्षक दवाओं के कई कंटेनर देने का वादा किया। संयुक्त राष्ट्र ने सितंबर में कहा था कि अफगानिस्तान की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराने के कगार पर है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख मार्टिन ग्रिफिथ्स ने कहा, 'अफगानिस्तान की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को ध्वस्त होने देना विनाशकारी होगा। देश भर में लोगों को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा जैसे आपातकालीन सीजेरियन सेक्शन और ट्रमा केयर से वंचित किया जा रहा है।

डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अदनोम घेब्येयियस ने कहा था कि अंतरराष्ट्रीय फंडिंग में हुई कटौती ने स्वास्थ्य प्रदाताओं को यह तय करने के लिए मजबूर किया है कि किसको बचाना है और किसे मरने देना है। टेड्रोस ने बताया कि देश की सबसे बड़ी स्वास्थ्य परियोजना के लिए वित्तीय सहायता की कमी ने हजारों सुविधाओं को चिकित्सा आपूर्ति खरीदने और वेतन का भुगतान करने में असमर्थ बना दिया था।


भारत-पाक बंटवारे में जुदा हुए दो भाई मिले 74 साल बाद, ऐसी रही दोनों की मुलाकात

भारत-पाक बंटवारे में जुदा हुए दो भाई मिले 74 साल बाद, ऐसी रही दोनों की मुलाकात

इस्लामाबाद फिर दो दिलों को मिलाने का जरिया बना है। इस बार कॉरिडोर के कारण 74 साल बाद दो बिछड़े भाइयों की मुलाकात हुई है। ये दोनों भाई भारत-पाकिस्तान बंटवारे के कारण एक दूसरे से अलग हो गए थे। दोनों भाईयों को पहचान मुहम्मद सिद्दीक और भारत में रहने वाले उनके भाई हबीब उर्फ शेला के नाम से हुई है।

74 साल बाद भरी आंखों के साथ मिले दोनों भाई पाकिस्तानी मीडिया एआरवॉय न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, 80 साल के मुहम्मद सिद्दीक पाकिस्तान के फैसलाबाद शहर में रहते हैं। वे बंटवारे के वक्त अपने परिवार से अलग हो गए थे। उनके भाई हबीब उर्फ शेला भारत के पंजाब में रहते हैं। करतारपुर कॉरिडोर में इतने लंबे अरसे बाद एक दूसरे को देख दोनों की आंखें भर आई और वे भावुक होकर गले मिले।

सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा वीडियो सोशल मीडिया पर इन दोनों भाइयों के मुलाकात का एक वीडियो भी शेयर किया जा रहा है। इसमें दोनों अपने-अपने रिश्तेदारों के साथ करतारपुर कॉरिडोर में दिखाई दे रहे हैं। मुलाकात के दौरान दोनों भाई एक दूसरे को भावुक होकर गले लगाते नजर आए। इस वीडियो में परिवार के अलावा गुरुद्वारा प्रबंधन के अधिकारी भी नजर आ रहे हैं।

पहले भी मिल चुके हैं दो दोस्त इससे पहले पिछले साल भी करतारपुर कॉरिडोर में दो बिछड़े दोस्त 74 साल बाद मिल पाए थे। भारत के सरदार गोपाल सिंह अपने बचपन के दोस्त अब 91 साल के मोहम्मद बशीर से 1947 में अलग हो गए थे। इस समय सरदार गोपाल सिंह की उम्र 94 साल जबकि मोहम्मद बशीर 91 साल के हो चुके हैं।

करतारपुर कॉरिडोर के बारे में जानिए भारत में पंजाब के डेरा बाबा नानक से पाक सीमा तक कॉरिडोर का निर्माण किया गया है और वहीं पाकिस्तान भी सीमा से नारोवाल जिले में गुरुद्वारे तक कॉरिडोर का निर्माण हुआ है। इसी को करतारपुर साहिब कॉरिडोर कहा गया है। करतारपुर साहिब सिखों का पवित्र तीर्थ स्थल है। यह पाकिस्तान के नारोवाल जिले में स्थित है। यह भारत के पंजाब के गुरदासपुर जिले के डेरा बाबा नानक से तीन से चार किलोमीटर दूर है और करीब लाहौर से 120 किलोमीटर दूर है। यह सिखों के प्रथम गुरु गुरुनानक देव जी का निवास स्थान था और यहीं पर उनका निधन भी हुआ था। ऐसे में सिख धर्म में इस गुरुद्वारे के दर्शन का का बहुत अधिक महत्व है।