1.9 ट्रिलियन डॉलर के रिलीफ पैकज का ऐलान, जो बाइडन का अमेरिकियों को तोहफा

1.9 ट्रिलियन डॉलर के रिलीफ पैकज का ऐलान, जो बाइडन का अमेरिकियों को तोहफा

वॉशिंगटन अमेरिकी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए अमेरिका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन  ने पहले से ही बड़े कदम उठाएं हैं।  उन्होंने कोरोना वायरस की मार से देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए 1.9 ट्रिलियन डॉलर के राहत पैकेज का ऐलान किया है। उनके इस कदम से हर अमेरिकी के खाते में सीधे 1400 डॉलर जाएंगे। इस पैकेज में कोरोना से लड़ने के लिए 415 बिलियन डॉलर दिए गए हैं। जबकि छोटे बिजनेस के लिए 440 बिलियन डॉलर का ऐलान किया गया है

3 लाख 85 हज़ार से ज्यादा लोगों की मौत
बता दें कि अमेरिका में अब तक कोरोना वायरस से 3 लाख 85 हज़ार से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। बाइडन ने चुनाव प्रचार के दौरान ही कोरोना से लड़ने के लिए बड़े कदम उठाने का वादा किया था। जो बाइडन ने चुनाव प्रचार के दौरान ही कोरोना से लड़ने के लिए बड़े कदम उठाने का वादा किया था। उनका ये ऐलान उस वक्त आया है जब अमेरिका में इन दिनों हर दिन कोरोना के औसतन 2 लाख नए केस आ रहे हैं। जबकि हर रोज़ 4 हज़ार लोगों को मौत हो रही है। टीवी पर प्राइम टाइम स्पीच के दौरान उन्होंने कहा, ‘हमारे देश की स्वास्थ्य व्यवस्था चुनौतियों का सामना कर रही है।  हमें तुरंत इस पर कदम उठाने होंगे। हम ठोकरें खाएंगे। लेकिन हम हमेशा आपके साथ ईमानदार रहेंगे।

अमेरिका में इमरजेंसी अप्रूवल
डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान ही दो वैक्सीन को अमेरिका में इमरजेंसी अप्रूवल दी गई। लेकिन अब अधिकारियों का कहना है कि वैक्सीनेशन में तेजी लानी होगी। बाइ़डन ने कहा है कि वो देश के कोने-कोने में वैक्सीन पहुंचाना चाहते हैं। बाइडन के मुताबिक देश भर में कोरोना की टेस्टिंग को भी बढ़ाई जाएगी।

लगातार बढ़ रही बेरोजगारी
अमेरिका में इस वक्त बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है। फिलहाल वहां करीब 18 मिलियन लोग बेरोजगार हैं। अब बाइडन के नए ऐलान से ऐसे लोग जिन्हें नौकरी नहीं है उन्हें 300 डॉलर हर हफ्ते के बदले 400 डॉलर मिलेंगे। नव-निर्वाचित राष्ट्रपति ने हर घंटे की न्यूनतम मजदूरी 15 डॉलर से दोगुना करने का वादा किया है। कहा जा रहा है कि ट्रंप की पार्टी नए भारी भरकम पैकेज का विरोध कर सकती है।

डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान ही दो वैक्सीन को अमेरिका में इमरजेंसी अप्रूवल दी गई। लेकिन अब अधिकारियों का कहना है कि वैक्सीनेशन में तेजी लानी होगी। बाइ़डन ने कहा है कि वो देश के कोने-कोने में वैक्सीन पहुंचाना चाहते हैं। वाइडन के मुताबिक देश भर में कोरोना की टेस्टिंग को भी बढ़ाई जाएगी।


खतरे में दुनिया, आइसबर्ग के लाखों जिंदगियां होंगी खत्म

खतरे में दुनिया, आइसबर्ग के लाखों जिंदगियां होंगी खत्म

नई दिल्ली। विशाल हिमखंड यानी आइसबर्ग के टूटने की वजह से वैज्ञानिकों ने लगभग 10 साल की कड़ी मेहनत के बाद पता लगा ही लिया। अंटार्कटिका में आई पहली दरार जिसकी वजह से आइस शेल्फ से आइसबर्ग टूट गया था, अब उसकी सारी गुत्थियां सुलझ गई हैं। बता दें, इस हिमखंड का आकार मुंबई शहर के दोगुने से भी ज्यादा है। ये घटना महामारी वाले साल नवंबर 2020 में आइस शेल्फ पर बनी एक बड़ी दरार के बाद घटित हुई है। जोकि शुक्रवार की सुबह यानी 26 फ़रवरी को ये आइस बर्ग पूरी तरह टूट कर बिखर गया।

हिमखंड खुले पानी में तैर रहा
दरअसल “नॉर्थ रिफ्ट” दरार बीते दशक में ब्रंट आइस शेल्फ में सक्रिय रूप से सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा था। इस बारे में ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वे (बीएएस) के वैज्ञानिकों को इसके अलग होने की पूरी उम्मीद थी। आपको बता दें कि इस हिमखंड का आकर 1,270 वर्ग किमी है जबकि मुंबई का आकार 603 वर्ग किलोमीटर ही है।

ऐसे में बीएएस के निदेशक डेम जेन फ्रांसिस ने जानकारी देते हुए कहा, ” हमारी टीमें बरसों से ब्रंट आइस शेल्फ से एक हिमखंड के अलग होने को लेकर पूरी तरह तैयार थी। आने वाले हफ्तों या महीनों में, हिमखंड मूल हिस्से से दूर जा सकता है, या फिर यह चारों तरफ से ब्रंट आइसबर्ग के करीब रह सकता है।” वहीं अब यह हिमखंड खुले पानी में तैर रहा है।


सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, यह बर्फ विभाजन एक प्राकृतिक प्रक्रिया के कारण हुआ, और इस बात का कोई सबूत नहीं है कि जलवायु परिवर्तन ने इसमें कोई भूमिका निभाई है। ये आइसबर्ग बहुत बड़ा है जिसका अनुमानित आकार लगभग 490 वर्ग मील (1,270 वर्ग किमी) है।

हिमखंड के टूटने से बहुत बड़ा खतरा
अंटार्कटिका में बर्फ के बड़े हिस्से का टूटना पूरी तरह से सामान्य है। ये बड़े पैमाने पर होने वाली यह प्राकृतिक घटना ( ब्रंट आइस शेल्फ का टूटना) काफी दुर्लभ और रोमांचक है। लेकिन हिमखंड के टूटने से बहुत बड़ा खतरा भी है।

इस हिमखंड यानी बर्फीले पहाड़ के टूटने की वजह से हजारों सील मछलियों, पेंग्विन और दूसरे वन्यजीवों पर खतरा मंडराने लगा है. ऐसे में जीववैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगर ए68ए नाम का यह आइसबर्ग टापू से भिड़ गया, तो पर्यावरण को भयानक नुकसान हो सकता है।

जिससे लाखों जानवरों के आवास नष्ट हो जाएंगे। सामने आए एक आकलन के अनुसार, आइसबर्ग का वजन एक ट्रिलियन टन है और 200 मीटर गहरा है। इसकी वजह से इसका जमीन से टकराने का खतरा दूसरे विशाल आइसबर्ग की तुलना में कहीं ज्यादा है।


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