कालेजों में रामायण और महाभारत पढ़ेंगे छात्र, इंजीनियरिंग के सिलेबस में शामिल होगा रामसेतु

कालेजों में रामायण और महाभारत पढ़ेंगे छात्र, इंजीनियरिंग के सिलेबस में शामिल होगा रामसेतु

मध्य प्रदेश के कालेजों में छात्रों को अब रामायण और महाभारत पढ़ाया जाएगा। राज्य के उच्च शिक्षा विभाग का कहना है कि इंजीनियरिंग छात्रों के पाठ्यक्रम में रामायण, महाभारत और रामचरितमानस (Ramayana, Mahabharata and Ramcharitmanas) को शामिल किया गया हैं।

राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव (MP Higher Education Minister Mohan Yadav) ने कहा कि जो कोई भी भगवान राम के चरित्र और समकालीन कार्यों के बारे में सीखना चाहता है, वह इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों के जरिए ऐसा कर सकता है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि हमारे अध्ययन बोर्ड के शिक्षकों ने एनईपी 2020 के तहत पाठ्यक्रम तैयार किया है... यदि हम अपने गौरवशाली इतिहास को आगे ला सकते हैं, तो इससे किसी को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।


इस शैक्षणिक सत्र से प्रभावी होने वाले नए पाठ्यक्रम के अनुसार, कला के छात्रों के लिए 'श्री रामचरितमानस के अनुप्रयुक्त दर्शन' को वैकल्पिक विषय के रूप में पेश किया गया है। वहीं, अंग्रेजी के फाउंडेशन कोर्स में प्रथम वर्ष के छात्रों को सी राजगोपालचारी की महाभारत की प्रस्तावना पढ़ाई जाएगी। राज्य के शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कहा कि अंग्रेजी और हिंदी के अलावा, योग और ध्यान को भी तीसरे फाउंडेशन कोर्स के रूप में पेश किया गया है, जिसमें 'ओम ध्यान' और मंत्रों का पाठ शामिल है।

मध्य प्रदेश में सभी कालेज और विश्वविद्यालय 15 सितंबर से खोले जाएंगे। छात्रों की 50 फीसद उपस्थिति के साथ पढ़ाई शुरू की जाएगी। इस दौरान संपूर्ण शैक्षणिक तथा अशैक्षणिक स्टाफ को मौजूद रहने का आदेश जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि टीकीकरण के प्रथम डोज की प्रमाण पत्र जमा करने के बाद ही कालेज और विश्वविद्यालय में प्रवेश करने दिया जाएगा।


कोवैक्सीन को WHO से आपातकालीन उपयोग के लिए जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद : स्वास्थ्य मंत्रालय

कोवैक्सीन को WHO से आपातकालीन उपयोग के लिए जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद : स्वास्थ्य मंत्रालय

स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को जानकारी दी कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक द्वारा विकसित कोरोना वैक्सीन कोवैक्सीन को आपातकालीन उपयोग (EUA) की मंजूरी जल्द ही मिलने  की उम्मीद है। स्वास्थ्य राज्य मंत्री डा भारती प्रवीण पवार ने समाचार एजेंसी एएनआइ को बताया कि उम्मीद है कि डब्लूएचओ जल्द ही कोवैक्सीन को आपात इस्तेमाल की मंजूरी देगा। इससे पहले खबर सामने आी थी कि भारत के इस टीके को 5 अक्टूबर तक आपात उपयोग के लिए डब्लूएचओ से मंजूरी मिलने की संभावना है।

वैक्सीन विकसित करने वाली कंपनी भारत बायोटेक वैक्सीन की सुरक्षा और क्लीनिकल ट्रायल का ​​​​डेटा और जोखिम प्रबंधन योजनाओं और अन्य कार्यान्वयन विचारों पर एक प्रजेंनटेशन देगी। कंपनी ने हाल ही में कहा था कि उसने आपात इस्तेमाल की मंजूरी के लिए कोवैक्सीन से संबंधित सभी डेटा डब्ल्यूएचओ को सौंप दिया है और वैश्विक उससे प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा कर रहा है।


कोवैक्सीन तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल में 77.8 प्रतिशत की प्रभावी पाया गया था। इसे हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक ने इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और नेशनल इंस्टीट्यूट की ऑफ वायरोलाजी (NIV) के सहयोग से विकसित किया था। भारत बायोटेक ने कहा था कि आपात इस्तेमाल की मंजूरी के लिए ट्रायल से संबंधित सभी डेटा डब्ल्यूएचओ को समक्ष प्रस्तुत कर दिया गया है और संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य एजेंसी द्वारा मांगे गए सभी स्पष्टीकरणों का जवाब भी दे दिया गया है।

कोवैक्सीन उन टीकों में शामिल है, जिसका इस्तेमाल भारत में कोरोना टीकाकरण के लिए किया जा रहा है। इसके अलावा पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट द्वारा कोवीशील्ड नाम से विकसित आक्सफोर्ड/एस्ट्राजेनेका की कोरोना वैक्सीन और रुस की वैक्सीन स्पुतनिक v का इस्तेमाल टीकाकरण के लिए किया जा रहा है। डब्लूएचओ ने अब तक फाइजर/बायोएनटेक,आक्सफोर्ड/ एस्ट्राजेनेका, जानसन एंड जानसन, माडर्ना और सिनोफार्म द्वारा निर्मित कोविड -19 के टीकों को आपात इस्तेमाल के लिए मंजूरी दी है।