राष्ट्रपति बाइडेन ने लिया ये बड़ा फैसला, अमेरिका जाने वाले लोगों की बढ़ी मुसीबतें

राष्ट्रपति बाइडेन ने लिया ये बड़ा फैसला, अमेरिका जाने वाले लोगों की बढ़ी मुसीबतें

वाशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति  जो बाइडेन ने कोरोना के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए  बड़ा फैसला लिया है।  अमेरिका आने वाले हर यात्री को क्वारंटीन रहना होगा, निगेटिव रिपोर्ट आने पर ही आगे जाने की अनुमति होगी।

अमेरिका में सत्ता परिवर्तन के बावजूद चीन और पाकिस्तान के प्रति नीतियों में बदलाव नहीं होगा। नवनिर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन का प्रशासन भी भारत के साथ सीमा विवाद में चीन के साथ सख्ती की नीति पर चलता रहेगा। बिडेन प्रशासन की ओर से पाकिस्तान को आतंकियों को मदद करने के खिलाफ आगाह किया गया है।

अमेरिका के भावी रक्षा मंत्री जनरल (रिटायर्ड) लॉयड ऑस्टिन ने साफ कर दिया है कि पाकिस्तान को अपना रवैया बदलना होगा। लश्कर ए तोयबा और अन्य भारत विरोधी आतंकियों को मदद पहुंचाने की नीयत से बाज आना होगा।

उन्होंने चीन के खिलाफ भी सख्त रवैये का संकेत दिया। इससे साफ है कि बिडेन प्रशासन चीन और पाकिस्तान दोनों देशों के खिलाफ पहले की तरह सख्त नीति अपनाएगा।

चरमपंथी संगठनों पर लगाम लगाए पाक
ऑस्टिन ने साफ किया कि मेरा उद्देश्य भारत के साथ रक्षा संबंधों के लिए साझेदारी को जारी रखना होगा। ऑस्टिन ने सीनेट सशस्त्र सेवा समिति के सदस्यों को बताया कि वे अमेरिका और भारतीय साझा सैन्य हितों के सहयोग के लिए प्रयास करेंगे।

उन्होंने सदस्यों को बताया कि वे पाकिस्तान से साफ तौर पर कहेंगे कि वह हिंसक चरमपंथी संगठनों और आतंकवादियों को अपनी जमीन का इस्तेमाल करने से रोके।

कार्रवाई न करने पर जताई नाराजगी
उन्होंने आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई न करने पर पाकिस्तान के प्रति गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि भारत विरोधी आतंकी संगठनों लश्कर और जैश ए मोहम्मद के खिलाफ पाकिस्तान सख्त कार्रवाई नहीं कर रहा है। सूत्रों का कहना है कि बिडेन प्रशासन की ओर से पाकिस्तान को सख्त संदेश दिया गया है।

पाक को बदलना होगा रवैया
ऑस्टिन ने कहा कि 2019 में हुए पुलवामा हमले के बाद आतंकी हमलों की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई। इसका एक प्रमुख कारण यह है कि पाकिस्तान आतंकियों पर लगाम लगाने में मदद नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में पाकिस्तान को अपना रवैया बदलना होगा और आतंकियों पर नकेल कसनी होगी। हमें आतंकियों के साथ नरम रवैया की नीति मंजूर नहीं है।

उन्होंने भविष्य में भी भारत के साथ रक्षा सहयोग जारी रखने का एलान करते हुए कहा कि हम क्वाड के जरिए रक्षा सहयोग के दायरे को और बढ़ाने की कोशिश करेंगे। क्वाड में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ भारत भी शामिल है।

विदेश मंत्री का सहयोग जारी रखने का संकेत
अमेरिका के नामित विदेश मंत्री टोनी ब्लिंकन ने भी भारत के साथ विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की नीति जारी रखने का संकेत दिया है। ब्लिंकन ने सीनेट की विदेशी मामलों की समिति के सामने रिपब्लिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत नीति का समर्थन किया।

चार घंटे से भी ज्यादा समय तक चली इस बैठक में उन्होंने कहा कि भारत के साथ सहयोग की नीति क्लिंटन प्रशासन के आखिरी दिनों में शुरू हुई थी। ओबामा प्रशासन के दौर में रक्षा खरीद और सूचना साझेदारी में सहयोग बढ़ा। ट्रंप प्रशासन ने इसे आगे बढ़ाकर हिंद प्रशांत सहयोग की रणनीति पर काम किया।

चीन की चुनौती का करेंगे सामना
उन्होंने कहा कि इस बात में तनिक भी संदेह नहीं है कि एक राष्ट्र के तौर पर हमारे हितों को सबसे अधिक चुनौती चीन की ओर से पेश की जा रही है। अमेरिका को इस चुनौती का सामना करना है और हम पूरी मजबूती से इस चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं।

उन्होंने कहा कि हम भारत के साथ यह सुनिश्चित करने के लिए काम करेंगे कि चीन समेत कोई भी देश भारतीय संप्रभुता को चुनौती न दे सके। आतंक के मुद्दे पर भी हम भारत के साथ हैं। दोनों देशों के आपसी रिश्तो को मजबूत बनाने के लिए बहुत सारे रास्ते हैं और हम निश्चित रूप से भारत के साथ दोस्ती का रुख बनाए रखेंगे।


खतरे में दुनिया, आइसबर्ग के लाखों जिंदगियां होंगी खत्म

खतरे में दुनिया, आइसबर्ग के लाखों जिंदगियां होंगी खत्म

नई दिल्ली। विशाल हिमखंड यानी आइसबर्ग के टूटने की वजह से वैज्ञानिकों ने लगभग 10 साल की कड़ी मेहनत के बाद पता लगा ही लिया। अंटार्कटिका में आई पहली दरार जिसकी वजह से आइस शेल्फ से आइसबर्ग टूट गया था, अब उसकी सारी गुत्थियां सुलझ गई हैं। बता दें, इस हिमखंड का आकार मुंबई शहर के दोगुने से भी ज्यादा है। ये घटना महामारी वाले साल नवंबर 2020 में आइस शेल्फ पर बनी एक बड़ी दरार के बाद घटित हुई है। जोकि शुक्रवार की सुबह यानी 26 फ़रवरी को ये आइस बर्ग पूरी तरह टूट कर बिखर गया।

हिमखंड खुले पानी में तैर रहा
दरअसल “नॉर्थ रिफ्ट” दरार बीते दशक में ब्रंट आइस शेल्फ में सक्रिय रूप से सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा था। इस बारे में ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वे (बीएएस) के वैज्ञानिकों को इसके अलग होने की पूरी उम्मीद थी। आपको बता दें कि इस हिमखंड का आकर 1,270 वर्ग किमी है जबकि मुंबई का आकार 603 वर्ग किलोमीटर ही है।

ऐसे में बीएएस के निदेशक डेम जेन फ्रांसिस ने जानकारी देते हुए कहा, ” हमारी टीमें बरसों से ब्रंट आइस शेल्फ से एक हिमखंड के अलग होने को लेकर पूरी तरह तैयार थी। आने वाले हफ्तों या महीनों में, हिमखंड मूल हिस्से से दूर जा सकता है, या फिर यह चारों तरफ से ब्रंट आइसबर्ग के करीब रह सकता है।” वहीं अब यह हिमखंड खुले पानी में तैर रहा है।


सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, यह बर्फ विभाजन एक प्राकृतिक प्रक्रिया के कारण हुआ, और इस बात का कोई सबूत नहीं है कि जलवायु परिवर्तन ने इसमें कोई भूमिका निभाई है। ये आइसबर्ग बहुत बड़ा है जिसका अनुमानित आकार लगभग 490 वर्ग मील (1,270 वर्ग किमी) है।

हिमखंड के टूटने से बहुत बड़ा खतरा
अंटार्कटिका में बर्फ के बड़े हिस्से का टूटना पूरी तरह से सामान्य है। ये बड़े पैमाने पर होने वाली यह प्राकृतिक घटना ( ब्रंट आइस शेल्फ का टूटना) काफी दुर्लभ और रोमांचक है। लेकिन हिमखंड के टूटने से बहुत बड़ा खतरा भी है।

इस हिमखंड यानी बर्फीले पहाड़ के टूटने की वजह से हजारों सील मछलियों, पेंग्विन और दूसरे वन्यजीवों पर खतरा मंडराने लगा है. ऐसे में जीववैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगर ए68ए नाम का यह आइसबर्ग टापू से भिड़ गया, तो पर्यावरण को भयानक नुकसान हो सकता है।

जिससे लाखों जानवरों के आवास नष्ट हो जाएंगे। सामने आए एक आकलन के अनुसार, आइसबर्ग का वजन एक ट्रिलियन टन है और 200 मीटर गहरा है। इसकी वजह से इसका जमीन से टकराने का खतरा दूसरे विशाल आइसबर्ग की तुलना में कहीं ज्यादा है।


Atom 1.0 बाइक से केवल 7 रुपये में करें 100 किलोमीटर का सफर       गर्म पानी पीने से हो सकता है स्वास्थ्य को ये नुकसान!       नींद नहीं आती है रातों में? अपनाएं ये उपाय       उरी बेस कैंप पहुंचे Vicky Kaushal, इंडियन आर्मी संग फोटोज़ शेयर कर बोले...       ये प्यारी सी 'डिमांड' भी कर दी, Sonu Sood ने बिहार की बहन के लिए दिखाई दरियादिली       इस मंदिर में चढ़ाया जाता है इंसान के निजी अंग का डमी मॉडल, वजह जानकर हो जाएंगे हैरान       सेंसेक्स की शीर्ष 10 में से आठ कंपनियों का बाजार कैपिटलाइजेशन 1.94 लाख करोड़ रुपये बढ़ा       करोड़ों में लगी Twitter के CEO के पहले ट्वीट की बोली...       इस दिन लगेगा खरमास, जानें इस दौरान क्या करें       बस इन नियमों का करना होगा पालन, सूर्य देव को अर्घ्य देने से बन जाते हैं कैसे भी बिगड़े काम       RSWS 2021: इंग्लैंड ने बांग्लादेश लीजेंड्स को हराया, केविन पीटरसन की धुआंधार बैटिंग       खिताबी सिक्सर लगाने उतरेगी रोहित की मुंबई, RCB से खेलेगी पहला मैच       44 लेयर में भरी जाएगी राम मंदिर की 15 मीटर गहरी नींव, पारंपरिक शैली में होगा निर्माण       दुनियाभर में फैली दहशत, कोरोना महामारी पर WHO ने दी चेतावनी       आर्मी तक पहुंची वैक्सीन, रिटायर्ड सैन्य कर्मियों का टीकाकरण       गौतम बुद्ध के ये अनमोल वचन बदल देंगे आपकी जिंदगी       कब से शुरू हो रहा है खरमास, नहीं कर पाएंगे कोई शुभ कार्य       मार्च में है महाशिवरात्रि, होली, विजया एकादशी जैसे महत्वपूर्ण व्रत एवं त्योहार       समस्याओं से आप भी हैं परेशान, तो पढ़ें भगवान ​बुद्ध से जुड़ी यह प्रेरक कथा       महाशिवरात्रि के दिन करें ये उपाय, शिव जी प्रसन्न होकर कष्टों से देते हैं मुक्ति