अमेरिकी कबूतर को सजा: तय किया 13 किमी का सफर, जाने

अमेरिकी कबूतर को सजा: तय किया 13 किमी का सफर, जाने

मेलबर्न : सफेद कबूतरों की खूबसूरती वैसे तो हर किसी को भाती है लेकिन हाल ही में ऑस्ट्रेलिया में एक ऐसे ही कबूतर को मारना चाहता है। आपको बता दें कि इस कबूतर की खास बात ये है कि यह कबूतर अमेरिका से ऑस्ट्रेलिया 13 किलोमीटर का सफर तय करके यहां पंहुचा है। ऑस्ट्रेलिया की सरकार का यह मानना है कि इस एक कबूतर के आने से पूरे ऑस्ट्रेलिया में बीमारी फैल सकती है।

यह कबूतर 26 दिसंबर को मेलबर्न पहुंचा
समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल अक्टूबर में ये सफेद कबूतर अमेरिका के ऑरेगॉन में कबूतरों की रेस में शामिल हुआ था। रेस के दौरान कबूतर भटक गया और कई हजार किलोमीटर का सफर तय कर ऑस्ट्रेलिया पहुंच गया। आपको बता दें कि इस कबूतर का नाम ‘जो’ है। इस कबूतर को जब ऑस्ट्रेलिया में पकड़ा गया था तब इसके पैर में एक नीले रंग का पट्टा बंधा हुआ था। यह भी कहा जाता है कि यह पट्टा उस कबूतर की एक अलग पहचान के लिए बांधा गया था। बताया जा रहा है कि यह कबूतर 13 हजार कबूतर किलोमीटर का सफर कर 26 दिसंबर को यह कबूतर मेलबर्न पहुंच गया।

ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने जताया कबूतर को लेकर चिंता
सफेद कबूतर के पैर में बंधे इस नीले पट्टे ने ऑस्ट्रेलिया सरकार को परेशानी में डाल दिया है। ऑस्ट्रेलियाई सरकार को लगता है कि ये कबूतर किसी बड़ी बीमारी को फैलाने के लिए काफी है। आपको बता दें कि ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने इस कबूतर को मारने का मन बना लिया है। हालांकि ऑस्ट्रेलिया सरकार के इस बड़े फैसले के बाद अमेरिका के रेसिंग पिजन डेवलपमेंट मैनेजर डियोन रॉबर्ट्स ने कहा कि कबूतर के पैर में बंधा हुआ नीला बैंड नकली है।


रेसिंग पिजन डेवलपमेंट मैनेजर ने कही यह बात
डियोन रॉबर्ट्स ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया में जो नाम का कबूतर मिला है। वह अमेरिकी नीले बंद वाले कबूतरों से अलग है। उन्होंने कहा है कि हम रेस में शामिल कबूतरों को अभी तक ट्रेस नहीं कर पाए हैं लेकिन हम यह कह सकते हैं कि यह कबूतर ऑस्ट्रेलिया का ही है। उन्होंने यह कहा कि अगर यह रेस वाला कबूतर होता तो हम इसे आसानी से पहचान लेते।


खतरे में दुनिया, आइसबर्ग के लाखों जिंदगियां होंगी खत्म

खतरे में दुनिया, आइसबर्ग के लाखों जिंदगियां होंगी खत्म

नई दिल्ली। विशाल हिमखंड यानी आइसबर्ग के टूटने की वजह से वैज्ञानिकों ने लगभग 10 साल की कड़ी मेहनत के बाद पता लगा ही लिया। अंटार्कटिका में आई पहली दरार जिसकी वजह से आइस शेल्फ से आइसबर्ग टूट गया था, अब उसकी सारी गुत्थियां सुलझ गई हैं। बता दें, इस हिमखंड का आकार मुंबई शहर के दोगुने से भी ज्यादा है। ये घटना महामारी वाले साल नवंबर 2020 में आइस शेल्फ पर बनी एक बड़ी दरार के बाद घटित हुई है। जोकि शुक्रवार की सुबह यानी 26 फ़रवरी को ये आइस बर्ग पूरी तरह टूट कर बिखर गया।

हिमखंड खुले पानी में तैर रहा
दरअसल “नॉर्थ रिफ्ट” दरार बीते दशक में ब्रंट आइस शेल्फ में सक्रिय रूप से सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा था। इस बारे में ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वे (बीएएस) के वैज्ञानिकों को इसके अलग होने की पूरी उम्मीद थी। आपको बता दें कि इस हिमखंड का आकर 1,270 वर्ग किमी है जबकि मुंबई का आकार 603 वर्ग किलोमीटर ही है।

ऐसे में बीएएस के निदेशक डेम जेन फ्रांसिस ने जानकारी देते हुए कहा, ” हमारी टीमें बरसों से ब्रंट आइस शेल्फ से एक हिमखंड के अलग होने को लेकर पूरी तरह तैयार थी। आने वाले हफ्तों या महीनों में, हिमखंड मूल हिस्से से दूर जा सकता है, या फिर यह चारों तरफ से ब्रंट आइसबर्ग के करीब रह सकता है।” वहीं अब यह हिमखंड खुले पानी में तैर रहा है।


सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, यह बर्फ विभाजन एक प्राकृतिक प्रक्रिया के कारण हुआ, और इस बात का कोई सबूत नहीं है कि जलवायु परिवर्तन ने इसमें कोई भूमिका निभाई है। ये आइसबर्ग बहुत बड़ा है जिसका अनुमानित आकार लगभग 490 वर्ग मील (1,270 वर्ग किमी) है।

हिमखंड के टूटने से बहुत बड़ा खतरा
अंटार्कटिका में बर्फ के बड़े हिस्से का टूटना पूरी तरह से सामान्य है। ये बड़े पैमाने पर होने वाली यह प्राकृतिक घटना ( ब्रंट आइस शेल्फ का टूटना) काफी दुर्लभ और रोमांचक है। लेकिन हिमखंड के टूटने से बहुत बड़ा खतरा भी है।

इस हिमखंड यानी बर्फीले पहाड़ के टूटने की वजह से हजारों सील मछलियों, पेंग्विन और दूसरे वन्यजीवों पर खतरा मंडराने लगा है. ऐसे में जीववैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगर ए68ए नाम का यह आइसबर्ग टापू से भिड़ गया, तो पर्यावरण को भयानक नुकसान हो सकता है।

जिससे लाखों जानवरों के आवास नष्ट हो जाएंगे। सामने आए एक आकलन के अनुसार, आइसबर्ग का वजन एक ट्रिलियन टन है और 200 मीटर गहरा है। इसकी वजह से इसका जमीन से टकराने का खतरा दूसरे विशाल आइसबर्ग की तुलना में कहीं ज्यादा है।


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