चीन के 28 लड़ाकू विमानों ने फिर ताइवान के एयरस्पेस में भरी उड़ान

चीन के 28 लड़ाकू विमानों ने फिर ताइवान के एयरस्पेस में भरी उड़ान

मंगलवार को चीनी एयरफोर्स के तकरीबन 28 विमान ताइवान के एयर डिफेंस आइडेन्टिफिकेशन जोन (AIDZ) में घुस आए। ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि चीन ने देश में 28 लड़ाकू विमान भेजे हैं। मंगलवार को अब तक सबसे ज्यादा संख्या में एक ही दिन में ऐसे विमान चीन ने भेजे हैं। मंत्रालय ने बताया कि पिछले साल से पेइचिंग के लड़ाकू विमान हर दिन देश की तरफ उड़ान भर रहे हैं, लेकिन कल सबसे अधिक संख्या में विमानों ने उड़ान भरी।

इस मुद्दे पर अभी तक बीजिंग की तरफ से कोई टिप्पणी नहीं की गई है। यह ऐसे समय पर हुआ है जब हाल ही में जी-7 देशों ने ताइवान के मुद्दे पर चीन को निशाने पर लिया था। जी-7 देशों ने एक संयुक्त बयान जारी कर ताइवान जलडमरूमध्य मुद्दे को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने का आह्वान किया था। उधर, दो दिन पहले अमेरिका ने भी चीन से ताइवान के खिलाफ दबाव खत्म करने का आह्वान किया था और जलडमरूमध्य समस्या का शांतिपूर्ण समाधान करने को कहा था।


ताइवान ने हाल के महीनों में द्वीप के पास चीन की वायु सेना द्वारा दोहराए गए मिशनों की शिकायत की है, जो ताइवान-नियंत्रित प्रतास द्वीप समूह के पास इसके वायु रक्षा क्षेत्र के दक्षिण-पश्चिमी भाग में केंद्रित है। ताइवान जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ता जा रहा है। ताइपे के वायु रक्षा पहचान क्षेत्र में लगभग दैनिक घुसपैठ के साथ, चीन ने ताइवान के खिलाफ राजनीतिक दबाव और सैन्य खतरों को बढ़ा दिया है। दूसरी ओर, ताइपे ने अमेरिका सहित लोकतंत्रों के साथ रणनीतिक संबंधों को बढ़ाकर चीनी आक्रामकता का मुकाबला किया है, जिसका बीजिंग द्वारा बार-बार विरोध किया गया है।


भारत-चीन: 12वें दौर की बातचीत भले ही नौ घंटे चली हो, लेकिन...

भारत-चीन: 12वें दौर की बातचीत भले ही नौ घंटे चली हो, लेकिन...

भारत और चाइना के सैन्य कमांडरों ने पूर्वी लद्दाख में जारी गतिरोध को समाप्त करने के लिए 12 वें दौर की बातचीत की. बातचीत कोई नौ घंटे चली लेकिन इसके नतीजे अनुमान के अनुरूप ही आए. सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक दोनों राष्ट्रों के सैन्य कमांडरों के बीच में सीमा क्षेत्र में तनाव घटाने, एकतरफा सैन्य कार्रवाई या एक दूसरे को उकसाने जैसी कार्रवाई से बचने के तरीकों पर सहमति बनी है, लेकिन गोगरा पोस्ट और हॉटस्प्रिंग समेत भारतीय चिंताओं वाले इलाके से अपनी फौज को पीछे ले जाने पर चाइना की तरफ से कोई आश्वासन नहीं मिला. विदेश मंत्रालय के ऑफिसरों को भी वैसे अभी इस मामले का सीधा निवारण नहीं दिखाई दे रहा है.


हॉटस्प्रिंग, गोगरा पोस्ट समेत अन्य स्थानों से चीनी सुरक्षा बलों की वापसी को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 14 जुलाई को अपने चाइना के समकक्ष वांग यी से चिंताओं का  साझा किया था. विदेश मंत्री ने दोनों राष्ट्रों के विदेश मंत्रियों के बीच में विसैन्यीकरण को लेकर पहली बनी सहमति का भी हवाला दिया था और कम्पलेन दर्ज कराते हुए अभी तरक पूर्ण विसैन्यीकरण न हो पाने का उल्लेख किया था. दोनों विदेश मंत्रियों के बीच में यह बातचीत संघाई योगदान संगठन के विदेश मंत्रियों की मीटिंग से इतर दुशांबे में हुई थी. विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में हिंदुस्तान की विसैन्यीकरण को लेकर चिंताओं को प्रमुखता से रेखांकित किया गया था.

 लेकिन चाइना के विदेश मंत्री वांग यी ने दे दी नसीहत
विदेश मंत्री एस जयशंकर के बयान के अंश को विदेश मंत्रालय द्वारा जारी करने के बाद चीनी दूतावास ने विदेश मंत्री वांग यी के वार्ता के अंश को जारी किया. वांग यी इसमें हिंदुस्तान को नसीहत देते दिखाई दे रहे हैं. उन्होंने अपने बयान में हिंदुस्तान को संबंध को सामान्य बनाने की नसीहत दे दी है. वांग यी ने अपने बयान में साफ बोला कि पिछले वर्ष भारत-चीन सीमा क्षेत्र में जो कुछ हुआ उसके अधिकार और गलतियां बहुत स्पष्ट हैं और जिम्मेदारी चीनी पक्ष की नहीं है. चाइना ने मामले के निवारण के लिए वार्ता के माध्यम से निवारण पर सहमति जताई, लेकिन विसैन्यीकरण के मामले पर विदेश मंत्री टाल मटोल करते नजर आए. इसके बजाय वह दोनों राष्ट्रों के द्विपक्षीय संबंधों में सुधार, विस्तार पर जोर देते रहे. उन्होंने बोला कि दोनों राष्ट्रों के बीच में द्विपक्षीय संबंध निचले स्तर हैं. इस दिशा में सार्थक प्रयासों की जरूरत है.

पेंचीदगियां बढ़ रही हैं, चाइना चल रहा चाल
विदेश मामलों के जानकार रंजीत कुमार कहते हैं कि मुख्य मामला तो हॉट स्प्रिंग और गोगरा पोस्ट से चाइना के  सुरक्षा बलों के पीछे जाने का है. लेकिन यह नहीं बोला जा सकता कि आगे क्या होगा और कब होगा? रंजीत कुमार कहते हैं कि पेंचीदगियां बढ़ रही हैं.पूर्व विदेश सचिव शशांक का भी बोलना है कि चाइना अब विसैन्यीकरण के मामले को टाल रहा है. विदेश मंत्रालय के एक संयुक्त सचिव कहते हैं कि वार्ता सकारात्मक माहौल में हो रही है. दोनों देश सीमा पर शांति, सौहार्द बनाए रखने के तरीका कर रहे हैं. वह कहते हैं कि केस कुछ तकनीकी होता जा रहा है, लेकिन उन्हें भरोसा है कि वार्ता से इसका निवारण निकल आएगा. सूत्र का बोलना है कि हिंदुस्तान और चाइना के तमाम आर्थिक, सियासी हित जुड़े हैं. इसलिए आशा है कि जल्द ही इसका निवारण निकल आएगा.