Stay Home Stay Empowered: ये गैजेट्स बताएंगे आपको कब-क्या खाना चाहिए और क्या नहीं, जानें

Stay Home Stay Empowered: ये गैजेट्स बताएंगे आपको कब-क्या खाना चाहिए और क्या नहीं, जानें

क्या तकनीक आपको बेहतर खानपान में मदद कर सकती है? जवाब है हां। अब कई डिजिटल हेल्थ कंपनियां ऐसी डिवाइस बना रही हैं, जो पर्सन्लाइज्ड न्यूट्रिशिन पर आधारित हैं। यानी ये गैजेट हर व्यक्ति को उनकी सेहत के हिसाब से बताती हैं कि उन्हें कब क्या खाना चाहिए और क्या नहीं। वर्क फ्रॉम होम और कोरोना महामारी के इस दौर में जब एक बहुत बड़ी आबादी घर से काम कर रही है, ऐसे में यह तकनीक लोगों के खानपान और सेहत को सुधारने में मददगार साबित हो सकती है। हमें यह भी याद रखना चाहिए कि जो लोग घर से काम नहीं भी कर रहे हैं, उनका बाहर आना-जाना या शारीरिक सक्रियता कम हुई है।

विशेषज्ञों का दावा है कि जल्द ही यह इंडस्ट्री अरबों डॉलर की हो जाएगी। ये नए गैजेट्स लोगों के खानपान को पूरी तरह बदल देंगे। इससे मेटाबोलिज्म की गुणवत्ता और शरीर की ऊर्जा का स्तर दोनों बेहतर होंगे।

रियल टाइम में ब्लड शुगर लेवल पर नजर


ये गैजेट्स उपयोगकर्ता के ब्लड शुगर लेवल को मॉनिटर करते हैं और इस डाटा को आपके स्मार्टफोन पर भेज देते हैं। इस तरह आप रियल टाइम में देख पाते हैं कि आपकी डाइट, नींद, व्यायाम और तनाव का आपके शुगर लेवर पर क्या प्रभाव पड़ता है। यूजर रियल टाइम में जान पाते हैं कि उनके पसंदीदा खाने और नाश्ते का प्रभाव शुगर लेवर पर क्या पड़ रहा है। वह बढ़ रहा है या गिर रहा है। खाना खाने के बाद उन्हें थकान या सुस्ती तो नहीं लग रही है। वहीं इन डिवाइस से यूजर को यह भी पता चलेगा कि उनके लिए कितना व्यायाम या टहलना अच्छा है। कुछ यूजर्स को यह भी पता चलेगा कि उनमें कहीं टाइप-2 डाइबिटीज तो नहीं हो रही है या मेटाबोलिज्म से संबंधित कोई अन्य बीमारी का खतरा तो नहीं है।


एक तरह का खाना हर व्यक्ति पर अलग-अलग असर करता है

ज्यादातर लोग जानते हैं कि शुगर वाले जंक फूड जैसे कूकीज, केक और सोडा ब्लड शुगर लेवल को बढ़ा देते हैं। पर शोध से पता चलता है कि लोगों पर इसका अलग-अलग और कई रेंज में प्रभाव पड़ता है। इजराइल में 2015 में 800 लोगों पर हुए एक शोध में पाया गया कि एक जैसा खाना जैसे ब्रेड-बटर या चॉकलेट खाने पर कुछ लोगों का शुगर लेवल एकाएक बढ़ गया, लेकिन कुछ लोगों पर इसका खास प्रभाव नहीं पड़ा। शोधकर्ताओं ने पाया कि लोगों का अलग-अलग वजन, जीन, पेट के जीवाणु, जीवनशैली और इंसुलिन संवेदनशीलता इसके कारण हैं। इसके चलते ही लोग एक जैसा खाते हैं, लेकिन उन पर प्रभाव अलग-अलग पड़ता है।


कैसे काम करती है यह तकनीक

इस तकनीक में एक डिवाइस (एक छोटा सा पैंच) होता है, जिसमें छोटा सा सेंसर लगा होता है। यह सेंसर मानव के बाल के आकार का होता है। इस पैंच को बांह में पीछे की ओर लगा दिया जाता है। यह सेंसर स्कीन के नीचे मौजूद तरल की जांच करता है और ब्लड शुगर का स्तर बताता है।

नए दौर की तकनीक

कई दशक पहले ग्लूकोज मॉनिटर का आविष्कार इसलिए हुआ था कि डायबिटीज के मरीजों के ब्लड शुगर लेवल को सामान्य रखा जा सके। इसके तहत दिन में कई बार उंगलियों से सैंपल लेकर शुगर की जांच की जाती है। लेकिन नई तकनीक में डिजिटल कंपनियां पर्सन्लाइज्ड न्यूट्रिशन की बढ़ती मांग को पूरा करने की कोशिश कर रही हैं। पर्सन्लाइज्ड न्यूट्रिशन कंपनी लेवल की सह-संस्थापक डॉ कैसी मिंस बताती हैं कि ग्लूकोज मॉनिटर बायोमार्कर पर नजर रखता है। यह हाथ पर बंधी छोटी लैबोरेट्री (प्रयोगशाला) की तरह काम करता है। पहली बार इस तकनीक का इस्तेमाल मुख्य आबादी पर किया जा रहा है, ताकि वह जीवनशैली के बेहतर फैसले ले सकें।


बीमारियों की रोकथाम में भी मदद मिलेगी

शोधकर्ताओं के मुताबिक, शुगर लेवल की लगातार जांच से टाइप-3 डाइबिटीज के अलावा दिल की बीमारियों और क्रॉनिक इन्फ्लेमेशन रोकथाम में मदद मिलेगी, क्योंकि इन बीमारियों में भी शुगर लेवल में लगातार स्विंग होता रहता है। वहीं गठिया, डिप्रेशन, कैंसर और डिमेंशिया की रोकथाम भी की जा सकेगी। 


कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण से गर्भवती महिलाओं को घबराने की नहीं, सजग व सतर्क रहने की है जरूरत

कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण से गर्भवती महिलाओं को घबराने की नहीं, सजग व सतर्क रहने की है जरूरत

कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के कारण लोगों में तनाव ज्यादा है। गर्भवती महिलाओं के जेहन में भी तमाम तरह के सवाल उठ रहे हैं। देहरादून स्थित कंबाइंड मेडिकल इंस्टीट्यूट की वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ सुमिता प्रभाकर की सलाह गर्भवती महिलाओं के लिए काफी अहमियत रखती है। उनका कहना है कि यह वक्त घबराने का नहीं, बल्कि सजग एवं सतर्क रहने का है।

गर्भस्थ शिशु में नहीं होता संक्रमण

आज तक कोरोना का वायरस एमनियोटिक द्रव या ब्रेस्ट मिल्क के नमूनों में नहीं पाया गया है। भ्रूण में किसी तरह के संक्रमण का कोई प्रमाण नहीं है। ऐसा भी कोई डाटा नहीं है, जो सिद्ध करता हो कि कोरोना वायरस संक्रमण से गर्भपात या गर्भस्थ शिशु नुकसान की संभावना बढ़ जाती है।

ब्रेस्ट फीडिंग कराते समय भी मास्क पहनें

मेडिकल रिपोर्ट बताती हैं कि ब्रेस्ट मिल्क से वायरस संक्रमण का खतरा नहीं है। चूंकि यह वायरस रेस्पिरेट्री ड्रॉपलेट्स के जरिए फैलता है, इसलिए स्तनपान कराते वक्त मास्क पहनें। ब्रेस्ट फीडिंग और बच्चों को उठाने से पहले अच्छे से हाथ धो लें जिससे नवजात में संक्रमण का खतरा न के बराबर रहे।

श्वसन प्रणाली को स्वस्थ रखें

इस समय बाहर वॉक पर नहीं जाया जा सकता इसलिए श्वसन प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए योग एक अच्छा विकल्प है। प्राणायाम आपके फेफड़ों को मजबूत करने के साथ ही रक्त संचार बढ़ाने में भी मदद करेगा। पर्याप्त आराम लेना जरूरी है। साथ ही पानी भी खूब पीती रहें।

इम्यूनिटी पर दें ध्यान

विटामिन डी और सी से शरीर को मजबूती मिलेगी। विटामिन डी के लिए बालकनी में बैठकर धूप ले सकती हैं। नींबू, आंवला, संतरा आदि से विटामिन सी की पूर्ति होती है। इससे सर्दी-जुकाम से लड़ने में मदद मिलती है। हड्डियों के पोषण और रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने के लिए कैल्शियम भी बहुत जरूरी है। इसके लिए पालक खाएं। प्रोटीन के लिए दाल, हरी सब्जी, मौसम फल आदि भरपूर लें।


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