दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर बना लाहौर, जहरीले धुएं में सांस लेना हुआ मुश्किल

दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर बना लाहौर, जहरीले धुएं में सांस लेना हुआ मुश्किल

स्मॉग की चादर में लिपटा पाकिस्तान का लाहौर दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर है। पिछले दिनों जब इस शहर में हवा की गुणवत्ता एक्यूआई के पैमाने पर बढ़कर 348 हो गई तो इसे दुनिया के सबसे प्रदूषित शहर का तमगा मिला। हवा की गुणवत्ता पर नजर रखने वाले स्विस वायु गुणवत्ता निगरानी कंपनी एयर विजुअल की रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान की सांस्कृतिक राजधानी कहा जाने वाला लाहौर सबसे प्रदूषित शहर की सूची में नंबर वन पर है। लाहौर की गिनती पाकिस्तान के सबसे बड़े इलाके में होती है और इसकी आबादी एक करोड़ 10 लाख के करीब है। मीडिया रिपोर्ट की माने तो बीते कुछ वक्त में शहर की हवा लगातार खराब होती गई।

अमेरिकी पैमाने के अनुसार लाहौर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 203 रहा जबकि दिल्ली दूसरे नंबर पर है और वहां का सूचकांक 183 दर्ज किया गया। कंपनी के अनुसार ढाका (बांग्लादेश) 169 सूचकांक के साथ तीसरे और कोलकाता 168 सूचकांक के साथ चौथे नंबर पर रहा। गौरतलब है कि इन दिनों उत्तर भारत में भी कमोबेश धुंध की चादर देखने को मिली थी। हालांकि अब हालात काफी हद तक बदलते नजर आ रहे हैं और धुंध की परत का साया दिल्ली एनसीआर से छटती नजर आ रही है। 

गौरतलब है कि लाहौर को किसी जमाने में बागों का शहर कहा जाता था। 16वीं से 19वीं शताब्दी के बीच मुगल काल के दौरान यहां बड़ी संख्या में बाग थे। लेकिन तेजी से शहरीकरण और बढ़ती आबादी की वजह से अब शहर में बहुत कम हरियाली बची है। लाहौर को कराची के बाद पाकिस्तान का दूसरा सबसे बड़ा शहर माना जाता है। इसे पाकिस्तान की सांस्कृतिक राजधानी का भी तमगा प्राप्त है। 


चीन से बढ़ते खतरों के बीच अपना रक्षा बजट बढ़ाएगा जापान, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन को उम्मीद

चीन से बढ़ते खतरों के बीच अपना रक्षा बजट बढ़ाएगा जापान, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन को उम्मीद

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने उम्मीद जताई है कि जापान अपने रक्षा बजट में वृद्धि करेगा। जापानी मीडिया ने शनिवार को बताया कि जापानी प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा के साथ अक्टूबर में फोन काल पर बातचीत के दौरान बाइडन  ने उम्मीद जताई थी कि जापान अपना रक्षा बजट बढाएगा।

क्योडो न्यूज ने एक राजनयिक स्रोत का हवाला देते हुए बताया कि बाइडन की टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब किशिदा ने चीन और उत्तर कोरिया से बढ़ते खतरों के बीच देश की रक्षा के लिए एक मजबूत आत्मरक्षा बल बनाने की प्रतिबद्धता जताई है। जापान ने अब तक अपना रक्षा बजट देश के सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 1 प्रतिशत रखा है। शनिवार को जापानी प्रधानमंत्री ने देश की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने का संकल्प लिया।

क्योडो न्यूज ने बताया कि किशिदा की टिप्पणी ग्राउंड सेल्फ-डिफेंस फोर्स (जीएसडीएफ) बेस पर एक भाषण के दौरान आई, जहां उन्होंने उत्तर कोरिया के मिसाइल प्रौद्योगिकी के तेजी से विकास और चीन के सैन्य विस्तार के बारे में चिंता व्यक्त की। किशिदा ने अपनी पहली सैन्य समीक्षा में दुश्मन के ठिकाने पर हमला करने की क्षमता हासिल करने सहित सभी विकल्पों पर विचार करने का संकल्प दोहराया। किशिदा ने कहा कि जापान (उत्तर कोरिया के) हाल के विकास और नई तकनीकों जैसे हाइपरसोनिक ग्लाइड हथियारों और अनियमित कक्षाओं वाली मिसाइलों के विकास की अनदेखी नहीं कर सकता।

इससे पहले किशिदा ने शुक्रवार को लगभग 50 एशियाई और यूरोपीय देशों के नेताओं की वर्चुअल बैठक में अपनी टिप्पणी के दौरान चीन में मानवाधिकारों के मुद्दों पर भी कड़ी चिंता व्यक्त की थी। किशिदा ने शिखर सम्मेलन के दौरान हांगकांग के साथ-साथ उत्तर-पश्चिमी चीन के शिंजियांग क्षेत्र में अधिकारों की स्थिति के बारे में चिंता व्यक्त की।