अमेरिका में कोरोना वायरस का कहर

अमेरिका में कोरोना वायरस का कहर

वॉशिंगटन: दुनिया भर में कोरोना वायरस से तबाही मची हुई। कई देशों में कोरोना से मौत के मामले कम हो रहे हैं, लेकिन अमेरिका में महामारी थमने का नाम नहीं ले रही हैं। अमेरिका में औसतन हर दिन 2 लाख लोग कोरोना के नए मामले सामने आ रहे हैं। नए साल के पहले दो हफ्ते में अमेरिका में अब तक 38 हजार लोगों की मौत हो चुकी है।

अब अमेरिका को डराने वाली एक और रिपोर्ट सामने आई है। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के मुताबिक अगले 3 हफ्ते में कोरोना से 92 हज़ार लोगों की जान सकती है। तो वहीं एक रिसर्च में कहा गया है कि अमेरिका में कोरोना की वजह से लोगों की औसत उम्र भी एक साल कम हो गई है। अब ये घट कर 77.48 पहुंच गई है।

अमेरिका में यह आंकड़ा साल 2003 के बाद सबसे कम है। फिलहाल करीब 130300 लोग अमेरिका में कोरोना की वजह से अस्पताल में भर्ती हैं। कई राज्यों में संक्रमण की संख्या दोगुनी हो चुकी है। इस महीने अमेरिका में 30 लाख लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं।

जानवर भी कोरोना की चपेट में
सैन डियागो में दो गुरिल्ला में कोरोना वायरस पाया गया है जिसके बाद हड़कंप मच गया है। यहां के चिड़ियाघर में दो लंगूरों में कोरोना वायरस के लक्षण मिले हैं। उइस चिड़ियाघर में तीन जानवरों में कोरोना वायरस के लक्षण पाए गए हैं। यह शंका जताई जा रही है कि यहां के कर्मचारी एसिप्टोमेटिक हो सकते हैं।

अमेरिका में कोरोना महामारी के प्रकोप की वजह से बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है। बेरोजगारी का लाभ लेने के लिए दावा करने वालों की संख्या बढ़कर बीते सप्ताह 9,65,000 तक पहुंच गई है। यह बीते सालों के अगस्त के अंत से सबसे अधिक है। श्रम विभाग द्वारा गुरुवार को जारी बेरोजगारी दावों से यह जानकारी सामने आई है। कोरोना महामारी और लॉकडाउन के चलते हुई छंटनी के कारण बेरोजगारी दर बढ़ी है। महामारी से पहले आमतौर पर यह आंकड़ा 225,000 के आसपास हुआ करता था।


खतरे में दुनिया, आइसबर्ग के लाखों जिंदगियां होंगी खत्म

खतरे में दुनिया, आइसबर्ग के लाखों जिंदगियां होंगी खत्म

नई दिल्ली। विशाल हिमखंड यानी आइसबर्ग के टूटने की वजह से वैज्ञानिकों ने लगभग 10 साल की कड़ी मेहनत के बाद पता लगा ही लिया। अंटार्कटिका में आई पहली दरार जिसकी वजह से आइस शेल्फ से आइसबर्ग टूट गया था, अब उसकी सारी गुत्थियां सुलझ गई हैं। बता दें, इस हिमखंड का आकार मुंबई शहर के दोगुने से भी ज्यादा है। ये घटना महामारी वाले साल नवंबर 2020 में आइस शेल्फ पर बनी एक बड़ी दरार के बाद घटित हुई है। जोकि शुक्रवार की सुबह यानी 26 फ़रवरी को ये आइस बर्ग पूरी तरह टूट कर बिखर गया।

हिमखंड खुले पानी में तैर रहा
दरअसल “नॉर्थ रिफ्ट” दरार बीते दशक में ब्रंट आइस शेल्फ में सक्रिय रूप से सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा था। इस बारे में ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वे (बीएएस) के वैज्ञानिकों को इसके अलग होने की पूरी उम्मीद थी। आपको बता दें कि इस हिमखंड का आकर 1,270 वर्ग किमी है जबकि मुंबई का आकार 603 वर्ग किलोमीटर ही है।

ऐसे में बीएएस के निदेशक डेम जेन फ्रांसिस ने जानकारी देते हुए कहा, ” हमारी टीमें बरसों से ब्रंट आइस शेल्फ से एक हिमखंड के अलग होने को लेकर पूरी तरह तैयार थी। आने वाले हफ्तों या महीनों में, हिमखंड मूल हिस्से से दूर जा सकता है, या फिर यह चारों तरफ से ब्रंट आइसबर्ग के करीब रह सकता है।” वहीं अब यह हिमखंड खुले पानी में तैर रहा है।


सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, यह बर्फ विभाजन एक प्राकृतिक प्रक्रिया के कारण हुआ, और इस बात का कोई सबूत नहीं है कि जलवायु परिवर्तन ने इसमें कोई भूमिका निभाई है। ये आइसबर्ग बहुत बड़ा है जिसका अनुमानित आकार लगभग 490 वर्ग मील (1,270 वर्ग किमी) है।

हिमखंड के टूटने से बहुत बड़ा खतरा
अंटार्कटिका में बर्फ के बड़े हिस्से का टूटना पूरी तरह से सामान्य है। ये बड़े पैमाने पर होने वाली यह प्राकृतिक घटना ( ब्रंट आइस शेल्फ का टूटना) काफी दुर्लभ और रोमांचक है। लेकिन हिमखंड के टूटने से बहुत बड़ा खतरा भी है।

इस हिमखंड यानी बर्फीले पहाड़ के टूटने की वजह से हजारों सील मछलियों, पेंग्विन और दूसरे वन्यजीवों पर खतरा मंडराने लगा है. ऐसे में जीववैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगर ए68ए नाम का यह आइसबर्ग टापू से भिड़ गया, तो पर्यावरण को भयानक नुकसान हो सकता है।

जिससे लाखों जानवरों के आवास नष्ट हो जाएंगे। सामने आए एक आकलन के अनुसार, आइसबर्ग का वजन एक ट्रिलियन टन है और 200 मीटर गहरा है। इसकी वजह से इसका जमीन से टकराने का खतरा दूसरे विशाल आइसबर्ग की तुलना में कहीं ज्यादा है।


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