सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को आरक्षण को चुनौती वाली याचिका की...

सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को आरक्षण को चुनौती वाली याचिका की...

सुप्रीम कोर्ट ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (Economically Weaker Sections, EWS) के उम्मीदवारों को नौकरियों और एडमिशन में 10 फीसद आरक्षण देने के केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर केरल हाईकोर्ट में कार्यवाही पर रोक लगा दी है। सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने केंद्र सरकार की ओर से दाखिल याचिका पर नोटिस भी जारी किया। सरकार की ओर से दाखिल याचिका में मामले को हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित करने की गुजारिश की गई है।  

प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने केंद्र द्वारा दाखिल याचिका पर नोटिस भी जारी किया, जिसमें मामले को उच्च न्यायालय से शीर्ष अदालत में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया गया है। शीर्ष अदालत ने पूर्व में इसी तरह के मामले को पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ के समक्ष भेज दिया था। बता दें कि नुजैम पीके ने केरल हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल करके केंद्र सरकार के उक्‍त फैसले को चुनौती दी है।


नुजैम पीके की ओर से दलील दी गई है कि यह फैसला संविधान की मूल संरचना का उल्लंघन करता है। केरल हाईकोर्ट में दाखिल इस याचिका पर केंद्र सरकार की ओर से सालिसिटर जनरल तुषार मेहता सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए। उन्‍होंने सर्वोच्‍च न्‍यायालय से केरल हाईकोर्ट में चल रही कार्यवाही पर रोक लगाने के अलावा नुजैम पीके को नोटिस देने की गुजारिश की। केंद्र सरकार की ओर से याचिका में दलील दी गई है कि रिट याचिका में उठाए गए सवाल भी सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित याचिकाओं के समान हैं।


केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि केरल हाईकोर्ट में लंबित याचिका का स्थानांतरण बेहद जरूरी है क्योंकि इसी तरह की याचिका और कानून की वैधता को चुनौती देने वाली अन्य संबंधित अर्जियां सर्वोच्‍च अदालत के समक्ष ही लंबित हैं। उक्त रिट याचिका को सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित करने से सभी मामलों पर एक साथ सुनवाई हो सकेगी। सभी मामलों पर एक साथ सुनवाई से विभिन्न अदालतों की ओर से असंगत आदेश पारित होने की संभावना से बचा जा सकेगा।


सीरम ने DCGI को भेजा आवेदन, मांगी कोविशील्ड के लिए नियमित मार्केटिंग की इजाजत

सीरम ने DCGI को भेजा आवेदन, मांगी कोविशील्ड के लिए नियमित मार्केटिंग की इजाजत

सीरम इंस्टीट्यूट आफ इंडिया (SII) ने भारत के दवा महानियंत्रक (DCGI) से कोविशील्ड के लिए नियमित मार्केटिंग की मंजूरी मांगी है। अभी तक इसे देश में केवल आपात उपयोग की अनुमति मिली है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि एसआइआइ में सरकार एवं नियामक मामलों के निदेशक प्रकाश कुमार सिंह ने डीसीजीआइ को टीके के नियमित विपणन (मार्केटिंग) की मंजूरी देने का आवेदन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कोविड रोधी टीके के घरेलू निर्माताओं के साथ बैठक किए जाने के चंद दिन बाद भेजा है।


बैठक में टीका उत्पादन, उसकी क्षमता, उनसे जुड़े अनुसंधान जैसे मसलों के साथ इस बात को लेकर भी चर्चा की गई कि भारत को वैक्सीन उत्पादन में विश्व का नेतृत्व करना है और इस काम में सरकार और उद्योग जगत की क्या-क्या भूमिका हो सकती है। वहीं, अन्य टीके की तरह भारत कैसे कोरोना टीका के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर बन सकता है और उसकी कीमत भी दुनिया में सबसे कम हो।

 फाइजर-बायोएनटेक की कोरोना वैक्सीन को 16 वर्ष और अधिक आयु वर्ग के लिए अमेरिका के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) की पूर्ण अनुमति मिल चुकी है। देश में अब तक दी गईं कोरोना रोधी वैक्सीन की 100 करोड़ से अधिक डोज में से लगभग 90 प्रतिशत कोविशील्ड और लगभग 10 प्रतिशत भारत बायोटेक के कोवैक्सीन टीके से संबंधित डोज हैं। इनमें रूस की स्पुतनिक वी वैक्सीन की मात्रा एक प्रतिशत से भी कम है। सूत्रों ने बताया कि पुणे स्थित कंपनी ने आवेदन के साथ भारत से संबंधित कोविशील्ड के 2/3 चरण के क्लीनिकल परीक्षण की अंतिम अध्ययन रिपोर्ट भी जमा कर दी है।


आवेदन के अनुसार, कंपनी ने आठ जून को ब्रिटेन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका से 24, 244 लोगों पर किए गए तीसरे चरण के परीक्षण के नतीजे केंद्रीय दवा मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) के पास जमा कर दिए हैं। सिंह ने आवेदन में कहा है, 'हमारे कोविशील्ड टीके के साथ इतने बड़े पैमाने पर टीकाकरण और कोरोना संक्रमण की रोकथाम अपने आप में कोविशील्ड की सुरक्षा और प्रभाव का साक्ष्य है।'