मध्य नेपाल में बाढ़ के कहर से एक की मौत, कई लोगों के लापता होने की आशंका

मध्य नेपाल में बाढ़ के कहर से एक की मौत, कई लोगों के लापता होने की आशंका

मध्य नेपाल में बाढ़ के कहर से एक की मौत हो गई है और दर्जनों के लापता होने की आशंका है। सिंधुपालचौक के मुख्य जिला अधिकारी अरुण पोखरेल ने समाचार एजेंसी एएनआइ को बताया, हमें संदेह है कि बाढ़ मेलमची और इंद्रावती नदी के मुख्य स्रोत से उत्पन्न हुई है। अभी तक हमने केवल एक की मौत की पुष्टि की है।


बता दें कि नेपाल में लगातार बारिश हो रही है जिसके कारण यहां बाढ़ जैस स्थिति हो गई है। वहीं, इसका असर कुछ भारतीय क्षेत्रों में भी दिख रहा है। नेपाल में लागातर पानी बरसने से बिहार की गंडक नदी में पानी का स्तर काफी ज्यादा बढ़ गया है।

 
अरुण पोखरेल ने कहा, 'हमें संदेह है कि बाढ़ की स्थिति मेलमची और इंद्रावती नदी के मुख्य स्रोत से उत्पन्न हुई है। इस वजह से हेलम्बू से शुरू होने वाले गलियारों में बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई।' बुधवार तड़के स्थानीय प्रशासन के विभिन्न अधिकारियों ने नुकसान और लोगों के लापता होने की खबर की पुष्टि की है। ग्राम परिषद प्रमुख नीमा ग्यालजेन शेरपा ने बताया, 'मेरी ग्राम परिषद में ही, कल शाम से लगभग छह लोगों के लापता होने की खबरें हैं। कल देर शाम से शुरू हुआ जल स्तर किऊल और ग्यालथुम के साथ-साथ मेलमची नदी के किनारे बने घरों में पहुंच गया।'

शेरपा ने कहा, 'इसके साथ ही, बाढ़ के पुलों, बिजली और संचार के अन्य बुनियादी ढांचे के बह जाने की भी सूचना है। हम अभी भी इससे हुए नुकसान का पूरी तरह से पता नहीं लगा सके हैं।' सिंधुपालचौक 2015 के भूकंप के केंद्रों में से एक है और यहां हर साल यहां बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो जाती है।


भारत-चीन: 12वें दौर की बातचीत भले ही नौ घंटे चली हो, लेकिन...

भारत-चीन: 12वें दौर की बातचीत भले ही नौ घंटे चली हो, लेकिन...

भारत और चाइना के सैन्य कमांडरों ने पूर्वी लद्दाख में जारी गतिरोध को समाप्त करने के लिए 12 वें दौर की बातचीत की. बातचीत कोई नौ घंटे चली लेकिन इसके नतीजे अनुमान के अनुरूप ही आए. सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक दोनों राष्ट्रों के सैन्य कमांडरों के बीच में सीमा क्षेत्र में तनाव घटाने, एकतरफा सैन्य कार्रवाई या एक दूसरे को उकसाने जैसी कार्रवाई से बचने के तरीकों पर सहमति बनी है, लेकिन गोगरा पोस्ट और हॉटस्प्रिंग समेत भारतीय चिंताओं वाले इलाके से अपनी फौज को पीछे ले जाने पर चाइना की तरफ से कोई आश्वासन नहीं मिला. विदेश मंत्रालय के ऑफिसरों को भी वैसे अभी इस मामले का सीधा निवारण नहीं दिखाई दे रहा है.


हॉटस्प्रिंग, गोगरा पोस्ट समेत अन्य स्थानों से चीनी सुरक्षा बलों की वापसी को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 14 जुलाई को अपने चाइना के समकक्ष वांग यी से चिंताओं का  साझा किया था. विदेश मंत्री ने दोनों राष्ट्रों के विदेश मंत्रियों के बीच में विसैन्यीकरण को लेकर पहली बनी सहमति का भी हवाला दिया था और कम्पलेन दर्ज कराते हुए अभी तरक पूर्ण विसैन्यीकरण न हो पाने का उल्लेख किया था. दोनों विदेश मंत्रियों के बीच में यह बातचीत संघाई योगदान संगठन के विदेश मंत्रियों की मीटिंग से इतर दुशांबे में हुई थी. विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में हिंदुस्तान की विसैन्यीकरण को लेकर चिंताओं को प्रमुखता से रेखांकित किया गया था.

 लेकिन चाइना के विदेश मंत्री वांग यी ने दे दी नसीहत
विदेश मंत्री एस जयशंकर के बयान के अंश को विदेश मंत्रालय द्वारा जारी करने के बाद चीनी दूतावास ने विदेश मंत्री वांग यी के वार्ता के अंश को जारी किया. वांग यी इसमें हिंदुस्तान को नसीहत देते दिखाई दे रहे हैं. उन्होंने अपने बयान में हिंदुस्तान को संबंध को सामान्य बनाने की नसीहत दे दी है. वांग यी ने अपने बयान में साफ बोला कि पिछले वर्ष भारत-चीन सीमा क्षेत्र में जो कुछ हुआ उसके अधिकार और गलतियां बहुत स्पष्ट हैं और जिम्मेदारी चीनी पक्ष की नहीं है. चाइना ने मामले के निवारण के लिए वार्ता के माध्यम से निवारण पर सहमति जताई, लेकिन विसैन्यीकरण के मामले पर विदेश मंत्री टाल मटोल करते नजर आए. इसके बजाय वह दोनों राष्ट्रों के द्विपक्षीय संबंधों में सुधार, विस्तार पर जोर देते रहे. उन्होंने बोला कि दोनों राष्ट्रों के बीच में द्विपक्षीय संबंध निचले स्तर हैं. इस दिशा में सार्थक प्रयासों की जरूरत है.

पेंचीदगियां बढ़ रही हैं, चाइना चल रहा चाल
विदेश मामलों के जानकार रंजीत कुमार कहते हैं कि मुख्य मामला तो हॉट स्प्रिंग और गोगरा पोस्ट से चाइना के  सुरक्षा बलों के पीछे जाने का है. लेकिन यह नहीं बोला जा सकता कि आगे क्या होगा और कब होगा? रंजीत कुमार कहते हैं कि पेंचीदगियां बढ़ रही हैं.पूर्व विदेश सचिव शशांक का भी बोलना है कि चाइना अब विसैन्यीकरण के मामले को टाल रहा है. विदेश मंत्रालय के एक संयुक्त सचिव कहते हैं कि वार्ता सकारात्मक माहौल में हो रही है. दोनों देश सीमा पर शांति, सौहार्द बनाए रखने के तरीका कर रहे हैं. वह कहते हैं कि केस कुछ तकनीकी होता जा रहा है, लेकिन उन्हें भरोसा है कि वार्ता से इसका निवारण निकल आएगा. सूत्र का बोलना है कि हिंदुस्तान और चाइना के तमाम आर्थिक, सियासी हित जुड़े हैं. इसलिए आशा है कि जल्द ही इसका निवारण निकल आएगा.