ब्रेड खाना सेहत के लिए है कितना सही? खाते समय रखें इन बातों का ध्यान

ब्रेड खाना सेहत के लिए है कितना सही? खाते समय रखें इन बातों का ध्यान

ब्रेड को सिर्फ ब्रेकफास्ट में ही नहीं, बल्कि इसे स्नैक्स, लंच और डिनर में भी खाया जाता है। इसे बच्चेहो या बड़े, सभी बड़े ही चाव से खाते हैं। न्यूट्रिशनिस्ट की मानें तो ब्रेड के इसी बढ़ते सेवन ने सेहत विशेषज्ञों को चिंतित कर दिया है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवार्यमेंट के हाल के एक अध्ययन के अनुसार सभी तरह की ब्रेड में कार्सिनोजन्स केमिकल्स होते हैं, जो कैंसर और थॉयराइड रोगों का कारण बनते हैं। हमारे यहां बिकने वाली तमाम ब्रेड के 84 प्रतिशत नमूनों में पोटैशियम ब्रोमेट व पोटैशियम आयोडेट पाया जाता है। इन ऑक्सिडाइजिंग एजेंट्स पर कई देशों में प्रतिबंध लगा है।

सेहत से समझौता न करें

व्हाइट ब्रेड के बजाय साबुत अनाज की ब्रेड या 100 प्रतिशत गेहूं की ब्रेड चुनने की सलाह देते हैं, क्योंकि व्हाइट ब्रेड ज्यादा प्रोसेस्ड सफेद आटा यानी मैदा से बनाया गया है। अगर आपको ब्रेड में व्हाइट ब्रेड का ही सेवन करना है तो अपने आसपास एक बेकरी तलाशें, जहां आप उनसे तरह-तरह की ब्रेड्स बनवा सकते हैं। इन होममेड बेकरियों की ब्रेड में फाइबर अधिक और चीनी कम मिल सकती है। किराने की दुकानों से मिलने वाली ब्रेड्स होममेड ब्रेड की तुलना में ज्यादा प्रोसेस्ड होंगी। इस तरह की ब्रेड शुगर के स्तर को बढ़ाती है।


बेकरी से ताज़ी ब्रेड बनवाएं, जिसमें चीनी की मात्रा कम और फाइबर में अधिक हो, कम से कम 3 ग्राम प्रति सर्विंग होना चाहिए। ब्रेड खाने से पहले और बाद में अपने शरीर की प्रतिक्रिया जानने के लिए शुगर लेवल की जांच करें। इस रीडिंग के आधार पर ही ब्रेड खाना या न खाना सुनिश्चित करें।

अगर हो दिल की बीमारी

ब्रेड्स ग्लूटन युक्त होते हैं और सामान्य परिस्थतियों में दिल संबंधी खाद्य पदार्थों के योग्य नहीं होते हैं, लेकिन कई प्रकार के ब्रेड हैं, जो अच्छे कोलेस्ट्रॉल और स्वस्थ फाइबर युक्त कार्ब्स से भरपूर हैं। लो फैट वाली ब्रेड को आमतौर पर ब्राउन ब्रेड कहा जाता है, जो सोया के साथ बनाई जाती है और वह आपके दिल के लिए अच्छी होती हैं। अन्य प्रकार के ब्रेड होल व्हीट ब्रेड होते हैं जैसे कि व्हीट ब्रेड और रागी ब्रेड। अलसी और अखरोट ब्रेड को ओमेगा-3 फैटी एसिड के साथ फोर्टिफाइड किया जाता है। चूंकि ये अच्छे कोलेस्ट्रॉल से भरपूर होते हैं, इसलिए ये भी दिल के लिए स्वस्थ होते हैं। आटे ब्रेड खाई जा सकती है, यह बैड कोलेस्ट्रॉल को कम कर देती है।


फिटनेस की बात

आप जो भी ब्रेड खाते हैं, उसका प्रत्येक टुकड़ा 100 प्रतिशत साबुत गेहूं का होना चाहिए, इसलिए होलग्रेन या मल्टीग्रेन ब्रेड का ही सेवन करें। ब्रेड की 2 स्लाइस आपको उचित फाइबर की पूर्ति करेगी। वहीं कार्ब्स के लिए भी आप ब्रेड की दो स्लाइस दिनभर में ले सकते हैं। कई लोगों के डाइट चार्ट में शाम के स्नैक्स में दो मल्टीग्रेन ब्रेड पर पीनट बटर लगाकर खाने की सलाह दी जाती है, क्योंकि फिटनेस की बात हो तो हमें प्रोटीन, कार्ब्स और फाइबर इन सभी चीज़ों से युक्त संतुलित भोजन करना होता है। वजन कम करना चाहते हैं तो व्हाइट ब्रेड से दूरी बना लें। थोड़ी मात्रा में ब्रेड खाना नुकसानदेह नहीं है, बशर्ते आप इससे ब्रेड रोल और ब्रेड पकौड़ा जैसी चीज़ें न खाएं।


कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण से गर्भवती महिलाओं को घबराने की नहीं, सजग व सतर्क रहने की है जरूरत

कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण से गर्भवती महिलाओं को घबराने की नहीं, सजग व सतर्क रहने की है जरूरत

कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के कारण लोगों में तनाव ज्यादा है। गर्भवती महिलाओं के जेहन में भी तमाम तरह के सवाल उठ रहे हैं। देहरादून स्थित कंबाइंड मेडिकल इंस्टीट्यूट की वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ सुमिता प्रभाकर की सलाह गर्भवती महिलाओं के लिए काफी अहमियत रखती है। उनका कहना है कि यह वक्त घबराने का नहीं, बल्कि सजग एवं सतर्क रहने का है।

गर्भस्थ शिशु में नहीं होता संक्रमण

आज तक कोरोना का वायरस एमनियोटिक द्रव या ब्रेस्ट मिल्क के नमूनों में नहीं पाया गया है। भ्रूण में किसी तरह के संक्रमण का कोई प्रमाण नहीं है। ऐसा भी कोई डाटा नहीं है, जो सिद्ध करता हो कि कोरोना वायरस संक्रमण से गर्भपात या गर्भस्थ शिशु नुकसान की संभावना बढ़ जाती है।

ब्रेस्ट फीडिंग कराते समय भी मास्क पहनें

मेडिकल रिपोर्ट बताती हैं कि ब्रेस्ट मिल्क से वायरस संक्रमण का खतरा नहीं है। चूंकि यह वायरस रेस्पिरेट्री ड्रॉपलेट्स के जरिए फैलता है, इसलिए स्तनपान कराते वक्त मास्क पहनें। ब्रेस्ट फीडिंग और बच्चों को उठाने से पहले अच्छे से हाथ धो लें जिससे नवजात में संक्रमण का खतरा न के बराबर रहे।

श्वसन प्रणाली को स्वस्थ रखें

इस समय बाहर वॉक पर नहीं जाया जा सकता इसलिए श्वसन प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए योग एक अच्छा विकल्प है। प्राणायाम आपके फेफड़ों को मजबूत करने के साथ ही रक्त संचार बढ़ाने में भी मदद करेगा। पर्याप्त आराम लेना जरूरी है। साथ ही पानी भी खूब पीती रहें।

इम्यूनिटी पर दें ध्यान

विटामिन डी और सी से शरीर को मजबूती मिलेगी। विटामिन डी के लिए बालकनी में बैठकर धूप ले सकती हैं। नींबू, आंवला, संतरा आदि से विटामिन सी की पूर्ति होती है। इससे सर्दी-जुकाम से लड़ने में मदद मिलती है। हड्डियों के पोषण और रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने के लिए कैल्शियम भी बहुत जरूरी है। इसके लिए पालक खाएं। प्रोटीन के लिए दाल, हरी सब्जी, मौसम फल आदि भरपूर लें।


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