पीएम मोदी: युवाओं को साफ नीयत के साथ बढ़ना होगा आगे

पीएम मोदी: युवाओं को साफ नीयत के साथ बढ़ना होगा आगे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को गांधीनगर स्थित पंडित दीनदयाल पेट्रोलियम विश्वविद्यालय के 8वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने बोला कि संस्थान से पास होने वाले विद्यार्थी देश की नयी ताकत बनेंगे. पीएम ने बोला कि एक समय था जब लोग प्रश्न उठाते थे कि इस तरह की यूनिवर्सिटी कितना आगे बढ़ पाएगी. लेकिन यहां के विद्यार्थियों ने, प्रोफेसर्स ने  यहां से निकले प्रोफेशनल्स ने इन सारे प्रश्न ों के उत्तर दे दिए हैं. अपने संबोधन में उन्होंने बोला कि 21वीं सदी का जो युवा है, उसको एक क्लीन स्लेट के साथ आगे बढ़ना होगा. पीएम ने बोला कि आप देखिए ज़िंदगी में वही लोग पास होते है, वही लोग कुछ कर दिखाते है जिनके ज़िंदगी में सेंस ऑफ रिस्पॉन्सिबिलिटी का भाव होता है.


यहां पढ़ें पीएम मोदी के संबोधन की बड़ी बातें
  • इच्छाओं के अंबार से संकल्प की शक्ति अपरंपार होती है. करने के लिए बहुत कुछ है, देश लिए पाने को बहुत कुछ है, पर आपके लक्ष्य टुकड़ों में बिखरे नहीं होने चाहिए. आप कमिटमेंट के साथ आगे बढ़ेंगे तो अपने भीतर ऊर्जा का भंडार महसूस करेंगे.
  • सेंस ऑफ रिस्पॉन्सिबिलिटी  पर्पस ऑफ जीवन दो ऐसी पटरियां हैं, जिनपर आपके संकल्पों की गाड़ी बहुत तेजी से दौड़ सकती है. मेरा आपसे आग्रह है कि अपने भीतर एक सेंस ऑफ रिस्पॉन्सिबिलिटी को जरूर बनाए रखिए.
  • आज की जो पीढ़ी है, 21वीं सदी का जो युवा है, उसको एक क्लीन स्लेट के साथ आगे बढ़ना होगा. कुछ लोगों के मन में ये जो पत्थर की लकीर बनी हुई है, कि कुछ बदलेगा नहीं, उस लकीर को क्लीन करना होगा. क्लीन हार्ट का मतलब है साफ नीयत.
  • क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि 1920 में युवा क्या चाहते थे? उनकी महत्वाकांक्षाएं क्या थीं? सभी ने केवल स्वतंत्रता का सपना देखा  अपने सपनों को दांव पर लगा दिया. 1920-1947 के बीच के युवाओं ने अपने देश के लिए अपना सर्वस्व दे दिया था. मैं चाहता हूं कि आप सभी उनसे प्रेरणा लें.
  • आप देखिए ज़िंदगी में वही लोग पास होते है, वही लोग कुछ कर दिखाते है जिनके ज़िंदगी में सेंस ऑफ रिस्पॉन्सिबिलिटी का भाव होता है. विफल वो होते है जो सेंस ऑफ बर्डन में जीते है. सेंस ऑफ रिस्पॉन्सिबिलिटी का भाव आदमी के ज़िंदगी में सेंस ऑफ अपरच्यूनिटी को भी जन्म देता है.
  • ऐसा नहीं है कि आप अपने ज़िंदगी में पहली बार किसी परेशानी का सामना कर रहे होंगे, ऐसा भी नहीं है कि ये चुनौती भी आखिरी होगी. ऐसा नहीं है कि पास व्यक्तियों के पास समस्याएं नहीं होतीं. लेकिन जो चुनौतियों को स्वीकार करता है, उनका मुकाबला करता है, वो पास होता है.
  • एक ऐसे समय में ग्रेजुएट होना जब दुनिया इतने बड़े संकट से जूझ रही है,ये कोई सरल बात नहीं है. लेकिन आपकी क्षमताएं इन चुनौतियों से कहीं ज्यादा बड़ी हैं. प्रोबल्म्स क्या हैं, इससे ज्यादा जरूरी ये है कि आपका पर्पस क्या है, आपकी प्रिफरेंस क्या है  आपका प्लान क्या है?
  • आज देश अपने कार्बन फुटप्रिंट को 30-35% तक कम करने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है. कोशिश है कि इस दशक में अपनी ऊर्जा जरूरतों में नेचुरल गैस की हिस्सेदारी को हम 4 गुणा तक बढ़ाएं.
  • मुझे विश्वास है कि आप अपनी स्किल, अपने टैलेंट, अपने प्रोफेशनलिज्म से आत्मनिर्भर भारत की बड़ी ताकत बनके उभरेंगे. मैं आरंभ काल से इस विश्वविद्याल की परियोजनाओं से जुड़ा रहा हूं.
  • एक समय था जब लोग प्रश्न उठाते थे कि इस तरह की यूनिवर्सिटी कितना आगे बढ़ पाएगी. लेकिन यहां के विद्यार्थियों ने, प्रोफेसर्स ने  यहां से निकले प्रोफेशनल्स ने इन सारे प्रश्न ों के उत्तर दे दिए हैं.
  • आज आप ऐसे समय में इंडस्ट्री में कदम रख रहे हैं, जब महामारी के चलते पूरी दुनिया के एनर्जी सेक्टर में भी बड़े परिवर्तन हो रहे हैं. ऐसे में आज हिंदुस्तान में एनर्जी सेक्टर में ग्रोथ की, उद्यमिता की, रोजगार की असीम संभावनाएं हैं.
  • मुझे ये देखकर खुशी होती है कि ये विश्वविद्यालय आज पूरे विश्व में अपनी पहचान बना रहा है. मैं आज यहां एक मुख्य मेहमान के रूप में नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय परिवार के एक मेम्बर के रूप में आया हूं.
  • पंडित दीनदयाल उपाध्याय पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी के 8वें कॉन्वोकेशन के मौका पर आप सभी को बहुत बहुत बधाई. आज जो साथी ग्रेजुएट हो रहे हैं, उनको  उनके माता-पिता को भी बहुत-बहुत शुभकामनाएं.

पहली बार बिहार की सेंट्रल कारागार में ATM की सुविधा

पहली बार बिहार की सेंट्रल कारागार में ATM की सुविधा

नयी दिल्लीः बिहार के केंद्रीय जेल में सजा काट रहे कैदियों के लिए एक अच्छी खबर है दरअसल, बहुत जल्द सेंट्रल कारागार में कैदियों को कैश निकालने की सुविधा मिलने जा रही है जी हां, हाल ही में समाचार मिली है कि बिहार के पुर्णिया जिले में स्थित केंद्रीय जेल में कैदियों की सुविधाओं के लिए एटीएम की सेवाएं जल्द प्रारम्भ होने वाली है तमाम कैदियों को एटीएम कार्ड भी जारी हो चुके हैं 

ये है कारागार में ATM लगने का मकसद
पूर्णिया सेंट्रल कारागार के आधिकारियों के मुताबिक, जल्द ही जेल परिसर के अंदर एक एटीएम (Automated Teller Machine) इंस्टॉल की जाएगी ताकि कैदियों को उनके दैनिक उपयोग के लिए पैसे निकालने में सहायता मिल सके इसके साथ ही पूर्णिया सेंट्रल कारागार ऐसा करने वाला बिहार का पहला कारागार बन गया है ऑफिसरों ने बताया कि कारागार प्रशासन का ये कदम कैदियों के परिवार के सदस्यों और परिचितों की भीड़ को कारागार गेट पर रोककर उन्हें नकदी सौंपने के मकसद से उठाया गया है

400 कैदियों को मिल चुके हैं ATM कार्ड
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पूर्णिया सेंट्रल कारागार के अधीक्षक (superintendent) जितेंद्र कुमार ने एक बयान में बोला है कि उन्होंने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ऑफ इंडिया को कारागार के विषय में पत्र लिखा है जितेंद्र कुमार ने बताया, ''मैंने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) को एक पत्र लिखकर उनसे एटीएम स्थापित करने का निवेदन किया है '' पूर्णिया सेंट्रल कारागार अधीक्षक के अनुसार, कुल 750 में से लगभग 600 कैदियों के खाते भिन्न-भिन्न बैंकों में हैं अब तक 400 कैदियों को एटीएम कार्ड जारी किए जा चुके हैं जबकि बाकी को जल्द ही एटीएम कार्ड दिए जाएंगे

एटीएम लगने से कम होगी कारागार की भीड़
अधीक्षक ने बताया कि कैदी डेली यूज की वस्तुएं जैसे साबुन, हेयर तेल और खाने-पीने की चीजें खरीदने के लिए कार्ड का इस्तेमाल कर सकेंगे उन्होंने आगे बोला कि एटीएम की स्थापना से भीड़ को कम करने में सहायता मिलेगी क्योंकि परिवार के मेम्बर या अधिकतर कैदियों के परिचित पैसा देने के लिए आते हैं कारागार प्रशासन के नियम के अनुसार, हर कैदी को 500 रुपए रखने की अनुमति है कैदियों को जनवरी 2019 तक चेक द्वारा भुगतान किया गया था और उसके बाद वे अपनी जमापूंजी को प्राप्त करने बैंक की लाइन में लगते थे  

हर माह कैदियों को मिलता है इतना वेतन
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्रीय कारागार में बंद कैदियों को उनके 4 से 8 घंटे के कार्य के लिए 52 रुपये से 103 रुपये के बीच वेतन दिया जाता है . ये मेहतनामा कैदियों के खातों में जमा किया जाता है माना जा रहा है कि यदि कारागार के अंदर 10 प्रस्तावित छोटे और कुटीर उद्योग स्थापित किए जाते हैं, तो उनकी मजदूरी 112 रुपये से बढ़कर 156 रुपये हो जाएगी हाल ही में, कैदियों द्वारा बनाए गए फेस मास्क को कोसी और सीमांचल क्षेत्रों की विभिन्न जेलों को भी दिए गए थे

नागपुर के सेंट्रल कारागार में भी जारी हुए थे ATM कार्ड
आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि 4 वर्ष पहले, नागपुर केंद्रीय कारागार में कैदियों को परिसर के अंदर उपयोग के लिए एसबीआई एटीएम कार्ड जारी कराए गए थे कारागार को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चुना गया था इस स्कीम का मकसद पूरे महाराष्ट्र की 9 सेंट्रल जेलों में 10,000 से अधिक कैदियों को एटीएम कार्ड की सुविधा देना का था  


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