अर्जुन को चिडिय़ा की आंख दिखती थी, आप बच्चों को बस पढ़ाई दिखाई दें : शिवराज

अर्जुन को चिडिय़ा की आंख दिखती थी, आप बच्चों को बस पढ़ाई दिखाई दें : शिवराज

सीएम शिवराज सिंह चौहान ने बोला कि विद्यार्थियों के लिए अच्छी एजुकेशन और स्वास्थ्य, हमारे लिए दोनों ही जरूरी हैं. प्रदेश में कोविड-19 संक्रमण को देखते हुए धीरे-धीरे हमने कक्षाएं प्रारंभ की हैं. नौवीं और दसवीं की कक्षाएं भी 5 अगस्त से प्रारंभ की जा रही हैं. अभी ये कक्षाएं हफ्ते में दो-दो दिन ही लगेगीं. यह बात शिवराज ने शनिवार को मुख्यमंत्री हाउस से 9वीं से 12वीं तक के स्कूली बच्चों से वचुर्अल संवाद में कही. शिवराज ने बोला कि कोविड-19 काल में ऑन लाइन क्लासेस हों या टीवी कार्यक्रम, रेडियो, वाट्सएप गु्रप आदि के जरिए शिक्षण चलता रहा.

अर्जुन कथा : बोल- तुम्हें बस पढ़ाई दिखाई दें
शिवराज ने बोला कि विद्यार्थियों को अपना लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए. उन्होंने विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य को अर्जुन की तरह सुनिश्चित करने के लिए कहा. जिस प्रकार तीरंदाजी के प्रशिक्षण के समय गुरु द्रोणाचार्य के यह पूछने पर कि उसे क्या दिखाई दे रहा है, अर्जुन ने बोला था कि उसे न पेड़ दिखाई दे रहा है और न चिडिय़ा, उसे केवल चिडिय़ा की आंख दिखाई दे रही है. विद्यार्थियों को भी एकाग्रचित्त होकर अपनी पढ़ाई करनी चाहिए. भविष्य की चिंता मत करो, केवल परिश्रम करो.

शिवराज बोले- बेटे के जन्म पर सबसे पहले गायत्री मंत्र सुनाया था 
शिवराज ने अभिभावकों से बोला कि बच्चों के पहले शिक्षक माता-पिता ही होते हैं. मुझे याद है कि मेरे दोनों बेटों के जन्म के बाद मैंने उनके कान में सबसे पहले गायत्री मंत्री सुनाया था और आज भी मैं उन्हें धार्मिक ग्रंथों के शोध के लिए प्रेरित करता रहता हूँ. इस चुनौतीपूर्ण समय में को-एजुकेटर के रूप में उनकी किरदार और अधिक बढ़ जाती है. आप लोग परिवार में पढ़ाई के लिए अनुकूल माहौल बनाएं और हमारा घर हमारा विद्यालय की परिकल्पना को साकार करें. बच्चों को पढ़ाई के साथ खेलकूद, व्यायाम, प्राणायाम आदि फिजिकल सक्रिय िटी भी कराते रहें.

नवम्बर में नेशनल अचीवमेंट सर्वे-
शिवराज ने बोला कि नयी एजुकेशन नीति के अनुसार नवम्बर में एन  एस (राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण)भी आयोजित होगा. इसमें मध्यप्रदेश को टॉप 10 में लाने का लक्ष्य रखें. नयी एजुकेशन नीति में व्यावसायिक एजुकेशन पर अधिक जोर दिया गया है. शिवराज ने बच्चों से बोला कि पढ़ाई के साथ अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान रखें.

अक्ल नहीं है सोचोगे, तो मुंह की मक्खी भी पड़ोसी उड़ाएंगे-
शिवराज बोले- ये जो आजादी हमें मिली है, वह अंग्रेजों ने चांदी की तस्तरी में रखकर नहीं दी है. हजारों क्रांतिकारियों और शहीदों ने लाल रक्त से इस भूमि को पवित्र किया, तब ये आजादी मिली है. इसकी मूल्य पहचानों. आजादी के त्याग, तपस्या को समझो. शिवराज ने जलिया वाला बाग काण्ड की कहानी भी सुनाई. फिर शिवराज ने बोला कि आप लोग आयु के उस पड़ाव पर हो, जब अपने जीवन की दिशातय कर सकते हो. इसमें माता-पिता, गुरूओ का योगदान लो. एक रोडमैप बनाकर कार्य करो.कोई सोचेगा कि मुझमें अक्ल ही नहीं है, तो मुंह की मक्खी भी पड़ोसी को उड़ानी पड़ेगी. हम जैसा सोचते हें, वैसा बन जाते हैं. इसलिए आज से ही सोचो कि कुछ करना है. कुछ बनना है. उसके लिए लक्ष्य तय करके आगे बढ़ो.

पिज्जा-बर्गर नुकसानदायक, कम खायें-
शिवराज ने गुजरा जमाना बचपन का पंक्तियां गाते हुए बोला कि मुझे आज भी अपने बचपन के दोस्त, अपने टीचर और शैतानियां और खान-पान सब याद आता है. हम भी स्कूल में बेर, कबीट,आम आदि खाया करते थे. अब आप लोग पिज्जा, बर्गर, कोल्ड ड्रिंक जेसे जंक फूड अधिक खा रहे हैं, जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हैं. आप ये खायें, परंतु कभी कभी.

वचुर्अल संवाद :
शिवराज ने वचुर्अल संवाद में विदिशा की आस्था तिवारी, दमोह के प्रशांत, जबलपुर की मान्या साहू, रायसेन के मोहित शर्मा और भोपाल की श्रुति गुप्ता से वार्ता की. आस्था से शिवराज ने पूछा कि क्या पसंद है, तो आस्था ने बोला एंकरिंग. शिवराज बोले- अच्छा बोलती हो, अच्छी वक्ता हो. आगे क्या बनना चाहती हो, तो आस्था ने उत्तर दिया कि आईएएस अधिकारी बनना है. शिवराज ने बोला कि आपका आत्मविश्वास देखकर विश्वास है िक आप आईएएस अधिकारी बनेंगी. इसी तरह अन्य बच्चों से भी चर्चा हुई.

ये दिए सूत्र-
- जैसा कहें, वैसा करना अपने चरित्र को गढ़ता है.
- गलत संगति से बचना भी आवश्यक है.
- गुरुओं के लिए भी अध्यापन से बड़ा कोई धर्म नहीं.
- बच्चे एकाकी महसूस न करें, अभिभावक समय दें.
- अपने मस्तिष्क की क्षमता के बहुत कम भाग को इस्तेमाल करते हैं.

- सरस्वती के भण्डार की बडी अजूबी बात, आप जितना खर्चोगे उतना बढ़ेगा.
- हम जैसा सोचते हैं वैसा बन जाते हैं. बड़ी सोच रखो, लक्ष्य रखकर कार्य करो.


कोवैक्सीन को WHO से आपातकालीन उपयोग के लिए जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद : स्वास्थ्य मंत्रालय

कोवैक्सीन को WHO से आपातकालीन उपयोग के लिए जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद : स्वास्थ्य मंत्रालय

स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को जानकारी दी कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक द्वारा विकसित कोरोना वैक्सीन कोवैक्सीन को आपातकालीन उपयोग (EUA) की मंजूरी जल्द ही मिलने  की उम्मीद है। स्वास्थ्य राज्य मंत्री डा भारती प्रवीण पवार ने समाचार एजेंसी एएनआइ को बताया कि उम्मीद है कि डब्लूएचओ जल्द ही कोवैक्सीन को आपात इस्तेमाल की मंजूरी देगा। इससे पहले खबर सामने आी थी कि भारत के इस टीके को 5 अक्टूबर तक आपात उपयोग के लिए डब्लूएचओ से मंजूरी मिलने की संभावना है।

वैक्सीन विकसित करने वाली कंपनी भारत बायोटेक वैक्सीन की सुरक्षा और क्लीनिकल ट्रायल का ​​​​डेटा और जोखिम प्रबंधन योजनाओं और अन्य कार्यान्वयन विचारों पर एक प्रजेंनटेशन देगी। कंपनी ने हाल ही में कहा था कि उसने आपात इस्तेमाल की मंजूरी के लिए कोवैक्सीन से संबंधित सभी डेटा डब्ल्यूएचओ को सौंप दिया है और वैश्विक उससे प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा कर रहा है।


कोवैक्सीन तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल में 77.8 प्रतिशत की प्रभावी पाया गया था। इसे हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक ने इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और नेशनल इंस्टीट्यूट की ऑफ वायरोलाजी (NIV) के सहयोग से विकसित किया था। भारत बायोटेक ने कहा था कि आपात इस्तेमाल की मंजूरी के लिए ट्रायल से संबंधित सभी डेटा डब्ल्यूएचओ को समक्ष प्रस्तुत कर दिया गया है और संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य एजेंसी द्वारा मांगे गए सभी स्पष्टीकरणों का जवाब भी दे दिया गया है।

कोवैक्सीन उन टीकों में शामिल है, जिसका इस्तेमाल भारत में कोरोना टीकाकरण के लिए किया जा रहा है। इसके अलावा पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट द्वारा कोवीशील्ड नाम से विकसित आक्सफोर्ड/एस्ट्राजेनेका की कोरोना वैक्सीन और रुस की वैक्सीन स्पुतनिक v का इस्तेमाल टीकाकरण के लिए किया जा रहा है। डब्लूएचओ ने अब तक फाइजर/बायोएनटेक,आक्सफोर्ड/ एस्ट्राजेनेका, जानसन एंड जानसन, माडर्ना और सिनोफार्म द्वारा निर्मित कोविड -19 के टीकों को आपात इस्तेमाल के लिए मंजूरी दी है।