भविष्य के लिहाज से अपनी चौहद्दी दुरुस्त करने में जुटे बिहार के दल

भविष्य के लिहाज से अपनी चौहद्दी दुरुस्त करने में जुटे बिहार के दल

उत्तर प्रदेश की तरह बिहार में भी कई प्रयोग हो चुके हैं- पहले राजग गठबंधन, फिर महागठबंधन और फिर से राजग की सरकार... बिहार की सियासत में देखा जाए तो भाजपा, जदयू और राजद मुख्य खिलाड़ी रहे हैं जबकि छोटे दलों का खेमा बदलता रहा है। मौजूदा वक्‍त में देखें तो गठबंधन सही चल रहा है लेकिन धीरे-धीरे इन तीनों प्रमुख दलों ने अपनी चौहद्दी जिस तरह मजबूत करनी शुरू की है वह भविष्य की आहट देने लगा है।

कमोबेश इन दलों में यह कवायद महसूस की जा रही है कि बड़े दलों के साथ हिस्सेदारी और परिणामस्वरूप आने वाले दबाव के बजाय छोटे दलों के समूह के साथ भविष्य की राह गढ़ी जानी चाहिए। तीनों दलों के नेतृत्व पर ध्यान देने की जरूरत है। राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद हैं और प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह, अगड़ी जाति से। उन्होंने हाल में इस्तीफे की पेशकश की थी लेकिन उन्हें मना लिया गया।

नीतीश कुमार जहां खुद मुख्यमंत्री हैं। जदयू के प्रदेश संगठन की कमान वशिष्ठ नारायण सिंह की जगह उमेश कुशवाहा के हाथों में दी गई थी। अब पहली बार राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद अगड़ी जाति से राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह को सौंपी गई। भाजपा ने चुनाव से पहले संजय जायसवाल के हाथों संगठन की कमान दी थी और उपमुख्यमंत्री पद पर अति पिछड़ी जाति की रेणु देवी और ओबीसी से आने वाले तारकिशोर प्रसाद को बिठाया था।

बिहार के कोटे से केंद्रीय मंत्रियों की बात की जाए तो हाल ही में गिरिराज सिंह को ग्रामीण विकास जैसा अहम मंत्रालय दिया गया। गिरिराज भी उसी प्रभावी भूमिहार जाति से आते हैं जिससे ललन सिंह। नित्यानंद राय के रूप में भी बिहार से केंद्रीय कैबिनेट में प्रतिनिधित्व है और और अश्विनी चौबे के रूप मे ब्राह्मण चेहरा भी शामिल है। जबकि जदयू के कोटे से आरसीपी सिंह ओबीसी से आते हैं।

रोचक यह है कि अब तक सिर्फ एक मंत्री पद के प्रस्ताव से इनकार कर रहा जदयू इस बार क्यों माना। एक अटकल यह भी है कि लोजपा के खाते से आए पशुपति पारस के मंत्री बनाए जाने में भी जदयू की भूमिका रही। सूत्रों की मानी जाए तो फिलहाल बिहार में राजग सरकार सही दिशा और गति से चल रही है लेकिन भविष्य के लिए सभी दलों में मंथन तेज है। अब तक यह गणित भी काम करता रहा है कि जिधर दो दल मिल जाएंगे सरकार उसी की बनेगी लेकिन अब तीनों दल इससे आगे बढ़ना चाहते है।

यही वजह है कि आने वाले दिनों में हर दल की ओर से छोटे दलों को अपनी ओर खींचने की ज्यादा कोशिश होगी। जदयू संगठन में हुआ नेतृत्व परिवर्तन भी इसी लिहाज से देखा जा रहा है। बताने की जरूरत नहीं है कि बिहार चुनाव से पहले जदयू से बागी हुए नेता जीतन राम मांझी की वापसी हो गई थी। बाद में कभी राजग तो कभी संप्रग में छलांग लगाते रहे उपेंद्र कुशवाहा भी जदयू के हिस्सा हो गए। 


यूपीएससी में बिहार के शुभम कुमार आल इंडिया टॉपर, यहां देखें अपना रिजल्ट

यूपीएससी में बिहार के शुभम कुमार आल इंडिया टॉपर, यहां देखें अपना रिजल्ट

संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने शुक्रवार को सिविल सेवा परीक्षा-2020 का परिणाम घोषित कर दिया है। इसबार यूपीएससी परीक्षा में 761 अभ्यर्थी सफल हुए हैं। बिहार के कटिहार निवासी शुभम कुमार (Roll No. 1519294) ने देशभर में टॉप किया है। वहीं जागृति अवस्थी को दूसरी तो अंकिता जैन को तीसरी रैंक मिली है। वहीं बिहार के जमुई जिले चकाई बाजार निवासी सीताराम वर्णवाल के पुत्र प्रवीण कुमार ने सातवां स्थान हासिल किया है। यूपीएसससी सीएसई 2020 फाइनल रिजल्ट में कुल 25 अभ्यर्थियों ने टॉप किया है, जिसमें 13 पुरुष और 12 महिला अभ्यर्थी हैं। छात्र परिणाम https://www.upsc.gov.in/ पर जाकर देख सकते हैं। रोल नंबर देखने के लिए यहां क्लिक कर सकते हैं। 

शुभम ने आइआइटी बाम्बे से पढ़ाई की है। शुभम को वर्ष 2019 परीक्षा में आल इंडिया में 290 रैंक हासिल हुई थी। टॉपर शुभम ने एंथ्रोपोलॉजी वैकल्पिक विषय से इग्जाम दिया था। आइआइटी बॉम्बे से सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद शुभम ने यूपीएससी की परीक्षा दी थी। वहीं जागृति अवस्थी ने एमएएनआइटी भोपाल से इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग में बीटे की डिग्री हासिल की है। जागृति ने वैकल्पिक विषय के रूप में समाजशास्त्र को चुना था। बता दें कि सिविल सेवा मुख्य परीक्षा का आयोजन जनवरी 2021 में किया गया था। इसमें सफल अभ्यर्थियों का इंटरव्यू अगस्त-सितंबर 2021 में पूरा हुआ था। साक्षात्कार के बाद जिनका चयन किया गया है, उनका नाम वेबसाइट पर जारी कर दिया गया है। इस वर्ष आइएएस के लिए 180, आइएफएस के लिए 36 और आइपीएस के लिए 200 सीटें सुरक्षित हैं। इसके अतिरिक्त सेंट्रल सर्विस ग्रुप एक में 302, ग्रुप बी सर्विस में 118 पद सुरक्षित है। इससे पहले 1987 में आमिर सुबहानी, 1996 में सुनील वर्णवाल तथा 2001 में अलोक रंजन झा यूपीएससी में टाप करने वाले बिहार के अभ्यर्थी थे। 


पिता बनना चाहते थे आइएएस, बेटे ने पूरा किया सपना

शुभम ने कहा कि अपने गांव को देखकर मुझे आइएएस बनने की प्रेरणा मिली। उन्होंने कहा कि यूपीएससी की तैयारी कहीं पर भी रहकर की जा सकती है। मेरी सफलता में परिवार का बड़ा सहयोग है। वहीं शुभम की मां ने कहा कि बेटे ने आज देश में नाम रोशन कर दिया है। शुभम बचपन से ही टॉपर है। शुभम की मां ने कहा कि उसके पिता आइएएस बनना चाहते थे, वो नहीं बन सके तो बेटे ने सपना पूरा कर दिया।