उत्तराखंड सरकार ने किया कोरोना के कारण लॉकडाउन का ऐलान, जाने फंसे इतने नेपाली नागरिकों का हाल

 उत्तराखंड सरकार ने किया कोरोना के कारण लॉकडाउन का ऐलान, जाने फंसे इतने नेपाली नागरिकों का हाल

 उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में मजदूरी के लिए पहुंचने वाले नेपाली नागरिक बड़ी तादाद में रहते हैं। कुमाऊं में मजदूरी के अतिरिक्त ये नेपाली नागरिक लोगों का सामान घरों तक पहुंचाते व कई घरों में भी कार्य करते हैं।

 लेकिन उत्तराखंड सरकार द्वारा कोरोना वायरस (Coronavirus) के बढ़ते खतरे को देख लॉकडाउन (Lockdown) का ऐलान करने के बाद इनके पास स्वदेश वापसी के अतिरिक्त कोई चारा नही बचा है। ऐसे में लॉकडाउन का ऐलान होते ही भारी संख्या में नेपाली नागरिकों ने 22 मार्च से ही घर वापसी प्रारम्भ कर दी थी, लेकिन 23 मार्च को नेपाल सरकार ने 5 झूला व 1 मोटर पुल से आवाजाही पर पूरी तरह रोक लगा दी है। इसके चलते नेपाली नागरिकों पर संकट गहरा गया है।

नेपाल सरकार के एकाएक लिए गए इस निर्णय से उनके ही नागरिक हिंदुस्तान में फंस गए हैं। उत्तराखंड में लॉकडाउन होने के कारण यहां नेपाली नागरिकों को कोई कार्य नहीं मिल रहा है। ऊपर से उनके स्वदेश लौटने के रास्तों को नेपाल सरकार ने बंद कर दिया हे। वैसे ये भी तय नही है कि नेपाली नागरिक कब अपने मुल्क में वापसी कर पाएंगे।

तवाघाट से पंचेश्वर तक 5 झूला बंद किए

हिंदुस्तान व नेपाल के बीच तवाघाट से पंचेश्वर तक 5 झूला व बनबसा में 1 मोटरपुल है। इसके अतिरिक्त 7 घाट भी हैं जहां दोनों मुल्कों के नागरिक एक-दूसरे के यहां आते-जाते हैं। सभी घाटों को नेपाल सरकार पहले ही बंद कर चुकी है।

लॉकडाउन के चलते हम बेरोजगार हो चुके हैं: नेपाली मजदूर

नेपाली मेहनतकश जनक सिंह का बोलना है वो अपने परिवार के साथ पिथौरागढ़ मुख्यालय से झूलाघाट को रवाना हुए थे, लेकिन झूलाघाट पहुंचने पर उन्हें पता चला कि पुल बंद कर दिया गया है। जनक को अब ये समझ नहीं आ रहा है कि वो अब हिंदुस्तान में कैसे अपने परिवार को पाले? क्योंकि लॉकडाउन के कारण सभी कार्य बंद हैं, ऐसे कहीं भी कार्य मिल पाना असंभव है। चंपावत डिस्ट्रिक्ट में नेपाल सरकार के साथ ही हिंदुस्तान की ओर से भी पुल बंद कर दिए गए हैं।

वहीं पिथौरागढ़ के डीएम विजय कुमार का बोलना है कि जिले में नेपाल को जोड़ने वाले पुलों को हिंदुस्तान की ओर बंद करने का आदेश अभी उन्हें नहीं मिला है।